मानसून की सक्रियता के बीच अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज; कृषि विभाग ने किसानों को धान की रोपाई में तेजी लाने की दी सलाह, खेतों में लौटी रौनक

भागलपुर, मुख्य संवाददाता: बिहार के अंग क्षेत्र और रेशमी नगरी भागलपुर में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद मौसम के मिजाज में सुहाना बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश और बादलों की आवाजाही के बीच जिले का अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है, जबकि न्यूनतम तापमान भी सामान्य के आसपास बना हुआ है। तापमान में आई इस गिरावट और अनुकूल वेदर कंडीशन को देखते हुए जिला कृषि विभाग और बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) सबौर के मौसम वैज्ञानिकों ने अन्नदाताओं के लिए एक राहत भरी एडवाइजरी जारी की है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे इस अनुकूल मौसम का पूरा लाभ उठाते हुए अपने खेतों में धान की रोपाई (Paddy Transplantation) के कार्य को जल्द से जल्द पूरा करें

मौसम के बदले मिजाज से किसानों के चेहरे खिले

झारखंड और बिहार के सीमावर्ती इलाकों समेत भागलपुर जिले में पिछले कुछ हफ्तों से मानसूनी हवाओं के प्रभाव के कारण रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है। जुलाई के इस दौर में तापमान के 31.4 डिग्री सेल्सियस के आसपास ठहरने और चिलचिलाती धूप से राहत मिलने के कारण वाष्पीकरण की दर कम हुई है, जिससे मिट्टी की नमी लंबे समय तक बरकरार रह पा रही है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की फसल के लिए यह तापमान और वातावरण सबसे आदर्श माना जाता है।

पर्याप्त आर्दता (Humidity) और बादलों की छांव होने के कारण खेतों में रोपे गए बिचड़े (Seedlings) तेजी से पकड़ बना रहे हैं और उनके मुरझाने का खतरा भी काफी हद तक कम हो गया है।

कृषि विभाग की सलाह: समय पर पूरी करें धान की रोपाई

जिला कृषि पदाधिकारी और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि जिन किसानों ने पहले से ही अपने बिचड़े तैयार कर रखे हैं, वे बिना किसी विलंब के खेतों में रोपाई का कार्य शुरू कर दें।

उचित दूरी और प्रबंधन: कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि धान के पौधों की रोपाई करते समय पौधों से पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखें ताकि फसल को पर्याप्त पोषण, धूप और हवा मिल सके।

उर्वरक और खाद का संतुलित प्रयोग: किसानों से यह भी अपील की गई है कि वे अंधाधुंध रासायनिक खादों के इस्तेमाल से बचें और कृषि सलाहकारों के मार्गदर्शन में ही यूरिया या अन्य उर्वरकों का प्रयोग करें।

कम अवधि वाले धान के प्रभेद: जिन इलाकों में मानसूनी बारिश में थोड़ी देरी हुई थी, वहाँ के किसानों को कम अवधि (Short Duration) वाले धान के बीजों की रोपाई करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि फसल निर्धारित समय पर पककर तैयार हो सके।

ग्रामीण अंचलों में बढ़ी कृषि गतिविधियों की हलचल

तापमान में नरमी और लगातार मिल रहे बारिश के संकेतों के बाद भागलपुर के कहलगांव, सबौर, शाहकुंड, जगदीशपुर और पीरपैंती समेत तमाम ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों में अचानक से भारी तेजी आई है। सुबह सवेरे से ही ग्रामीण इलाकों में किसान और मजदूर वर्ग खेतों की ओर रुख करते देखे जा रहे हैं।

खेतों में पानी भर जाने और कीचड़ तैयार होने से पारंपरिक लोकगीतों के बीच धान की रोपाई का दौर शुरू हो चुका है।

किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी प्रकार अनुकूल बना रहा और बीच-बीच में नियमित वर्षा होती रही, तो इस वर्ष खरीफ सीजन में धान की बंपर पैदावार होने की पूरी उम्मीद है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

सिंचाई लागत में कमी आने से किसानों को बड़ी आर्थिक राहत

जून के महीने में बारिश की बेरुखी और भीषण गर्मी के कारण किसानों को अपनी फसलों के पटवन के लिए डीजल पंप सेट और बोरिंग का सहारा लेना पड़ रहा था, जिससे उनकी लागत आसमान छू रही थी। लेकिन अब अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस तक सिमटने और आसमान से हो रही मानसूनी मेहरबानी से किसानों के निजी सिंचाई खर्च में भारी कमी आई है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति किसी बड़े वरदान से कम नहीं है।

भागलपुर में अधिकतम तापमान के 31.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचने और मानसून की सक्रियता के बीच कृषि विभाग द्वारा दी गई यह सलाह किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रही है। धान की रोपाई के इस अहम चरण में मौसम का साथ मिलना यह संकेत देता है कि इस वर्ष अन्नदाताओं की मेहनत रंग लाएगी और खेतों में एक बार फिर से हरियाली का कारवां पूरी रौनक के साथ आगे बढ़ेगा।