विक्रमशिला बेली ब्रिज पर भीषण जाम से यात्री बेहाल, 20 मिनट का सफर बना ढाई घंटे की अग्निपरीक्षा; कई लोग पैदल पहुंचे भागलपुर

भागलपुर। सोमवार को भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाले विक्रमशिला बेली ब्रिज पर लगा भीषण जाम यात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया। सामान्य दिनों में जहां लगभग साढ़े चार किलोमीटर लंबे इस पुल को पार करने में 20 मिनट का समय लगता है, वहीं सोमवार को लोगों को यही दूरी तय करने में करीब 150 मिनट (ढाई घंटे) तक का समय लग गया। सुबह 10 बजे से लेकर देर रात लगभग 12 बजे तक पुल पर वाहनों की लंबी कतार लगी रही। भीषण गर्मी, तेज धूप और रेंगते वाहनों के बीच हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

स्थिति इतनी खराब हो गई कि कई यात्रियों ने जाम में फंसे टोटो और ऑटो से बीच रास्ते में उतरकर दो से तीन किलोमीटर तक पैदल चलना ही बेहतर समझा। इलाज के लिए भागलपुर जा रहे मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। पूरे दिन पुल पर अफरा-तफरी और अव्यवस्था का माहौल बना रहा।

20 मिनट का सफर बना ढाई घंटे का इंतजार

प्रतिदिन हजारों लोग विक्रमशिला बेली ब्रिज के माध्यम से भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन करते हैं। सामान्य परिस्थितियों में पुल पार करने में करीब 20 मिनट का समय लगता है, लेकिन सोमवार को जाम इतना भीषण था कि लोगों को लगभग ढाई घंटे तक वाहनों में बैठकर इंतजार करना पड़ा।

वाहनों की लंबी कतारें कई किलोमीटर तक फैल गईं। बस, ट्रक, कार, ऑटो, टोटो, एम्बुलेंस और दोपहिया वाहन सभी जाम में फंस गए। कई वाहन चालक इंजन बंद कर सड़क किनारे खड़े होकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते रहे।

भीषण गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें

सोमवार को तेज धूप और उमस ने यात्रियों की परेशानी को और बढ़ा दिया। लंबे समय तक जाम में फंसे रहने के कारण कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को गर्मी के कारण सबसे अधिक परेशानी हुई।

वाहनों में बैठे लोग पानी की तलाश करते रहे। कई यात्रियों ने बताया कि लंबे समय तक जाम में फंसे रहने से पीने का पानी भी खत्म हो गया, जिससे स्थिति और अधिक कठिन हो गई।

पैदल चलने को मजबूर हुए यात्री

जाम से परेशान होकर कई यात्रियों ने टोटो और ऑटो बीच रास्ते में ही छोड़ दिए। लोग जरूरी काम पर समय से पहुंचने के लिए दो से तीन किलोमीटर तक पैदल चलकर भागलपुर पहुंचे।

कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, छात्र, व्यापारी और आम नागरिक भीषण गर्मी में पैदल चलते दिखाई दिए। कई लोगों ने कहा कि वाहनों में बैठे रहने से बेहतर उन्हें पैदल चलना लगा।

मरीजों और बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी

जाम का सबसे अधिक असर उन मरीजों पर पड़ा जो इलाज के लिए भागलपुर के अस्पतालों में जा रहे थे। कई मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने की चिंता सताती रही।

कुछ परिजनों ने मरीजों को बीच रास्ते से उतारकर पैदल अस्पताल की ओर ले जाने का निर्णय लिया। बुजुर्गों और महिलाओं को तेज धूप में पैदल चलना पड़ा, जिससे उनकी परेशानी कई गुना बढ़ गई।

डॉक्टर से पहले से तय समय पर मिलने वाले कई मरीज भी देरी के कारण परेशान रहे। परिजनों ने प्रशासन से ऐसे हालात में वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की।

व्यापार और दैनिक जीवन पर पड़ा असर

भीषण जाम का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। कई व्यापारी समय पर अपने प्रतिष्ठानों तक नहीं पहुंच सके। मालवाहक वाहन घंटों जाम में फंसे रहने से सामान की आपूर्ति भी प्रभावित हुई।

दैनिक कामकाज के लिए आने-जाने वाले लोगों को कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थानों तक पहुंचने में काफी देरी हुई।

घंटों तक नहीं मिली राहत

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह लगभग 10 बजे से शुरू हुआ जाम देर रात लगभग 12 बजे तक पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका। पूरे दिन वाहनों की लंबी कतार लगी रही और यातायात रेंग-रेंग कर चलता रहा।

कई बार ऐसा लगा कि स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन भारी वाहनों की संख्या बढ़ने और लगातार वाहनों के पहुंचने से जाम फिर लंबा होता गया।

पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा

सूचना मिलने के बाद यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने यातायात को नियंत्रित करने का प्रयास किया और वाहनों को व्यवस्थित तरीके से निकालना शुरू किया।

हालांकि वाहनों की अत्यधिक संख्या और पुल की सीमित क्षमता के कारण जाम पूरी तरह समाप्त करने में काफी समय लग गया। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए था।

लोगों में नाराजगी

जाम में फंसे यात्रियों ने व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि पुल पर अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुल पर बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, भारी वाहनों के लिए समय निर्धारण और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की मांग की।

विशेषज्ञों ने सुझाए समाधान

यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रमशिला बेली ब्रिज पर बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करना आवश्यक है। साथ ही पीक आवर्स में भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग बढ़ाने की जरूरत है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में ऐसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

स्थायी समाधान की मांग तेज

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से विक्रमशिला बेली ब्रिज पर जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल से प्रतिदिन हजारों लोग गुजरते हैं और बार-बार लगने वाला जाम आम लोगों के जीवन, व्यापार और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

लोगों ने ट्रैफिक व्यवस्था को और मजबूत करने, आपातकालीन वाहनों के लिए अलग लेन की व्यवस्था करने तथा भीड़भाड़ के समय विशेष निगरानी रखने की भी मांग की।

सोमवार को विक्रमशिला बेली ब्रिज पर लगा भीषण जाम हजारों यात्रियों के लिए बड़ी परीक्षा बन गया। 20 मिनट में पूरा होने वाला सफर ढाई घंटे तक खिंच गया और तेज धूप के बीच कई लोगों को पैदल चलकर भागलपुर पहुंचना पड़ा। इलाज के लिए जा रहे मरीज, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हुए। देर रात तक जाम की स्थिति बनी रही। इस घटना ने एक बार फिर विक्रमशिला बेली ब्रिज पर प्रभावी यातायात प्रबंधन और स्थायी समाधान की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।