सुल्तानगंज में आस्था का सैलाब; गार्डन रीच, कोलकाता से पहुंचे 60 कांवरियों का विशेष जत्था; आकर्षक और भव्य कांवर लेकर बाबाधाम के लिए हुए रवाना

भागलपुर/सुल्तानगंज, कार्यालय संवाददाता: पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा तट की पावन भूमि सुल्तानगंज इन दिनों बोल बम के जयकारों और शिवमय माहौल से पूरी तरह गूंज रही है। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के दौरान देश के कोने-कोने से शिव भक्तों के पहुंचने का सिलसिला अनवरत जारी है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के प्रसिद्ध क्षेत्र गार्डन रीच (Garden Reach) से आए लगभग 60 कांवरियों का एक विशेष और अनुशासित जत्था सुल्तानगंज पहुंचा है। कोलकाता से पहुंचे इन श्रद्धालुओं ने बेहद आकर्षक और अनूठे कांवर सजाए हैं, जो स्थानीय लोगों और अन्य कांवरियों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। गंगा जल भरकर यह जत्था बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर और बासुकीनाथ के लिए पैदल यात्रा पर रवाना हो चुका है।

क्या है जत्था की खासियत और कैसे पहुंचे सुल्तानगंज?

कोलकाता के गार्डन रीच से आए इस दल की धार्मिक निष्ठा और सजावट देखने लायक थी:

कोलकाता से बसों और ट्रेनों द्वारा पहुंचे श्रद्धालु: कोलकाता के गार्डन रीच इलाके से आए इन शिव भक्तों में युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। सभी ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया था कि वे इस बार सावन के पवित्र महीने में सुल्तानगंज आकर उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाएंगे और कठिन पैदल यात्रा करते हुए देवघर पहुंचेंगे।

पारंपरिक वेशभूषा और अनुशासन: भगवा वस्त्रों में सजे इन कांवरियों का पूरा जत्था पूरी तरह अनुशासित नजर आया। यात्रा के दौरान वे पारंपरिक शिव भजनों और डमरू की थाप के साथ आगे बढ़ रहे थे, जिससे संपूर्ण सुल्तानगंज क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया है।

आकर्षक कांवर बने शहर भर में चर्चा का विषय

इस जत्था की सबसे बड़ी विशेषता उनके द्वारा तैयार किए गए कलात्मक और भव्य कांवर थे:

विशाल और सुंदर कलाकृतियां: गार्डन रीच के इन कांवरियों ने जो कांवर उठाए हैं, उन्हें बहुत ही करीने से सजाया गया है। रंग-बिरंगे फूलों, लाइटों, झंडों और पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों से सजे इन कांवरों की सजावट देखने के लिए घाट पर स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

कलश स्थापना और विधिवत पूजा: गंगा तट पर पहुंचने के बाद इन कांवरियों ने पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच विधिवत रूप से मां गंगा की पूजा-अर्चना की और अपने-अपने आकर्षक कांवर में जल भरा। इसके बाद उन्होंने संकल्प लेकर 'बोल बम' के जयकारे के साथ अपनी कठिन कांवड़ यात्रा की शुरुआत की।

स्थानीय लोगों और प्रशासन द्वारा भव्य स्वागत

कोलकाता से पहुंचे इस बड़े जत्था का सुल्तानगंज पहुंचने पर स्थानीय सेवा शिविरों और प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया:

सेवा शिविरों की भूमिका: सुल्तानगंज से देवघर तक जाने वाले रास्ते में विभिन्न सामाजिक संगठनों और सेवा शिविरों द्वारा कांवरियों के विश्राम, खान-पान और चिकित्सा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कोलकाता के इन कांवरियों ने भी स्थानीय व्यवस्था और प्रशासन की सराहना की है।

प्रशासनिक सुरक्षा प्रबंध: जिला प्रशासन और पुलिस बल द्वारा कांवरिया पथ पर सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं ताकि देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले शिव भक्तों को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

गार्डन रीच, कोलकाता के 60 कांवरियों के जत्था का सुल्तानगंज पहुंचकर आकर्षक कांवर के साथ देवघर के लिए रवाना होना इस बात का प्रमाण है कि बाबा बैद्यनाथ के प्रति अगाध श्रद्धा भौगोलिक सीमाओं को पार कर जाती है। यह भव्य यात्रा श्रावणी मेले की दिव्यता और भव्यता को और अधिक प्रगाढ़ कर रही है, जिससे पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया है।