नगर निगम की सख्त कार्रवाई की तैयारी; वार्ड 23 के दुर्गाबाड़ी में नाला निर्माण शुरू न करने पर संवेदक (ठेकेदार) पर गिरेगी गाज, टेंडर रद्द कर डिबार करने की चेतावनी
भागलपुर, मुख्य संवाददाता: शहर के वार्ड संख्या 23 स्थित दुर्गाबाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित नाला निर्माण कार्य में हो रही भारी लापहवाही और लेटलतीफी अब नगर निगम प्रशासन को नागवार गुजरने लगी है। बार-बार चेतावनी देने और समयावधि तय किए जाने के बावजूद कार्य स्थल पर काम शुरू न करने वाले लापरवाह संवेदक (ठेकेदार) के खिलाफ नगर निगम ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि संवेदक ने अब भी तुरंत निर्माण कार्य आरंभ नहीं किया, तो उसकी निविदा (टेंडर) को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा और साथ ही उसे भविष्य के लिए ब्लैकलिस्ट (डिबार) करने की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला? स्थानीय लोग लंबे समय से झेल रहे हैं नारकीय स्थिति
भागलपुर नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वार्ड 23 के दुर्गाबाड़ी इलाके में जल निकासी (Drainage System) की समस्या बरसों से गंभीर बनी हुई है। मानसून या हल्की बारिश के दौरान भी यहाँ की गलियों और घरों के आसपास गंदा पानी जमा हो जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। जनता की इसी समस्या का समाधान करने और जलजमाव से मुक्ति दिलाने के लिए नगर निगम बोर्ड द्वारा दुर्गाबाड़ी क्षेत्र में नए नाले के निर्माण की योजना को मंजूरी दी गई थी।
इस योजना के तहत प्राक्कलन तैयार कर टेंडर निकाला गया और नियमानुसार एक संवेदक को यह कार्य आवंटित भी कर दिया गया। अनुबंध और कार्य आदेश (Work Order) मिलने के बावजूद संवेदक द्वारा धरातल पर काम शुरू करने में अत्यधिक विलंब किया जा रहा है। स्थानीय लोग लगातार निगम कार्यालय में इसकी शिकायत दर्ज करा रहे थे कि कागजों पर पास हुई योजना धरातल पर क्यों नहीं उतर रही है।
नगर निगम द्वारा दी गई थी पूर्व चेतावनी, अनदेखी पड़ी भारी
नगर निगम के अभिलेखों के अनुसार, संबंधित संवेदक को कार्य आदेश जारी करने के साथ ही एक निश्चित समय-सीमा के भीतर काम शुरू करने का कड़ा निर्देश दिया गया था। निगम अधिकारियों ने कई बार मौखिक और लिखित रूप से संवेदक को यह आगाह किया था कि बरसात के मौसम से पहले नाला निर्माण का कार्य पूरा होना अनिवार्य है ताकि जनता को राहत मिल सके।
इसके बावजूद, संवेदक द्वारा प्रशासनिक निर्देशों को दरकिनार करते हुए लगातार हीलाहवाली बरती जाती रही। कभी मजदूरों की कमी का रोना तो कभी अन्य तकनीकी बहाने बनाकर कार्य को लटकाए रखा गया। जब नगर निगम के संज्ञान में यह बात आई कि तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी दुर्गाबाड़ी में एक ईंट तक नहीं रखी गई है, तो निगम प्रशासन ने इसे अपनी प्रशासनिक कार्यकुशलता और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ माना।
नगर निगम का कड़ा रुख: टेंडर रद्द करने और डिबार करने की प्रक्रिया शुरू
लापरवाह संवेदक के इस रवैये से खफा होकर नगर निगम के उच्च अधिकारियों ने अब सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। निगम सूत्रों से मिली पुष्ट जानकारी के मुताबिक, संवेदक को अंतिम रूप से स्पष्टीकरण (Show Cause Notice) जारी कर दिया गया है।
निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा है:
तत्काल कार्य शुरू करने की अंतिम मोहलत: संवेदक को चेतावनी दी गई है कि यदि उसने तुरंत स्थल पर सामग्री गिराकर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया, तो कोई सहानुभूति नहीं बरती जाएगी।
अनुबंध समाप्ति (Cancellation of Agreement): कार्य शुरू न होने की स्थिति में संबंधित एजेंसी का टेंडर बिना किसी विलंब के रद्द कर दिया जाएगा।
डिबार और ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई: उस संवेदक को नगर निगम की आगामी सभी निविदाओं से हमेशा के लिए प्रतिबंधित (Debar) कर दिया जाएगा, ताकि अन्य ठेकेदारों को भी एक कड़ा संदेश मिल सके कि जनता के विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्थानीय पार्षदों और जनता ने निगम के इस कदम का किया स्वागत
नगर निगम द्वारा उठائے गए इस सख्त कदम की वार्ड 23 के स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने खुले दिल से सराहना की है। लोगों का कहना है कि शहर में कई विकास योजनाएं सिर्फ इसलिए समय पर पूरी नहीं हो पातीं क्योंकि ठेकेदार मनमानी करते हैं और अधिकारी आंखें मूंद लेते हैं।
स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई है कि नगर निगम की इस सख्ती के बाद या तो यह संवेदक तुरंत काम शुरू करेगा या फिर किसी सक्षम एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपकर जल्द से जल्द नाले का निर्माण पूरा कराया जाएगा, ताकि दुर्गाबाड़ी के लोगों को जलजमाव और गंदे पानी की समस्या से स्थायी मुक्ति मिल सके।
भागलपुर के वार्ड 23 के दुर्गाबाड़ी में नाला निर्माण को लेकर नगर निगम द्वारा संवेदक के खिलाफ की जा रही यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि अब विकास कार्यों में कोताही बरतने वालों की खैर नहीं है। प्रशासनिक सख्ती का यह रुख यदि शहर के अन्य हिस्सों में भी अपनाया जाए, तो अटकी हुई योजनाएं समय पर पूरी हो सकेंगी और आम जनता को वास्तविक राहत मिल पाएगी।