बिहार में मानसून की रफ्तार सुस्त, 19 जिलों में बारिश के आसार; झमाझम बारिश का इंतजार अभी जारी

पटना। बिहार में मानसून सक्रिय होने के बावजूद अधिकांश जिलों में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हो रही है। राज्य के कई हिस्सों में अब भी छिटपुट बारिश का सिलसिला जारी है, जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से पूरी तरह राहत नहीं मिल पा रही है। मौसम विभाग ने बुधवार को राज्य के 19 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है, लेकिन व्यापक और झमाझम बारिश की संभावना फिलहाल कम बताई गई है। ऐसे में किसानों के साथ-साथ आम लोगों की नजरें भी मानसून की अगली गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बिहार में मानसून की मौजूदगी बनी हुई है, लेकिन इसकी सक्रियता सभी जिलों में समान नहीं है। कुछ इलाकों में बादल छा रहे हैं और हल्की बारिश दर्ज की जा रही है, जबकि कई जिलों में बारिश की कमी के कारण तापमान और उमस दोनों बढ़े हुए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के 19 जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की या मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि, पूरे राज्य में लगातार और तेज बारिश की स्थिति अभी नहीं बन रही है।

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर दिखाई देने लगा है। धान की रोपाई का मौसम चल रहा है और पर्याप्त वर्षा नहीं होने से कई जिलों में किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां खेतों में पानी की कमी के कारण रोपाई की गति धीमी हो गई है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होगा और अच्छी बारिश से खेती को गति मिलेगी।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई का महीना धान की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि इस दौरान सामान्य से कम बारिश होती है, तो फसल उत्पादन पर असर पड़ सकता है। हालांकि जिन क्षेत्रों में नहर, बोरिंग या अन्य सिंचाई साधन उपलब्ध हैं, वहां किसान वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए खेती जारी रखे हुए हैं। लेकिन वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों के लिए बारिश का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है।

राज्य के कई शहरों में दिन के समय तेज धूप निकल रही है, जबकि शाम के समय बादल छाने और हल्की बारिश होने की स्थिति बन रही है। इसके कारण लोगों को कुछ समय के लिए राहत तो मिलती है, लेकिन उमस का स्तर फिर बढ़ जाता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक लगातार और व्यापक वर्षा नहीं होगी, तब तक तापमान में उल्लेखनीय गिरावट की संभावना कम है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी मौसम में लगातार बदलाव को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उमस और गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, वायरल बुखार और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूप में लंबे समय तक बाहर न रहने तथा बारिश के दौरान बिजली कड़कने पर सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, जिन 19 जिलों में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है, वहां कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है। कुछ इलाकों में तेज हवा चलने की भी संभावना है। हालांकि यह बारिश पूरे दिन लगातार नहीं होगी, बल्कि अलग-अलग समय पर छिटपुट रूप से दर्ज की जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में यदि नया कम दबाव का क्षेत्र विकसित होता है या मानसूनी ट्रफ अधिक सक्रिय होती है, तो बिहार में व्यापक वर्षा की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल मौसम की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अगले कुछ दिनों तक अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का ही अनुमान है।

शहरी क्षेत्रों में बारिश कम होने से जलभराव जैसी समस्याएं फिलहाल नहीं दिख रही हैं, लेकिन गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं ग्रामीण इलाकों में किसान बारिश नहीं होने से खेतों की नमी बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सिंचाई का सहारा ले रहे हैं, जिससे उनकी लागत भी बढ़ रही है।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम से जुड़े ताजा पूर्वानुमानों पर नजर रखें। गरज-चमक और वज्रपात की संभावना होने पर खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या जलाशयों के आसपास जाने से बचें। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं।

फिलहाल बिहार में मानसून मौजूद तो है, लेकिन उसकी रफ्तार अभी अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में अच्छी बारिश का इंतजार जारी है। यदि आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां तेज होती हैं, तो किसानों को राहत मिलने के साथ-साथ तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा सकती है। तब तक लोगों को छिटपुट बारिश, उमस भरे मौसम और बदलते मौसम के बीच सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी.