मुहर्रम पर उपद्रवियों और अफवाहबाजों की खैर नहीं; डीएम कौशल कुमार ने दिए कड़े प्रशासनिक निर्देश, सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
हाई-लेवल मीटिंग: समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी (DM) कौशल कुमार की अध्यक्षता में जिला शांति समिति की बैठक संपन्न।
जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों के खिलाफ होगी त्वरित कानूनी कार्रवाई।
डिजिटल पहरा: सोशल मीडिया और भड़काऊ पोस्ट पर साइबर सेल की 24 घंटे पैनी नजर; ग्रुप एडमिन भी नपेंगे।
सिविक एमेनिटीज: जुलूस मार्गों पर विशेष साफ-सफाई, चूने-ब्लीचिंग का छिड़काव और लटकते बिजली तारों को दुरुस्त करने का अल्टीमेटम।
हेल्थ अलर्ट: DMCH समेत सभी पीएचसी अलर्ट मोड पर; संवेदनशील मोड़ों पर तैनात रहेंगे मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस।
विशेष संवाददाता, दरभंगा
आगामी मुहर्रम पर्व को संपूर्ण जिले में शांतिपूर्ण, सुरक्षित और आपसी भाईचारे के माहौल में संपन्न कराने के लिए दरभंगा जिला प्रशासन पूरी तरह 'एक्शन मोड' में आ गया है। जिले की ऐतिहासिक गंगा-जमुनी तहजीब और कानून-व्यवस्था को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से जिलाधिकारी (DM) कौशल कुमार की अध्यक्षता में जिला समाहरणालय के सभागार में एक उच्चस्तरीय जिला शांति समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), उप विकास आयुक्त (DDC), सभी अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) सहित जिले के प्रबुद्ध नागरिक और केंद्रीय शांति समिति के सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित थे।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी कौशल कुमार और पुलिस कप्तान ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया कि त्योहार के दौरान हुड़दंग करने वाले, सांप्रदायिक रंग देने वाले या किसी भी प्रकार की अशांति फैलाने वाले तत्वों से प्रशासन बेहद कड़ाई से निपटेगा। इसके साथ ही, आम जनता की सुविधा के लिए साफ-सफाई, निर्बाध बिजली, शुद्ध पेयजल और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई कड़े और समयबद्ध निर्देश जारी किए गए हैं।
असामाजिक तत्वों पर 'प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक', ड्रोन से होगी निगरानी
कानून-व्यवस्था को शीर्ष प्राथमिकता बताते हुए जिलाधिकारी कौशल कुमार ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने थाना क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई शुरू करें।
सीसीए और धारा 107 के तहत कार्रवाई: जिले के सभी थानों को अपने रिकॉर्ड खंगालकर पिछले वर्षों में त्योहारों के दौरान अशांति फैलाने वाले या संदिग्ध आचरण वाले असामाजिक तत्वों की सूची अपडेट करने को कहा गया है। ऐसे तत्वों को चिन्हित कर तुरंत धारा 107 (CrPC/BNSS) के तहत बांड डाउन कराने और आवश्यकतानुसार सीसीए (CCA) के तहत जिला बदर करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
ड्रोन और तीसरी आंख का पहरा: मुहर्रम के पारंपरिक जुलूस और ताजिया मिलान के मुख्य रास्तों, विशेषकर संवेदनशील और अति-संवेदनशील मोड़ों पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जा रहे हैं। प्रशासन इस बार संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों के जरिए आसमान से भी उपद्रवियों पर नजर रखेगा। हर छोटे-बड़े अखाड़े और जुलूस की अनिवार्य रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी।
दंगाइयों को सीधी चेतावनी: जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा, "शांति व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अगर किसी ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, तो उसकी जगह सीधे जेल की सलाखों के पीछे होगी।"
सोशल मीडिया पर 'साइबर सेल' का कड़ा पहरा: अफवाह फैलाई तो अरेस्टिंग तय
इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए तेजी से फैलने वाली अफवाहों को सांप्रदायिक तनाव का सबसे बड़ा कारण मानते हुए जिला प्रशासन ने इस मोर्चे पर अपनी रणनीति पूरी तरह साफ कर दी है।
एसएसपी और डीएम का संयुक्त अल्टीमेटम: "फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जिला पुलिस की साइबर सेल 24 घंटे मॉनिटरिंग कर रही है। किसी भी प्रकार की भड़काऊ पोस्ट, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले मीम्स या फर्जी खबरों (Fake News) को फॉरवर्ड या शेयर करने वालों को सीधे गिरफ्तार किया जाएगा। केवल पोस्ट करने वाला ही नहीं, बल्कि संबंधित व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन (Group Admin) पर भी कानून की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।"
