अकबरनगर में नगर निकाय कर्मियों की हड़ताल से जगह-जगह लगा कूड़े का अंबार

अकबरनगर, संवाद सूत्र: बिहार के भागलपुर जिले के प्रमुख व्यावसायिक और ग्रामीण कस्बों में शुमार अकबरनगर क्षेत्र इन दिनों एक गंभीर नागरिक और स्वास्थ्य संकट के मुहाने पर खड़ा है। नगर निकाय और सफाई कर्मियों की चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब अकबरनगर के मुख्य बाजारों, चौराहों और रिहायशी बस्तियों में साफ तौर पर दिखने लगा है। नियमित रूप से कचरे का उठाव ठप होने के कारण जगह-जगह कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ और अंबार लग गए हैं। सड़ते हुए कचरे की दुर्गंध और चारों तरफ फैली गंदगी के कारण स्थानीय दुकानदारों, राहगीरों और आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है। स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि क्षेत्र में डायरिया, मलेरिया, डेंगू और टाइफाइड जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों के भयानक रूप से फैलने की आशंका से लोग दहशत में हैं।

सड़कों और गलियों में तब्दील हुए कूड़े के ढेर

अकबरनगर बाजार का मुख्य चौक, रेलवे स्टेशन रोड, बैंक चौक, और मुख्य बाजार की तंग गलियां जो कभी साफ-सुथरी हुआ करती थीं, वहां इन दिनों कचरे के विशाल ढेर देखे जा सकते हैं:

उठाव ठप होने से बिगड़े हालात: हड़ताल के आठवें दिन भी जब साफ-सफाई का कोई वैकल्पिक इंतजाम धरातल पर नहीं उतरा, तो स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने मजबूरी में अपनी दुकानों और घरों का कचरा सड़कों के किनारे फेंकना शुरू कर दिया।

आवारा पशुओं का जमावड़ा: खुले में फेंके गए सड़े-गले कचरे और खाद्य पदार्थों के अवशेषों को खाने के लिए आवारा कुत्तों, सुअर और मवेशियों का तांता लगा रहता है। इससे सड़कों पर यातायात बाधित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है।

सड़ते कचरे की दुर्गंध से दुकानदारी और जनजीवन ठप

इस भयावह गंदगी का सबसे बुरा असर स्थानीय व्यापारियों और दैनिक जीवन पर पड़ रहा है:

दुकानदारों का कारोबार प्रभावित: मुख्य बाजार के दुकानदारों ने दर्द बया करते हुए बताया कि उनकी दुकानों के ठीक सामने कूड़े का अंबार लग गया है। दिनभर उठने वाली सड़न और बदबू के कारण ग्राहक उनकी दुकानों तक आने से कतराने लगे हैं, जिससे उनका व्यवसाय चौपट हो रहा है।

राहगीरों और स्कूली बच्चों की परेशानी: स्कूल जाने वाले बच्चों और महिलाओं का इस रास्ते से निकलना दूभर हो गया है। नाक पर रुमाल रखकर चलने को विवश लोगों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

संक्रामक बीमारियों का मंडराता साया: स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार खुले में कचरा सड़ने और जलजमाव होने से महामारी फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है:

मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप: कूड़े के ढेरों पर पनपने वाले अनगिनत मक्खी-मच्छर आसपास के घरों में प्रवेश कर रहे हैं। इससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

पीने के पानी संदूषण का डर: बारिश के मौसम या सामान्य सीलन के कारण कचरे का सड़ा हुआ पानी रिसकर भूगर्भ जल या आसपास के जलस्रोतों को दूषित कर सकता है, जिससे डायरिया और पीलिया (हेपेटाइटिस) जैसी जलजनित बीमारियां विकराल रूप ले सकती हैं।

ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों की प्रशासन से गुहार

अकबरनगर के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने जिला प्रशासन और संबंधित स्थानीय निकाय अधिकारियों से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है:

वैकल्पिक सफाई व्यवस्था की मांग: लोगों का कहना है कि भले ही कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, लेकिन प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह वैकल्पिक मजदूरों या स्वच्छता कर्मियों को लगाकर शहर और बाजारों की सफाई सुनिश्चित करे, ताकि आम जनता को इस नरकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।

शीघ्र समाधान की उम्मीद: जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कूड़े का उठाव शुरू नहीं किया गया और स्वच्छता बहाल नहीं की गई, तो अकबरनगर के लोग सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन करने को विवश होंगे।

अकबरनगर में हड़ताल के चलते जगह-जगह लगे कूड़े के अंबार और उससे उत्पन्न हुई बीमारी की आशंका इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रशासनिक लापरवाही कभी भी एक बड़े स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकती है। समय रहते यदि इस समस्या का ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो अकबरनगर की जनता को भारी चिकित्सीय और सामाजिक मूल्य चुकाना पड़ सकता है।