पांच महीने से वेतन नहीं मिलने पर भड़का मदरसा शिक्षकों का आक्रोश: बिहार के मदरसा टीचर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन ने जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन, आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी
पूर्णिया/पटना: बिहार के मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के सामने इन दिनों विकट आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। राज्यभर के मदरसों में कार्यरत शिक्षक पिछले पांच महीनों से लगातार वेतन (Salary) नहीं मिलने के कारण भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं। इस गंभीर समस्या के विरोध में 'बिहार मदरसा टीचर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन' के बैनर तले शिक्षकों और कर्मचारियों ने गोलबंद होकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (District Education Officer - DEO) के कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया।
एसोसिएशन के शिष्टमंडल ने डीईओ के माध्यम से बिहार के माननीय मुख्यमंत्री के नाम एक मांग-पत्र सह ज्ञापन (Memorandum) सौंपा है, जिसमें तत्काल प्रभाव से लंबित वेतन के भुगतान की गुहार लगाई गई है। शिक्षकों का कहना है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे राज्य स्तर पर बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे। आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम और शिक्षकों के दर्द का एक-एक विस्तृत विवरण।
क्या है पूरा मामला? पांच महीने से वेतन न मिलने की पीड़ा
राज्य के अनुदानित और मान्यता प्राप्त मदरसों में कार्यरत हजारों शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों (Non-Teaching Staff) के घरों में पिछले पांच महीनों से चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। सरकार और शिक्षा विभाग के दावों के विपरीत जमीनी हकीकत यह है कि इन शिक्षकों को समय पर वेतन नसीब नहीं हो रहा है।
लंबे समय से खाली हाथ हैं शिक्षक: मदरसा शिक्षकों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले पांच महीनों से वेतन का एक भी पैसा उनके खातों में नहीं आया है। त्यौहार, पर्व-त्योहार और रोजमर्रा के खर्चों के लिए उन्हें कर्ज लेने या दूसरों के आगे हाथ फैलाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
परिवार के भरण-पोषण का संकट: आज के इस महंगाई के दौर में पांच महीने तक बिना वेतन के परिवार चलाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। कई शिक्षकों के बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस जमा नहीं हो पा रही है, तो कुछ बीमार शिक्षकों के पास अपनी दवाइयां खरीदने तक के पैसे नहीं बचे हैं।
मानसिक तनाव और डिप्रेशन: लगातार आर्थिक तंगी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण मदरसा शिक्षक गंभीर मानसिक तनाव और डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं, जिसका सीधा असर उनकी शिक्षण कार्यकुशलता पर भी पड़ रहा है।
ज्ञापन के मुख्य बिंदु: मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
बिहार मदरसा टीचर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई गई हैं:
तत्काल पांच महीने का बकाया वेतन भुगतान: बिना किसी विलंब के पिछले पांच महीनों के लंबित वेतन का एकमुश्त भुगतान मदरसा शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से किया जाए।
नियमित वेतन भुगतान की व्यवस्था: मदरसा शिक्षकों के लिए एक स्थाई और सुचारू प्रणाली विकसित की जाए ताकि हर महीने की एक निश्चित तारीख को उनके खाते में वेतन आ सके, जैसा कि अन्य सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के साथ होता है।
अनुदान और वित्तीय आवंटन में प्रशासनिक लेटलतीफी पर रोक: एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के बीच समन्वय की कमी या फाइलों के लालफीताशाही (Red Tapism) के कारण मदरसा शिक्षा का बजट और वेतन राशि समय पर जारी नहीं हो पाती है।
एसोसिएशन के नेताओं की दो टूक चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि शिक्षकों के सबध का बांध अब टूट रहा है।
शोषण और भेदभाव का आरोप: नेताओं का कहना है कि अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को समय पर वेतन मिल रहा है, लेकिन मदरसा शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। क्या मदरसा कर्मी इस राज्य के नागरिक नहीं हैं? क्या उनके बच्चे नहीं हैं?
उग्र आंदोलन की चेतावनी: यदि आने वाले कुछ ही दिनों के भीतर शिक्षा विभाग द्वारा वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं की जाती है, तो मदरसा टीचर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन (जैसे धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल) करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
जिला शिक्षा पदाधिकारी का रुख और आश्वासन
एसोसिएशन के ज्ञापन को प्राप्त करने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना।
शासन तक बात पहुंचाने का भरोसा: डीईओ ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और पांच महीने से वेतन न मिलने के कारण उत्पन्न हुई गंभीर स्थिति से राज्य मुख्यालय और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों तथा शासन को अवगत करा दिया गया है।
जल्द समाधान की उम्मीद: प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से यह भरोसा दिलाया गया है कि आवंटਨ आते ही जल्द से जल्द वेतन निकासी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, ताकि शिक्षकों को इस आर्थिक संकट से मुक्ति मिल सके।
बिहार के मदरसा टीचर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा पांच महीने से वेतन न मिलने पर जिला शिक्षा पदाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा गया यह ज्ञापन राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है। एक तरफ जहां सरकार शिक्षा के अधिकार और डिजिटल बिहार की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ ज्ञान की रोशनी बांटने वाले गुरुदेव और मदरसा शिक्षक अपने हक के वेतन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। समय की मांग है कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करे और मदरसा कर्मियों के बकाया वेतन का भुगतान तुरंत सुनिश्चित करे, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित हो सके।