टेटियाबंबर में बड़ा प्रशासनिक घपला: आंगनबाड़ी केंद्रों के पास झाड़ियों से बरामद हुईं एक्सपायर आयरन सिरप की 3375 बोतलें; ग्रामीणों ने लगाया सीडीपीओ कार्यालय पर गंभीर आरोप, पुलिस जांच शुरू

टेटियाबंबर/मुंगेर (बिहार): बिहार के मुंगेर जिले के टेटियाबंबर प्रखंड से स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास परियोजना कार्यालय (CDPO Office) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। टेटियाबंबर क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्रों के समीप स्थित घनी झाड़ियों के बीच से भारी मात्रा में एक्सपायर (Expiry) हो चुकी आयरन सिरप की बोतलें बरामद की गई हैं। बरामद की गई इन बोतलों की कुल संख्या 3375 बताई जा रही है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

'हिन्दुस्तान' संवाददाता से प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाया है कि ये दवाएं स्थानीय सीडीपीओ कार्यालय या स्वास्थ्य केंद्र के गोदाम से चोरी-छिपे लाकर बाहर फेंकी गई हैं, ताकि एक्सपायरी स्टॉक के घोटाले को छुपाया जा सके। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी पृष्ठभूमि, बरामदगी का यह पूरा वाकया, ग्रामीणों के गंभीर आरोप और पुलिस व प्रशासनिक स्तर पर शुरू की गई जांच का विस्तृत विवरण।

 घटना की पृष्ठभूमि: झाड़ियों में कैसे मिली इतनी बड़ी खेप?

ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों में हीमोग्लोबिन की कमी (एनीमिया) को दूर करने के लिए सरकार द्वारा आयरन और फोलिक एसिड सिरप (Iron Syrup) की आपूर्ति बड़े पैमाने पर की जाती है। इन दवाओं का वितरण मुख्य रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से किया जाना होता है।

रहस्यमयी तरीके से फेंका गया स्टॉक: टेटियाबंबर प्रखंड के एक आंगनबाड़ी केंद्र के नजदीक झाड़ियों में जब स्थानीय ग्रामीणों की नजर पड़ी, तो वहां गत्ते के दर्जनों डिब्बे बिखरे हुए थे। पास जाकर देखने पर पता चला कि उन डिब्बों के अंदर आयरन सिरप की हजारों बोतलें भरी हुई हैं।

बड़ी संख्या में एक्सपायरी दवाएं: जब बोतलों की गिनती की गई और उनके बैच नंबर व मैन्युफैक्चरिंग/एक्सपायरी डेट की जाँच की गई, तो यह स्पष्ट हो गया कि ये सभी दवाइयां एक्सपायर हो चुकी थीं। इतनी बड़ी मात्रा में जीवनरक्षक और पोषाहार से जुड़ी दवाओं का इस तरह खुले में फेंका जाना किसी बड़ी लापरवाही या प्रशासनिक भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

ग्रामीणों के गंभीर आरोप: सीडीपीओ कार्यालय पर उंगली

इस घटना के सामने आते ही स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का गुस्सा सीधे तौर पर स्थानीय बाल विकास परियोजना (CDPO) कार्यालय और संबंधित अधिकारियों पर फूट पड़ा है।

वितरण के बजाय डंप करने का आरोप: ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए भेजी गई इन दवाओं का समय पर वितरण नहीं किया गया। जब दवाइयां एक्सपायर हो गईं, तो अपनी लापरवाही और भ्रष्टाचार के कागजी दस्तावेजों को छुपाने के लिए उन्हें गोदाम से निकालकर चुपचाप रात के अंधेरे में झाड़ियों में फेंक दिया गया।

सरकारी धन की बर्बादी: ग्रामीणों का कहना है कि यह जनता के टैक्स के पैसों की और सरकारी संसाधनों की खुली लूट है। जरूरतमंदों तक दवाएँ पहुँचने के बजाय उन्हें इस तरह नष्ट करना आपराधिक कृत्य है।

 पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई: जांच का दायरा विस्तृत

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई है। जैसे ही इसकी सूचना अधिकारियों को मिली, पुलिस बल मौके पर पहुँचा।

दवाओं को कब्जे में लेना: पुलिस ने झाड़ियों में फेंकी गई आयरन सिरप की सभी 3375 बोतलों को अपने कब्जे में ले लिया है। इसके साथ ही गत्तों और डिब्बों के बचे हुए अवशेषों को भी सील कर दिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह खेप कहाँ से आई थी।

आधिकारिक जांच शुरू: टेटियाबंबर पुलिस ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर यह खंगालना शुरू कर दिया है कि इन सिरप की आपूर्ति किस बैच के तहत और किस एजेंसी द्वारा की गई थी। सीडीपीओ कार्यालय के रिकॉर्ड की भी जाँच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कागजों में इन दवाओं का वितरण दिखाया गया था या इन्हें स्टॉक में ही दबाकर रखा गया था।

 स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते सवाल

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

भ्रष्टाचार की परतें: यदि दवाइयों की एक्सपायरी तिथि नजदीक आ रही थी या वे एक्सपायर हो चुकी थीं, तो उन्हें नियमानुसार नष्ट (Condemn) करने की एक तय प्रक्रिया होती है। लेकिन बिना किसी प्रक्रिया के उन्हें यूँ ही खुले में फेंक देना गंभीर प्रशासनिक मिलीभगत को दर्शाता है।

लाभार्थियों की अनदेखी: एक तरफ जहाँ ग्रामीण इलाकों में आज भी कई जरूरतमंदों को समय पर पोषाहार और दवाइयां नहीं मिल पाती हैं, वहीं दूसरी तरफ हजारों की संख्या में दवाइयों का इस तरह बर्बाद होना बेहद शर्मनाक है।

टेटियाबंबर में आंगनबाड़ी केंद्रों के पास झाड़ियों से 3375 एक्सपायरी आयरन सिरप की बोतलों का बरामद होना यह साबित करता है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण कितना लचर और भ्रष्ट हो चुका है। ग्रामीणों द्वारा सीडीपीओ कार्यालय पर लगाए गए आरोप यदि जांच में सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ एक लापरवाही नहीं बल्कि एक बड़ा घोटाला है। पुलिस और जिला प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई करते हुए उन तमाम जिम्मेदारों को बेनकाब करना चाहिए जिन्होंने सरकारी संसाधनों और जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया है।