कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी नेटवर्क पर एनआईए का बड़ा एक्शन, बिहार समेत कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी; डिजिटल उपकरण और अहम दस्तावेज बरामद

पटना। कंबोडिया से जुड़े कथित मानव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ा अभियान चलाते हुए बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई को मानव तस्करी और साइबर अपराध से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एनआईए की टीमों ने संदिग्धों के ठिकानों पर पहुंचकर व्यापक तलाशी अभियान चलाया, जहां से स्मार्टफोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन, डिजिटल स्टोरेज डिवाइस, बैंकिंग से जुड़े रिकॉर्ड, पहचान संबंधी दस्तावेज तथा कई अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की गई।

जानकारी के अनुसार, एनआईए लंबे समय से इस नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई थी कि भारत के विभिन्न राज्यों से लोगों को आकर्षक नौकरी, अधिक वेतन और विदेश में बेहतर रोजगार का झांसा देकर कंबोडिया भेजा जाता था। वहां पहुंचने के बाद कई लोगों को कथित रूप से उनकी इच्छा के विरुद्ध साइबर धोखाधड़ी, ऑनलाइन ठगी और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता था। इन्हीं आरोपों की जांच के तहत एनआईए ने समन्वित कार्रवाई करते हुए कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की।

जांच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान बरामद किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। इन उपकरणों से संदिग्धों के बीच हुए संवाद, वित्तीय लेनदेन, विदेश यात्रा से जुड़े रिकॉर्ड और नेटवर्क के अन्य सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित गिरोह के तार देश और विदेश में किन-किन लोगों से जुड़े हुए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, मानव तस्करी का यह नेटवर्क सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप और ऑनलाइन जॉब पोर्टलों के माध्यम से युवाओं को निशाना बनाता था। बेरोजगार युवाओं को आकर्षक वेतन, मुफ्त वीजा, हवाई टिकट और विदेश में शानदार नौकरी का लालच देकर संपर्क किया जाता था। कई मामलों में उम्मीदवारों से प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क भी लिया जाता था। विदेश पहुंचने के बाद उनकी स्वतंत्रता सीमित कर दी जाती थी और कथित तौर पर उनसे जबरन साइबर अपराध से जुड़े कार्य कराए जाते थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संगठित गिरोह सक्रिय हुए हैं, जो विभिन्न देशों के युवाओं को रोजगार के नाम पर फंसाने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार के मामलों में पीड़ितों के पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उन्हें बाहर निकलने से रोका जाता है। कई पीड़ितों ने पहले भी ऐसे अनुभव साझा किए हैं कि उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर किया गया।

एनआईए की छापेमारी का उद्देश्य केवल संदिग्धों को चिन्हित करना ही नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की संरचना को समझना भी है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि भर्ती करने वाले एजेंट, फर्जी प्लेसमेंट एजेंसियां, वित्तीय सहयोगी और विदेश में मौजूद संचालक किस प्रकार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जांच में बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि बरामद डिजिटल उपकरण इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकते हैं। लैपटॉप, स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से प्राप्त डाटा के आधार पर नेटवर्क के संचालन, संपर्कों और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। यदि जांच में किसी नए व्यक्ति या संगठन की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

मानव तस्करी और साइबर अपराध जैसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि जांच के दौरान विदेशी नागरिकों या विदेशी संगठनों की भूमिका सामने आती है, तो संबंधित देशों की एजेंसियों से भी समन्वय स्थापित किया जा सकता है। इससे पूरे नेटवर्क का खुलासा करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद मिलेगी।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बेरोजगारी और विदेश में बेहतर रोजगार की चाह रखने वाले युवाओं को फर्जी नौकरी के प्रस्तावों से सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी विदेशी नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले संबंधित कंपनी, भर्ती एजेंसी और वीजा प्रक्रिया की पूरी जांच करनी चाहिए। सरकारी मान्यता प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से ही विदेश रोजगार की प्रक्रिया अपनाना सुरक्षित माना जाता है।

एनआईए की इस कार्रवाई को मानव तस्करी और संगठित साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। एजेंसी का उद्देश्य केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना भी है, जो लोगों की मजबूरी और रोजगार की तलाश का फायदा उठाकर उन्हें अवैध गतिविधियों में धकेलते हैं।

फिलहाल बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की गहन जांच जारी है। एनआईए की टीम विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है तथा इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही है। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।