डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर कांग्रेस पर बरसे नित्यानंद राय, बोले- नेहरू की जिद और जिन्ना की मांगों से हुआ देश का विभाजन
पटना, डिजिटल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर एक बार फिर कांग्रेस और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की नीतियों को कठघरे में खड़ा किया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए देश के विभाजन के लिए कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति, पंडित जवाहरलाल नेहरू की जिद और मोहम्मद अली जिन्ना की मांगों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में हुई इस त्रासदी के पीछे तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व की नीतियां प्रमुख कारण थीं।
पटना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और उसके बाद लिए गए कुछ राजनीतिक निर्णयों ने देश को विभाजन की ओर धकेल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता प्राप्ति के लिए तुष्टीकरण की नीति अपनाई, जिसके परिणामस्वरूप देश का बंटवारा हुआ और करोड़ों लोगों को विस्थापन तथा हिंसा का सामना करना पड़ा।
नित्यानंद राय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उन महान नेताओं में थे जिन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने हमेशा अखंड भारत की अवधारणा का समर्थन किया और देश को एक सूत्र में बांधने के लिए संघर्ष किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए डॉ. मुखर्जी ने लंबा संघर्ष किया और अंततः अपने प्राणों की आहुति दे दी।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का प्रसिद्ध नारा "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे" आज भी देशवासियों को राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश देता है। उनके विचारों और सिद्धांतों ने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी तथा राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने का कार्य किया।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा कि वर्षों तक जम्मू-कश्मीर में विशेष प्रावधान लागू रहने के कारण वहां अलगाववाद और राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा मिला। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 को समाप्त कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को साकार किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक संवैधानिक बदलाव नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय एकता की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम था।
नित्यानंद राय ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सराहना करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि संसद में व्यापक चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया और आज जम्मू-कश्मीर विकास एवं लोकतंत्र की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।
अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश विभाजन के समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल के हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके प्रयासों के कारण पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा। उन्होंने दावा किया कि यदि उस समय मुखर्जी दृढ़ता से खड़े नहीं होते तो बंगाल के बड़े हिस्से की स्थिति अलग हो सकती थी।
नित्यानंद राय ने पश्चिम बंगाल की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वहां के लोगों ने राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक और सामाजिक उपस्थिति मजबूत कर रही है और जनता का समर्थन बढ़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी कांग्रेस की कई नीतियों ने देश की एकता और अखंडता को चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता दी, जबकि भाजपा हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानती रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा का लक्ष्य देश को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाना है।
कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।
भाजपा नेताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपने राजनीतिक जीवन में राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत लाभ या राजनीतिक स्वार्थ को महत्व नहीं दिया। यही कारण है कि आज भी देशभर में उन्हें सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर भाजपा द्वारा कांग्रेस और नेहरू की नीतियों की आलोचना करना आगामी राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा माना जा सकता है। बिहार सहित कई राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और ऐसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दे सकते हैं।
वहीं कांग्रेस नेताओं ने पूर्व में ऐसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि देश का विभाजन ऐतिहासिक परिस्थितियों और कई जटिल राजनीतिक कारणों का परिणाम था। कांग्रेस का कहना रहा है कि स्वतंत्रता आंदोलन में पार्टी की भूमिका और योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि, भाजपा और कांग्रेस के बीच इतिहास को लेकर चल रही राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर दिए गए नित्यानंद राय के बयान ने इस बहस को नया आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल भाजपा इस अवसर को राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के अभियान के रूप में देख रही है। वहीं विपक्षी दल भाजपा के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।