मुजफ्फरपुर: नगर निगम की सुस्ती से अटके 150 से अधिक मकानों के नक्शे, बैंक लोन लेने वाले उपभोक्ता परेशान
मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर नगर निगम क्षेत्र में घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। नगर निगम कार्यालय में मकान के नक्शों की स्वीकृति प्रक्रिया में अत्यधिक देरी के कारण सैकड़ों आवेदकों का काम अधर में लटक गया है। मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में 150 से अधिक मकानों के नक्शे 'फाइनल स्टेज' (अंतिम चरण) में फाइलों में दबे हुए हैं, जिसके कारण मकान मालिकों को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोन और निर्माण कार्य पर ग्रहण
इस देरी का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिन्होंने बैंकों से होम लोन (गृह ऋण) ले रखा है। बैंक की शर्तों के अनुसार, लोन की राशि जारी करने के लिए नगर निगम से स्वीकृत नक्शा अनिवार्य दस्तावेज होता है। नक्शा पास न होने के कारण बैंक से लोन की किश्तें (Disbursement) रुकी हुई हैं।
कई ऐसे आवेदक भी हैं जिन्होंने उम्मीद में कि नक्शा जल्द ही मिल जाएगा, अपने निर्माण कार्य का ठेका दे दिया या काम शुरू कर दिया है। अब काम बीच में रुक जाने से मजदूरों का भुगतान करने और निर्माण सामग्री के खराब होने का डर सता रहा है। कुछ लोगों ने तो कर्ज लेकर ब्याज पर पैसे उठाए हैं, ताकि निर्माण कार्य न रुके, लेकिन नक्शे के अभाव में अब वे दोहरी मार झेल रहे हैं।
निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल
नगर निगम के संबंधित विभागों में आवेदकों का चक्कर काटना अब दिनचर्या बन गया है। आवेदकों का आरोप है कि फाइलों को आगे बढ़ाने के बजाय टालमटोल की जा रही है। ऑनलाइन व्यवस्था होने के बावजूद 'फाइनल स्टेज' में फाइल का हफ्तों तक फंसे रहना निगम की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आवेदकों का कहना है कि वे बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाकर थक चुके हैं, लेकिन अधिकारियों से उन्हें केवल "जल्द हो जाएगा" का आश्वासन ही मिलता है। देरी के कारणों के बारे में पूछने पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासनिक चुप्पी और आम जनता का दर्द
शहर के जागरूक नागरिकों और बिल्डरों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो शहर में अवैध निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। जब लोग वैध तरीके से नक्शा पास कराने में नाकाम होंगे, तो वे मजबूरी में बिना नक्शे के ही निर्माण करेंगे, जो भविष्य में उनके लिए कानूनी मुसीबत का कारण बन सकता है।
निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले में अभी तक कोई ठोस समय-सीमा जारी नहीं की है कि अटके हुए इन 150 से अधिक नक्शों को कब तक क्लियर कर दिया जाएगा। हालांकि, आम जनता ने अब नगर आयुक्त से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि एक विशेष 'कैंप' या 'फास्ट ट्रैक' के माध्यम से इन लंबित फाइलों का निस्तारण किया जा सके।
मकान का नक्शा पास कराना एक नागरिक का अधिकार है, लेकिन मुजफ्फरपुर नगर निगम की कार्यशैली ने इसे एक जटिल प्रक्रिया बना दिया है। यदि समय रहते इन फाइलों को मंजूरी नहीं मिली, तो न केवल शहर का नियोजित विकास रुकेगा, बल्कि आम लोगों की गाढ़ी कमाई भी दांव पर लगी रहेगी।