राजकीय आदर्श मध्य विद्यालय में 'पीयर लीडर्स' कार्यक्रम से शिक्षा में आई नई क्रांति

भागलपुर: राज्य की शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने के लिए बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी 'मिशन निपुण बिहार' के अंतर्गत, शनिवार को भागलपुर स्थित राजकीय आदर्श मध्य विद्यालय में एक विशेष 'पीयर लीडर्स' (Peer Leaders) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न केवल विद्यालय के वातावरण को शैक्षणिक ऊर्जा से भर दिया, बल्कि विद्यार्थियों को एक-दूसरे के साथ मिलकर सीखने और आगे बढ़ने का एक नया मंच भी प्रदान किया।

मिशन का लक्ष्य: साक्षर और संख्यात्मक रूप से सक्षम बिहार

'मिशन निपुण बिहार' भारत सरकार के राष्ट्रीय 'निपुण भारत' (NIPUN Bharat) अभियान का एक अभिन्न अंग है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2026-27 तक कक्षा 3 तक के प्रत्येक बच्चे में बुनियादी साक्षरता (Foundational Literacy) और संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Numeracy) को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करना है। इसका सरल अर्थ यह है कि प्रत्येक बच्चा तीसरी कक्षा उत्तीर्ण करने तक बिना अटके कहानी पढ़ सके, अपने विचारों को लिख सके और गणित की बुनियादी क्रियाएं जैसे जोड़, घटाव, गुणा और भाग को आसानी से हल कर सके।

पीयर लीडर्स कार्यक्रम: छात्रों के हाथ में नेतृत्व की कमान

राजकीय आदर्श मध्य विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता 'पीयर लर्निंग' (Peer Learning) तकनीक रही। शिक्षा विभाग द्वारा चयनित और प्रशिक्षित छात्रों को 'पीयर लीडर्स' के रूप में तैयार किया गया है। ये छात्र उन सहपाठियों की मदद करते हैं जो पढ़ने या गणित के कठिन सवालों को हल करने में थोड़ी कठिनाई महसूस करते हैं।

आत्मविश्वास का निर्माण: जब एक छात्र अपने ही साथी से सीखता है, तो उसमें झिझक कम होती है। शिक्षकों का मानना है कि इस प्रक्रिया से सीखने की गति में तीन गुना सुधार देखा गया है।

नेतृत्व क्षमता का विकास: जिन छात्रों को 'पीयर लीडर' के रूप में चुना गया है, उनमें नेतृत्व करने का आत्मविश्वास जगा है, जो उनके भविष्य के लिए एक बड़ा आधार तैयार कर रहा है।

खेल-खेल में शिक्षा: 'जादुई पिटारा' का कमाल

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर एक जीवंत प्रयोगशाला में तब्दील हो गया। शिक्षकों ने पारम्परिक ब्लैकबोर्ड पद्धति से इतर 'जादुई पिटारा' (Jaadui Pitara) और खेल-आधारित शिक्षण सामग्री का उपयोग किया। रंग-बिरंगे फ्लैश कार्ड्स, कहानियों की पुस्तकें और गणितीय खिलौनों का उपयोग करते हुए छात्रों ने बड़े उत्साह के साथ जटिल अवधारणाओं को आत्मसात किया।

शिक्षकों ने इस दौरान छात्रों को रटने के बजाय तर्क के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित किया। इस पहल का सीधा संदेश यह था कि "शिक्षा बोझ नहीं, बल्कि एक आनंदमयी अनुभव है।"

अभिभावक और शिक्षक की सहभागिता

मिशन की सफलता केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह सकती। इस कार्यक्रम में अभिभावकों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। उन्हें यह समझाया गया कि कैसे वे घर पर बच्चों को पढ़ने का माहौल दे सकते हैं। विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों ने अभिभावकों से आग्रह किया कि:

नियमित संवाद: स्कूल में बच्चा क्या सीख रहा है, इस पर नियमित चर्चा करें।

सीखने का माहौल: घर पर बच्चों को कहानियों की किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।

निरंतर निगरानी: बच्चों के गृहकार्य और उनके सीखने की गति पर नजर रखें।

शिक्षा के स्तर में बड़ा बदलाव

'मिशन निपुण बिहार' के तहत इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल साक्षरता दर में वृद्धि करेंगे, बल्कि भविष्य में स्कूल छोड़ने (Dropout) की दर को भी न्यूनतम स्तर पर लाने में सहायक सिद्ध होंगे। राजकीय आदर्श मध्य विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में छात्रों की बुनियादी कौशल क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

एक मजबूत नींव, एक उज्ज्वल भविष्य

शनिवार को भागलपुर के इस विद्यालय में आयोजित 'पीयर लीडर्स' कार्यक्रम यह साबित करता है कि यदि सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो बिहार के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे किसी भी निजी संस्थान के छात्रों से पीछे नहीं हैं।

2026-27 का लक्ष्य दूर जरूर है, लेकिन 'मिशन निपुण बिहार' की यह मुहिम बताती है कि राज्य की शिक्षा का कायाकल्प अब शुरू हो चुका है। राजकीय आदर्श मध्य विद्यालय के छात्रों का यह उत्साह यह विश्वास दिलाता है कि आने वाला बिहार एक 'साक्षर और निपुण' बिहार होगा। इस मिशन की निरंतरता ही राज्य को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।