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी असत्यापित मैसेज पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सूचना की जानकारी तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) या स्थानीय थाने को दें।
बुनियादी सुविधाओं की कमान: स्वास्थ्य, स्वच्छता और बिजली पर विशेष फोकस
मुहर्रम के अखाड़ों और जुलूसों में जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए जिलाधिकारी ने नागरिक सुविधाओं को समय रहते दुरुस्त करने का आदेश दिया है:
मार्गों की सफाई और चूना-ब्लीचिंग का छिड़काव
नगर आयुक्त और सभी नगर पंचायतों के कार्यपालक पदाधिकारियों को सख्त लहजे में कहा गया है कि जुलूस के गुजरने वाले सभी रास्तों की मुकम्मल साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। नालियों को ढका जाए और जलजमाव वाले स्थानों से पानी की निकासी कर वहां भारी मात्रा में चूने और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जाए, ताकि स्वच्छता बनी रहे और संक्रमण का खतरा न हो।
DMCH सहित सभी अस्पताल अलर्ट मोड पर
स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा करते हुए डीएम ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि मुहर्रम के दौरान दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) समेत जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और अनुमंडल अस्पतालों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा जाए।
मुख्य जुलूस मार्गों और ताजिया मिलान स्थलों पर विशेष मेडिकल कैंप स्थापित किए जाएंगे, जहां चिकित्सकों की टीम जीवन रक्षक दवाओं और ओआरएस (ORS) घोल के साथ मुस्तैद रहेगी।
किसी भी आपात स्थिति से त्वरित निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में फायर ब्रिगेड (अग्निशामक वाहन) और ऑक्सीजन सिलिंडर से लैस एम्बुलेंस को रणनीतिक स्थानों पर तैनात करने का आदेश दिया गया है।
बिजली के लटकते तारों को ठीक करने का अल्टीमेटम
चूंकि मुहर्रम के जुलूस में ऊंचे-ऊंचे पारंपरिक ताजिया निकाले जाते हैं, इसलिए बिजली के ढीले और लटकते तार बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया गया है कि वे युद्धस्तर पर सभी रूटों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कर तारों को ऊपर कसवाएं। जुलूस के दौरान एहतियातन बिजली कटौती और वैकल्पिक लाइटिंग की व्यवस्था की रूपरेखा भी तैयार रखने को कहा गया है।
डीजे (DJ) पर पूर्ण प्रतिबंध, लाइसेंस की शर्तों का पालन अनिवार्य
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि शांति समिति और प्रशासन के नियमों का उल्लंघन करने वाले अखाड़ों पर सख्त कार्रवाई होगी:
डीजे पर 'नो टॉलरेंस': मुहर्रम के जुलूस में उत्तेजक, भड़काऊ या तेज आवाज वाले डीजे (DJ) बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। केवल पारंपरिक वाद्य यंत्रों (ताशा, ढोल आदि) की ही अनुमति होगी। नियम तोड़ने वाले अखाड़ा प्रबंधकों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर डीजे को तुरंत जब्त कर लिया जाएगा।
रूट और समय की बाध्यता: केवल उन्हीं अखाड़ों को जुलूस निकालने की अनुमति होगी जिनके पास वैध प्रशासनिक लाइसेंस (License) होगा। लाइसेंस में अंकित रूट और समय सीमा का कड़ाई से पालन करना होगा। किसी भी परिस्थिति में नए रूट की अनुमति नहीं दी जाएगी।
'शांति दूत' बनकर काम करें शांति समिति के सदस्य
बैठक के समापन सत्र में जिलाधिकारी कौशल कुमार ने समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और शांति समिति के सदस्यों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रशासनिक व्यवस्था तब तक पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकती जब तक उसे जनता का सहयोग न मिले। उन्होंने सभी सदस्यों से अपने-अपने वार्डों और पंचायतों में 'शांति दूत' के रूप में सक्रिय रहने और किसी भी छोटे विवाद को स्थानीय स्तर पर ही संवाद के जरिए सुलझाने की अपील की। आगामी दिनों में सभी थानों में स्थानीय शांति समिति की बैठकें भी आयोजित की जाएंगी।
दरभंगा समाहरणालय में हुई यह उच्चस्तरीय बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जिला प्रशासन कानून-व्यवस्था और जन-सुविधाओं को लेकर किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं है। कड़े सुरक्षा मानकों, डिजिटल निगरानी और बुनियादी नागरिक सुविधाओं (स्वास्थ्य व स्वच्छता) की समयपूर्व तैयारियों से यह साफ है कि दरभंगा में मुहर्रम का पर्व पूरी शिद्दत, शांति, सुरक्षा और आपसी सौहार्द के साथ संपन्न होगा।