आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: 'भविष्य की तकनीक और भारतीय परंपरा का संगम', बाबा बागेश्वर का जिक्र कर युवाओं को दिया सफलता का मंत्र
नई दिल्ली: देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के दीक्षांत समारोह (Convocation Ceremony) में शनिवार का दिन बेहद खास रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। दीक्षांत समारोह के दौरान पीएम मोदी का संबोधन न केवल तकनीकी शिक्षा और नवाचार (Innovation) पर केंद्रित रहा, बल्कि उन्होंने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और जीवन के मूल्यों पर भी गहरा प्रकाश डाला।
इस दौरान अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने अचानक 'बाबा बागेश्वर' का जिक्र कर सभी को चौंका दिया, जो सोशल मीडिया और आम जनमानस में चर्चा का विषय बन गया। प्रधानमंत्री ने किस संदर्भ में उनका नाम लिया और आईआईटी के छात्रों को क्या महत्वपूर्ण संदेश दिए, आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण।
समारोह की भव्यता और पीएम का स्वागत
आईआईटी दिल्ली का यह दीक्षांत समारोह न केवल संस्थान के लिए, बल्कि पूरे देश के तकनीकी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण था। जब प्रधानमंत्री ने मंच संभाला, तो उनका भव्य स्वागत किया गया। परिसर में हजारों की संख्या में मौजूद भावी इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की आंखों में भविष्य के सुनहरे सपने और राष्ट्र निर्माण का संकल्प साफ दिखाई दे रहा था।
शिक्षा का नया स्वरूप: पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में संस्थान की उपलब्धियों को सराहा और कहा कि आईआईटी दिल्ली केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि भारत की 'तकनीकी महाशक्ति' बनने की यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
बाबा बागेश्वर का जिक्र: क्यों चर्चा में आया प्रधानमंत्री का बयान?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान भारतीय अध्यात्म और युवाओं के जीवन में विश्वास (Faith) की भूमिका पर चर्चा करते हुए बाबा बागेश्वर का नाम लिया।
आस्था और तर्क का संतुलन: प्रधानमंत्री ने कहा कि एक इंजीनियर और वैज्ञानिक के लिए तर्क (Logic) जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही जरूरी है मन की शांति और आत्मविश्वास। उन्होंने कहा, "आजकल युवा पीढ़ी बाबा बागेश्वर जैसे संतों की ओर भी आकर्षित हो रही है। लोग इसे केवल अंधविश्वास या आस्था नहीं, बल्कि उस भारतीय विरासत के रूप में देख रहे हैं जो मन के विज्ञान को समझती है।"
जुड़ाव का संदेश: पीएम मोदी ने समझाया कि तकनीक और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। जिस प्रकार बाबा बागेश्वर जैसे व्यक्तित्व लोगों के दुख-दर्द और मानसिक अशांति को दूर करने में विश्वास रखते हैं, उसी तरह एक इंजीनियर को भी समाज की समस्याओं के प्रति संवेदनशील (Empathetic) होना चाहिए। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों और अपनी संस्कृति से कटें नहीं।
आईआईटी के छात्रों को सफलता का मंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भविष्य के इंजीनियरों के लिए सफलता के कई मंत्र साझा किए, जो उनके करियर की दिशा बदल सकते हैं:
'मेक इन इंडिया' का विजन: उन्होंने कहा कि आज के छात्र केवल नौकरी पाने वाले न बनें, बल्कि नौकरी देने वाले (Job Creators) बनें। उन्होंने 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' के विजन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
समाज के लिए तकनीक (Technology for Society): पीएम ने स्पष्ट किया कि नवाचार (Innovation) का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना होना चाहिए जो अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन को सरल और सुगम बनाए।
विफलता से न डरें: प्रधानमंत्री ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि एक वैज्ञानिक या इंजीनियर का काम 'ट्रायल एंड एरर' (Trial and Error) से चलता है। उन्होंने कहा, "आप तब तक नहीं हारते, जब तक आप कोशिश करना नहीं छोड़ते।"
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती धाक
दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि दुनिया आज भारत की ओर एक उम्मीद की दृष्टि से देख रही है।
डिजिटल इंडिया की सफलता: उन्होंने आईआईटी दिल्ली के छात्रों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने डिजिटल भुगतान और फिनटेक (FinTech) में जो क्रांति की है, वह दुनिया के लिए एक केस स्टडी है।
जलवायु परिवर्तन और समाधान: पीएम ने युवाओं से आग्रह किया कि वे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए स्थायी (Sustainable) तकनीकें विकसित करें, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास की गति को तेज रखें।
छात्रों की प्रतिक्रिया और कार्यक्रम का समापन
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। कई छात्रों ने माना कि पीएम का 'बाबा बागेश्वर' का जिक्र करना यह दिखाता है कि सरकार धर्म, संस्कृति और तकनीक के बीच तालमेल बिठाने को कितना महत्व देती है।
विद्वानों का सम्मान: दीक्षांत समारोह के अंत में मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक (Gold Medals) और डिग्रियां प्रदान की गईं। प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से कई छात्रों को प्रोत्साहित किया।
उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद: समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल आईआईटी दिल्ली के लिए गौरवशाली रहा, बल्कि इसने छात्रों को एक नया दृष्टिकोण और एक नई ऊर्जा भी प्रदान की।
आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन एक बहुआयामी संदेश लेकर आया। जहाँ एक ओर उन्होंने बाबा बागेश्वर का जिक्र करके यह संदेश दिया कि आधुनिक भारत का युवा अपनी संस्कृति और विश्वास का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना सकता है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने युवाओं को देश की प्रगति का इंजन बनने की प्रेरणा दी। निश्चित रूप से, यह समारोह आईआईटी दिल्ली के उन होनहार छात्रों के जीवन का सबसे यादगार दिन रहा, जो अब देश के भविष्य को संवारने की राह पर निकल चुके हैं।