सहरसा में मक्का खरीद घोटाले का बड़ा मामला: सौरबाजार थाना क्षेत्र के 'परी ट्रेडर्स' के मालिक और सहयोगियों पर 20 किसानों व व्यापारियों से ठगी का गंभीर आरोप, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
सहरसा: बिहार के कृषि बाहुल्य जिलों में शुमार सहरसा से किसानों और व्यापारियों के साथ धोखाधड़ी का एक बेहद गंभीर और बड़ा मामला सामने आया है। जिले के सौरबाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत संचालित 'परी ट्रेडर्स' (Pari Traders) के मालिक और उनके सहयोगियों पर मक्का (Maize) की बंपर खरीद करने के बाद पिछले कई दिनों से किसानों और स्थानीय व्यापारियों का भुगतान (Payment) न करने का सनसनीखेज आरोप लगा है। पीड़ित किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि बीते 14 जून को उनसे बड़े पैमाने पर मक्का की फसल खरीदी गई थी, लेकिन वादे के मुताबिक जब पैसे देने की बारी आई, तो आरोपी फर्म के संचालक गायब हो गए या टालमटोल करने लगे।
अचानक हुए इस भारी आर्थिक नुकसान से परेशान किसानों ने एकजुट होकर स्थानीय थाने का दरवाजा खटखटाया है। वादी (शिकायतकर्ता) की लिखित शिकायत के आधार पर सौरबाजार थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित फर्म के मालिक और उसके सहयोगियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके के किसानों और मक्का व्यवसायियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। आइए जानते हैं इस बड़े ठगी मामले की एक-एक परत और पुलिस की कार्रवाई का पूरा एवं विस्तृत विवरण।
क्या है पूरा मामला? 14 जून को मक्का खरीद के नाम पर धोखाधड़ी
सहरसा जिला मक्का उत्पादन के मामले में काफी आगे माना जाता है, और यहां के किसान अपनी मेहनत की फसल बेचकर ही अपने परिवार का सालभर का खर्च चलाते हैं। सौरबाजार थाना क्षेत्र में स्थित 'परी ट्रेडर्स' नामक फर्म के संचालक द्वारा किसानों के इसी विश्वास का फायदा उठाया गया।
मक्का की थोक खरीद और बड़े-बड़े वादे: मिली जानकारी के अनुसार, गत 14 जून को 'परी ट्रेडर्स' के मालिक और उनके सहयोगियों ने इलाके के लगभग 20 स्थानीय किसानों और छोटे व्यापारियों से संपर्क किया। उन्होंने किसानों को उनकी फसल का उचित और आकर्षक मूल्य देने का झांसा दिया।
उधार या चेक के नाम पर टालमटोल: किसानों ने अपनी गाढ़ी कमाई और महीनों की मेहनत से उपजी मक्का की फसल इस फर्म को सौंप दी। शुरुआत में तो कारोबारियों ने जल्द ही बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने या नगद भुगतान देने की बात कही, लेकिन जब कई दिन बीत जाने के बाद भी एक भी रुपया किसानों के हाथ नहीं आया, तो उनकी चिंता बढ़ने लगी।
दुकान और गोदाम पर ताला या गायब संचालक: जब किसानों ने भुगतान के लिए 'परी ट्रेडर्स' के ठिकाने पर संपर्क किया, तो पाया कि वहां ताला लटका हुआ है और मालिक तथा उनके सहयोगी भूमिगत हो चुके हैं। फोन नंबर भी बंद आने लगे, जिसके बाद किसानों को समझ आ गया कि उनके साथ एक बहुत बड़ी साजिश और ठगी की गई है।
20 किसानों और व्यापारियों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस धोखेधड़ी से प्रभावित होने वाले लोगों में केवल बड़े किसान ही नहीं, बल्कि छोटे और सीमांत किसान भी शामिल हैं, जिन्होंने साहूकारों से कर्ज लेकर मक्का की खेती की थी।
कर्ज के बोझ तले दबे किसान: किसानों का कहना है कि उन्होंने बीज, खाद और डीजल के लिए जो कर्ज लिया था, उसे चुकाने का समय आ गया है। मक्का बेचकर वे कर्ज उतारने की आस में थे, लेकिन पैसे न मिलने से अब उनके सामने भुखमरी और कर्जदारों के तकादों का संकट खड़ा हो गया है।
व्यापारियों की भी हालत खराब: किसानों के साथ-साथ इस ठगी में कुछ स्थानीय छोटे व्यापारी भी फंसे हैं, जिन्होंने किसानों से मक्का लेकर इस ट्रेडर्स को सप्लाई किया था। इन व्यापारियों का भी लाखों रुपया फंस गया है, जिससे उनका बिजनेस पूरी तरह से ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: एफआईआर दर्ज और जांच शुरू
जब किसानों को यह यकीन हो गया कि 'परी ट्रेडर्स' के संचालक उनके पैसे हड़प चुके हैं, तो सभी पीड़ित किसानों ने एकजुट होकर सौरबाजार थाना में लिखित आवेदन दिया।
संगीत धाराओं में मुकदमा दर्ज: किसानों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सौरबाजार थाना की पुलिस ने तुरंत प्राथमिक दर्ज (FIR) कर ली है। पुलिस ने ट्रेडर्स के मालिक और उनके सहयोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी (Fraud), विश्वासघात (Breach of Trust) और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया है।
साक्ष्यों का संकलन: पुलिस ने किसानों द्वारा दिए गए मक्का खरीद के रसीद, तौल पर्ची (Weighing Slips) और मोबाइल चैट के रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कुल कितने टन मक्का की खरीद की गई थी और कुल कितने लाख रुपए की यह ठगी है।
आरोपियों की तलाश में छापेमारी और पुलिस का बयान
सौरबाजार थाना प्रभारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि किसानों की शिकायत पर कानून सम्मत कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
फरार आरोपियों की धरपकड़ जारी: पुलिस की विशेष टीमों का गठन कर दिया गया है जो 'परी ट्रेडर्स' के मालिक और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
कड़ी कार्रवाई का भरोसा: पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि किसानों की गाढ़ी कमाई को डकारने वाले किसी भी बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों के बैंक खातों को सीज करने और उनकी संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है ताकि किसानों के पैसे सुरक्षित वापस दिलाए जा सकें।
सहरसा के सौरबाजार थाना क्षेत्र में 'परी ट्रेडर्स' द्वारा 20 किसानों और व्यापारियों से मक्का खरीद कर भुगतान न करने की यह घटना कृषि प्रधान समाज के लिए एक बड़ा आघात है। किसानों की मेहनत पर इस प्रकार डाका डालना न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाला मामला भी है। हालांकि, पुलिस द्वारा समय पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू करना एक राहत की खबर है। अब देखना यह होगा कि पुलिस कब तक इन शातिर ठगों को सलाखों के पीछे पहुँचा पाती है और कब तक किसानों को उनकी मेहनत का एक-एक पाई वापस मिल पाती है। इस तरह की घटनाओं से यह भी सबक मिलता है कि किसानों को बड़े पैमाने पर फसल बेचते समय व्यापारियों के दस्तावेजों और विश्वसनीयता की पूरी जांच-पड़ताल अवश्य कर लेनी चाहिए।