पूर्णिया विश्वविद्यालय का बड़ा कदम: डिजीलॉकर पर अपलोड किए 1.25 लाख से अधिक प्रमाणपत्र, छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत
पूर्णिया। पूर्णिया विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने छात्रों की सुविधा और पारदर्शिता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2025 के कुल 1,25,361 प्रमाणपत्रों को आधिकारिक तौर पर 'डिजीलॉकर' (DigiLocker) पर अपलोड कर दिया है। इस कदम से न केवल छात्रों के दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, बल्कि उन्हें अब अपने मूल प्रमाणपत्रों के सत्यापन या गुम होने की चिंता से भी मुक्ति मिल जाएगी।
डिजिटल इंडिया की ओर एक कदम
विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने और शैक्षणिक कार्यों को सुगम बनाने के लिए यह कार्य संपन्न किया गया है। अब पूर्णिया विश्वविद्यालय के स्नातक और स्नातकोत्तर के विद्यार्थी अपने शैक्षणिक दस्तावेजों को कभी भी और कहीं भी डिजिटल माध्यम से एक्सेस कर सकेंगे। यह पहल न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन के कार्यभार को भी काफी कम कर देगी।
1.25 लाख प्रमाणपत्र अब ऑनलाइन उपलब्ध
परीक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में उत्तीर्ण हुए कुल 1,25,361 विद्यार्थियों के मार्कशीट और डिग्री प्रमाणपत्रों को डिजीलॉकर के सरकारी सर्वर पर सुरक्षित कर दिया गया है। छात्र अब अपने आधार नंबर या मोबाइल नंबर के माध्यम से लॉग-इन कर इन दस्तावेजों को डाउनलोड कर सकते हैं। यह दस्तावेज 'डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित' (Digitally Signed) होंगे, जो हर सरकारी नौकरी, उच्च शिक्षा और अन्य आधिकारिक कार्यों में पूरी तरह से मान्य होंगे।
स्नातक पार्ट-2 और पार्ट-3 की विशेष परीक्षा पर मंथन
इस बीच, विश्वविद्यालय ने स्नातक पार्ट-2 और पार्ट-3 की विशेष परीक्षाओं को लेकर भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। परीक्षा विभाग ने उन विद्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है, जो किसी कारणवश पिछली परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सके थे या अनुत्तीर्ण हो गए थे।
विशेष परीक्षा के मुख्य बिंदु:
परीक्षा की अधिसूचना: जल्द ही विश्वविद्यालय अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर विशेष परीक्षा का पूरा शेड्यूल जारी करेगा।
छात्रों की सहूलियत: इस विशेष परीक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक सत्र को नियमित करना है ताकि उनका भविष्य खराब न हो।
ऑनलाइन आवेदन: विश्वविद्यालय ने संकेत दिए हैं कि विशेष परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, जिससे छात्रों को कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
क्या कहते हैं परीक्षा नियंत्रक?
पूर्णिया विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि छात्रों को अपने मूल प्रमाणपत्रों के लिए विश्वविद्यालय का चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य छात्रों को एक पारदर्शी और सरल प्रणाली उपलब्ध कराना है। डिजीलॉकर पर प्रमाणपत्र अपलोड करना उस प्रक्रिया का हिस्सा है। हम आने वाले दिनों में और भी कई सुधार करने जा रहे हैं, ताकि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह से डिजिटल और त्रुटिहीन हो सके।"
छात्रों के लिए यह सुविधा कैसे उपयोगी है?
सुरक्षा: डिजीलॉकर पर रखे दस्तावेज खोने या खराब होने का कोई खतरा नहीं है।
सत्यापन: किसी भी संस्थान द्वारा इन दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) एक क्लिक पर हो जाएगा, जिससे धोखाधड़ी की संभावना खत्म हो जाएगी।
सुलभता: कहीं भी नौकरी के आवेदन के दौरान छात्रों को फिजिकल कॉपी के बजाय डिजिटल कॉपी से ही काम चल जाएगा।
कॉलेज स्तर पर भी सक्रियता
विश्वविद्यालय के इस निर्णय के बाद सभी अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने छात्रों को डिजीलॉकर का उपयोग करने के लिए जागरूक करें। कॉलेज प्रशासन को यह भी कहा गया है कि वे विशेष परीक्षा से संबंधित सूचनाओं को छात्रों के नोटिस बोर्ड पर प्रमुखता से प्रदर्शित करें।
भविष्य की राह: पूर्णिया विश्वविद्यालय की डिजिटल यात्रा
पूर्णिया विश्वविद्यालय ने जिस तरह से तकनीक को अपनाया है, वह अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक उदाहरण है। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि अगले शैक्षणिक सत्र तक परीक्षा फॉर्म भरने से लेकर प्रवेश पत्र (Admit Card) जारी करने और अंत में डिग्री प्रदान करने तक की पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस किया जाए।
विशेष परीक्षा को लेकर छात्र काफी उत्साहित हैं। विशेषकर वे विद्यार्थी जिनका सत्र देर होने के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने में बाधा आ रही थी, उनके लिए यह विशेष परीक्षा एक वरदान साबित होगी
पूर्णिया विश्वविद्यालय का यह निर्णय न केवल प्रशासनिक सुधार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि छात्रों के प्रति उनकी जवाबदेही को भी दर्शाता है। 1.25 लाख से अधिक प्रमाणपत्रों को डिजीलॉकर पर अपलोड करना एक विशाल कार्य है, जिसे परीक्षा विभाग ने समयबद्ध तरीके से पूरा किया है। अब छात्रों से भी यह अपेक्षा की जाती है कि वे इस सुविधा का लाभ उठाएं और अपनी डिजिटल साक्षरता को बढ़ाएं।