सहरसा में दर्दनाक हादसा: पतरघट के धबौली पूर्वी पंचायत में करंट लगने से महिला की मौत; खेत में अवैध रूप से छोड़े गए करंट से गई जान, पसरा मातम

सहरसा/पतरघट (बिहार): बिहार के सहरसा जिले के पतरघट प्रखंड के अंतर्गत आने वाली धबौली पूर्वी पंचायत से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। जिले में लगातार हो रही लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण एक और बेकसूर महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी है। शनिवार की सुबह धबौली पूर्वी पंचायत में खेतों की तरफ से मवेशियों का चारा (घास) लेकर लौट रही 40 वर्षीय गीता देवी की खेत में प्रवाहित किए गए घातक विद्युत करंट की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई।

'हिन्दुस्तान' संवाददाता से प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस हृदय विदारक घटना के बाद से पूरे इलाके में कोहराम मच गया है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। गीता देवी अपनी एक अन्य महिला साथी के साथ खेतों से मवेशियों का चारा लेकर घर वापस लौट रही थीं, तभी रास्ते में यह खौफनाक हादसा हुआ। आइए जानते हैं इस दुर्घटना की पूरी पृष्ठभूमि, खेत में करंट छोड़े जाने के गैरकानूनी कारणों, परिजनों के विलाप और इस मामले पर प्रशासनिक व ग्रामीणों की प्रतिक्रिया का विस्तृत विवरण।

घटना की पृष्ठभूमि: चारा लाने गई महिला पर टूटा कहर

ग्रामीण इलाकों में पशुपालन आजीविका का एक बड़ा साधन है, जिसके लिए महिलाएं रोज सुबह खेतों और दियारा क्षेत्रों से मवेशियों के लिए हरी घास काटने जाती हैं।

रोजमर्रा की तरह निकली थीं गीता देवी: शनिवार की सुबह करीब 40 वर्षीय गीता देवी अपनी एक अन्य ग्रामीण महिला सहकर्मी के साथ धबौली पूर्वी पंचायत के खेतों की ओर चारा काटने गई थीं। कुछ घंटों तक घास काटने के बाद, जब दोनों महिलाएं बंडल सिर पर रखकर अपने घरों की तरफ लौट रही थीं, तब यह अनहोनी घटित हुई।

अचानक चपेट में आना: लौटते वक्त रास्ते में एक खेत से गुजरते समय गीता देवी अचानक करंट की चपेट में आ गई। करंट का प्रवाह इतना तीव्र था कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे वहीं अचेत होकर गिर पड़ीं। उनके साथ मौजूद दूसरी महिला जब तक कुछ समझ पाती और मदद के लिए पुकारती, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

खेत में करंट छोड़ने का अवैध और खतरनाक खेल

इस हादसे ने ग्रामीण क्षेत्रों में फसल या सब्जियों की सुरक्षा के नाम पर अपनाए जाने वाले अवैध और जानलेवा तरीकों की पोल खोल दी है।

फसल सुरक्षा के नाम पर मौत का जाल: शुरुआती जांच और ग्रामीणों के बयानों के अनुसार, कुछ स्थानीय लोगों ने अपने खेतों या फसलों को मवेशियों या आवारा पशुओं से बचाने के लिए अनधिकृत रूप से बिजली के घरेलू या नंगे तारों से खेतों के चारों तरफ करंट प्रवाहित कर रखा था।

मानवीय भूल और आपराधिक लापरवाही: खेतों में इस तरह नंगा करंट छोड़ना पूरी तरह से गैरकानूनी और आपराधिक कृत्य है। बिजली सुरक्षा अधिनियम के तहत यह दंडनीय अपराध है, इसके बावजूद कई किसान या भूस्वामी चोरी-छिपे ऐसा करते हैं, जो किसी भी निर्दोष इंसान या मवेशी की जान ले सकता है। इस मामले में भी इसी लापरवाही के कारण गीता देवी को अपनी जान गंवानी पड़ी।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल और ग्रामीणों का आक्रोश

घटना की सूचना मिलते ही मृतका के घर में कोहराम मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर एकत्र हो गए।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: मृतका गीता देवी के पति और उनके छोटे-छोटे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ही कमजोर थी, और अब घर की मुख्य महिला सदस्य के असमय निधन से परिवार के सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

सड़क जाम और हंगामा: आक्रोशित ग्रामीणों ने घटना के तुरंत बाद प्रशासन और स्थानीय पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि खेतों में खुलेआम करंट प्रवाहित किए जाने की शिकायतों पर बिजली विभाग और स्थानीय पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती है, जिसके कारण ऐसे हादसों को बढ़ावा मिल रहा है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलने पर पतरघट थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

शव को कब्जे में लेना: पुलिस ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया और मृतका के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, सहरसा भेज दिया।

मामले की जांच और प्राथमिकी: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में लिखित आवेदन के आधार पर संबंधित खेत मालिक या दोषी व्यक्तियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) और विद्युत अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

पतरघट के धबौली पूर्वी पंचायत में गीता देवी की करंट लगने से हुई मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि इंसानियत की गिरती संवेदनाओं और सुरक्षा नियमों की घोर अनदेखी का परिणाम है। फसल बचाने के नाम पर खेतों में करंट प्रवाहित करने जैसी खतरनाक प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने होंगे। जब तक ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ मिसाल कायम करने वाली सजा नहीं दी जाएगी, तब तक ग्रामीण इलाकों में ऐसी जानलेवा घटनाएं होती रहेंगी। इस दुखद घड़ी में सरकार और स्थानीय प्रशासन को पीड़ित परिवार को तुरंत उचित मुआवजा और सहायता प्रदान करनी चाहिए।