बायसी में मातम: मलहरिया में नदी की धार पार करते वक्त पानी में डूबने से दर्दनाक मौत, चार सहेलियों में से दो को ग्रामीणों ने बचाया; मची चीख-पुकार

पूर्णिया/बायसी (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले के बायसी अनुमंडल क्षेत्र से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। जिले के बायसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मलहरिया इलाके में पानी के तेज बहाव और डूबने की एक भीषण दुर्घटना में एक किशोरवय की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद घटनास्थल पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में कोहराम मच गया।

प्राप्त विवरण के अनुसार, चार सहेलियां एक साथ मिलकर नदी या पानी की तेज धार को पार कर रही थीं, तभी गहरे पानी और तेज बहाव के कारण वे हादसे का शिकार हो गईं। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों की सूझबूझ और तत्परता के कारण दो सहेलियों को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन इस भयानक हादसे में एक या दो बच्चियों/युवतियों की जान नहीं बचाई जा सकी, जिससे उनके परिवारों में वज्रापात हो गया है। आइए जानते हैं बायसी के मलहरिया में हुई इस हृदयविदारक घटना की पूरी दास्तान, बचाव कार्य का खौफनाक मंज़र, परिजनों के आंसुओं की दास्तान और प्रशासनिक स्थिति का विस्तृत विवरण।

घटना की पृष्ठभूमि: कैसे पेश आया यह हादसा?

ग्रामीण इलाकों में बारिश के मौसम में या नदियों-धाराओं के पास से गुजरना कई बार कितना खतरनाक साबित हो सकता है, इसकी बानगी इस घटना में देखने को मिलती है।

चार सहेलियों का एक साथ निकलना: प्राप्त जानकारी के अनुसार, चार पक्की सहेलियां किसी कार्यवश या सामान्य रूप से एक साथ घर से निकली थीं। उनके रास्ते में पानी की एक तेज धार (नदी या नाला) थी, जिसे पार करने के लिए उन्हें उस पार जाना था।

अचानक संतुलन बिगड़ना: चारों सहेलियां एक-दूसरे का हाथ पकड़कर या साथ-साथ उस धार को पार करने की कोशिश कर रही थीं। पानी का स्तर कम आंकने या अचानक पैर फिसल जाने के कारण वे गहरे पानी के कुंड या तेज बहाव की चपेट में आ गईं। देखते ही देखते चारों गहरे पानी में समाने लगीं।

ग्रामीण मसीहा बने: दो सहेलियों की बची जान

पानी में डूबने की इस घटना के दौरान वहां चीख-पुकार मच गई, जिसे सुनकर आसपास के ग्रामीण और किसान अपनी जान की परवाह किए बिना दौड़ पड़े।

तत्परता से बचाई गई दो जिंदगियां: स्थानीय लोगों ने जब पानी में बच्चियों को डूबते देखा, तो बिना एक पल गंवाए उनमें से कुछ तैरने वाले युवक पानी में कूद पड़े। अथक प्रयास के बाद चार में से दो सहेलियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिनके पेट में भरा पानी निकला गया और समय पर प्राथमिक उपचार देकर उनकी जान बचा ली गई।

बचाव कार्य की विवशता: हालांकि, बाकी की दो सहेलियां पानी के तेज बहाव और गहरे पानी की गहराई में इतनी तेजी से समा गईं कि जब तक ग्रामीण उन्हें खोज पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

 मातम और चीख-पुकार: दो की मौत से परिवार बेसुध

जब दोनों बच्चियों को पानी से बाहर निकाला गया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। इस मनहूस खबर के मिलते ही घटनास्थल पर और उनके घरों में कोहराम मच गया।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: जिन घरों में बेटियों की किलकारियां गूंजती थीं, वहाँ अब सिर्फ चीख-पुकार और दहाड़ें गूंज रही हैं। माताओं और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। वे यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि उनकी हँसती-खेलती बेटियां अब इस दुनिया में नहीं हैं।

मलहरिया में उमड़ी भारी भीड़: घटना की सूचना मिलते ही बायसी थाना पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। मृतका के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पूर्णिया सदर अस्पताल या एसकेएमसीएच भेजा गया। हादसे के बाद मलहरिया चेकपोस्ट और आसपास के इलाकों में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिससे पूरा क्षेत्र गमगीन हो गया।

 ग्रामीण इलाकों में जल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल

यह दर्दनाक हादसा प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है, जिन पर विचार करना अत्यंत आवश्यक है।

बरसात और जलभराव का खतरा: बायसी और आसपास के दियारा व तटीय इलाकों में मानसून या जलभराव के दौरान इस तरह की जल-धाराएं जानलेवा बन जाती हैं। कई जगहों पर पुल-पुलियों या संतरियों का अभाव होने के कारण लोगों को जान जोखिम में डालकर ऐसी धाराएं पार करनी पड़ती हैं।

जागरूकता की आवश्यकता: विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलाकों में बच्चों और किशोरों को विशेष रूप से गहरे पानी और उफनती धाराओं के पास जाने से रोकने के लिए अभिभावकों को सख्त हिदायत देनी चाहिए तथा प्रशासन को भी खतरनाक घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगवाने चाहिए।

पूर्णिया जिले के बायसी थाना क्षेत्र के मलहरिया में पानी में डूबने से हुई यह दर्दनाक दुर्घटना एक बार फिर यह बताती है कि प्रकृति के आगे इंसानी लाचारी कितनी भारी पड़ सकती है। चार सहेलियों का एक साथ धार पार करना और उसमें दो की जिंदगी बचना जहाँ राहत की बात है, वहीं अन्यों की असामयिक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन और स्थानीय लोगों को मिलकर ऐसे संवेदनशील जल क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों में किसी मासूम की जान न जाए।