मारवाड़ी कॉलेज की साहित्य परिषद ने मनाई मुंशी प्रेमचंद की जयंती; पेंटिंग प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने कला के माध्यम से उकेरे समाज के ज्वलंत मुद्दे, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छह प्रतिभागी होंगे सम्मानित

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर भागलपुर के प्रतिष्ठित मारवाड़ी कॉलेज परिसर में साहित्यिक और सांस्कृतिक उल्लास का अनूठा माहौल देखने को मिला। कॉलेज की साहित्य परिषद के तत्वावधान में महान लेखक मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनके साहित्य में चित्रित सामाजिक वास्तविकताओं को समर्पित एक भव्य पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कॉलेज के दर्जनों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और अपने कूची (ब्रश) और रंगों के माध्यम से प्रेमचंद के उपन्यासों के पात्रों, ग्रामीण भारत की पीड़ा और समाज के विभिन्न मुद्दों को कैनवास पर जीवंत कर दिया। प्रतियोगिता के दौरान छात्रों की रचनात्मकता और उनकी कलात्मक सोच ने उपस्थित शिक्षकों और निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रेमचंद के साहित्य और जीवन पर आधारित थी प्रतियोगिता

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को देश के महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के विचारों से जोड़ना और उनकी कलात्मक प्रतिभा को एक उपयुक्त मंच प्रदान करना था:

कैनवास पर उतरा यथार्थ: प्रतियोगियों ने अपनी पेंटिंग्स में प्रेमचंद की रचनाओं जैसे 'गोदान', 'निर्मला', 'कफ़न' और 'पूस की रात' के मर्मस्पर्शी दृश्यों को बेहद खूबसूरती से उकेरा। इसके अलावा, समाज में व्याप्त असमानता, किसानों का संघर्ष, महिला सशक्तिकरण और गरीबी जैसे ज्वलंत मुद्दों को भी कला के जरिए प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया।

छात्रों में दिखा भारी उत्साह: सुबह से ही कॉलेज के सभागार में छात्र-छात्राओं का तांता लगा रहा। रंग-बिरंगे रंगों और कल्पनाशक्ति के सहारे युवाओं ने अपनी तूलिका से कागजों पर समाज के दर्पण को उतारने का पूरा प्रयास किया। शिक्षकों ने घूम-घومकर छात्र-छात्राओं की हौसला अफजाई की और उनके बनाए गए चित्रों की सराहना की।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छह प्रतिभागी होंगे सम्मानित

प्रतियोगिता के समापन के बाद निर्णायकों की मंडली (जज पैनल) ने सभी छात्रों की कलाकृतियों का बारीकी से मूल्यांकन किया:

कठिन था चयन: आयोजकों ने बताया कि सभी प्रतिभागियों ने इतनी बेहतरीन और भावपूर्ण पेंटिंग्स बनाई थीं कि सर्वश्रेष्ठ का चयन करना निर्णायकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। कला, रंग संयोजन, और विषय की गहराई के आधार पर टॉप प्रतिभागियों के नामों पर मुहर लगाई गई।

सम्मान समारोह की घोषणा: साहित्य परिषद के संयोजकों ने घोषणा की है कि इस पेंटिंग प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल छह (06) प्रतिभागियों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। इन विजेताओं को कॉलेज के आगामी मुख्य जयंती समारोह के दौरान प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और प्रेमचंद के साहित्य से जुड़ी पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया जाएगा, जिससे अन्य छात्र भी प्रेरणा ले सकें।

वक्ताओं ने की प्रेमचंद के विचारों की प्रासंगिकता पर चर्चा

प्रतियोगिता के बाद आयोजित एक संक्षिप्त विचार गोष्ठी में कॉलेज के प्राध्यापकों और साहित्य प्रेमियों ने मुंशी प्रेमचंद के योगदान को याद किया:

साहित्य समाज का दर्पण: वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से भारतीय समाज की जिस नग्न सच्चाई को उजागर किया था, वह आज भी प्रासंगिक है। आज के युवाओं को उनके साहित्य से प्रेरणा लेनी चाहिए ताकि वे समाज की वास्तविक समस्याओं को समझ सकें।

कला और साहित्य का संगम: प्राध्यापकों ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों के भीतर छिपी रचनात्मक प्रतिभा बाहर आती है और उनमें पठन-पाठन के साथ-साथ कला के प्रति भी रुझान बढ़ता है। मारवाड़ी कॉलेज की साहित्य परिषद इस दिशा में लगातार सराहनीय प्रयास कर रही है।

मारवाड़ी कॉलेज की साहित्य परिषद द्वारा प्रेमचंद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित यह पेंटिंग प्रतियोगिता केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को भारतीय संस्कृति, साहित्य और सामाजिक संवेदनाओं से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम साबित हुई। कैनवास पर उकेरे गए रंगों के यह छींटे और छह उत्कृष्ट प्रतिभागियों का चयन इस बात का प्रमाण है कि भागलपुर के युवा अपनी सांस्कृतिक और साहित्यिक जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में होने वाला सम्मान समारोह इन उभरते कलाकारों के हौसलों को और नई उड़ान देगा।