मुजफ्फरपुर स्टेशन रोड पर बड़ी कार्रवाई: शराब के नशे में धुत नगर निगम के तीन कर्मी गिरफ्तार, ब्रेथ एनालाइजर जांच में हुई पुष्टि; पुलिस ने गुप्त सूचना पर की छापेमारी
बिहार में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के प्रशासनिक दावों के बीच मुजफ्फरपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के बेहद व्यस्त और संवेदनशील माने जाने वाले स्टेशन रोड इलाके से पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर नगर निगम के तीन कर्मचारियों को शराब के नशे में धुत अवस्था में गिरफ्तार किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने ब्रेथ एनालाइजर (Breath Analyzer) से उनकी जांच की, तो उनके शरीर में अल्कोहल की पुष्टि साफ तौर पर हो गई। सरकारी सेवा में रहते हुए और ड्यूटी के दौरान इस तरह सरेआम शराब के नशे में मिलने से प्रशासनिक महकमे में भी हड़कंप मच गया है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट के माध्यम से जानते हैं इस पूरी छापेमारी, गिरफ्तार कर्मियों की हरकतों और पुलिस तथा नगर निगम प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में।
गुप्त सूचना पर स्टेशन रोड पर पुलिस की त्वरित छापेमारी
मुजफ्फरपुर पुलिस को मुखबिरों के जरिए यह गुप्त सूचना मिली थी कि शहर के प्रमुख व्यापारिक और आवाजाही वाले केंद्र—स्टेशन रोड इलाके में कुछ लोग शराब के नशे में उत्पात मचा रहे हैं या संदिग्ध हालत में घूम रहे हैं।
दल-बल के साथ घेराबंदी: सूचना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय थाना और पुलिस की विशेष गश्ती टीम ने तुरंत स्टेशन रोड इलाके में जाल बिछाया। पुलिस ने बिना वक्त गंवाए संदिग्ध ठिकानों की घेराबंदी शुरू कर दी।
रंगेहाथ दबोचे गए निगम कर्मी: पुलिस ने जब मौके पर मौजूद तीन संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उनके मुंह से शराब की तेज गंध आ रही थी। उनकी गतिविधियां और हाव-भाव पूरी तरह से नशे में होने की गवाही दे रहे थे।
ब्रेथ एनालाइजर जांच में शराब पीने की हुई पुष्टि
पकड़े गए तीनों आरोपियों को तुरंत थाने या मोबाइल जांच इकाई के पास लाया गया, जहाँ उनके नशे में होने की वैज्ञानिक पुष्टि की गई।
जांच मशीन का उपयोग: पुलिस ने मौके पर ही ब्रेथ एनालाइजर मशीन से उनकी सांसों की जांच (Breath Analyzer Test) की। मशीन की स्क्रीन पर रीडिंग आते ही यह स्पष्ट हो गया कि तीनों ने भारी मात्रा में शराब का सेवन कर रखा था।
कर्मचारियों की पहचान: पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ कि पकड़े गए तीनों आरोपी कोई आम शराबी नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर नगर निगम के ही कर्मचारी हैं। सरकारी पद पर रहते हुए इस तरह कानून की धज्जियां उड़ाने की बात सामने आने के बाद पुलिस भी हैरान रह गई।
प्रशासनिक महकमे में खलबली और जनता में आक्रोश
नगर निगम के कर्मचारियों के इस तरह शराब के नशे में पकड़े जाने से विभाग की छवि पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।
ड्यूटी के दौरान लापरवाही: स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि जब शहर की साफ-सफाई या अन्य व्यवस्था संभालने वाले सरकारी कर्मी ही इस तरह नशे में धुत होकर सड़कों पर घूमेंगे, तो आम जनता को क्या संदेश मिलेगा। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
नगर निगम प्रशासन की प्रतिक्रिया: इस घटना के तूल पकड़ने के बाद नगर निगम के उच्च अधिकारियों तक भी मामला पहुँच गया है। निगम प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि क्या ये लोग ड्यूटी पर तैनात थे या ड्यूटी के बाद इस तरह की हरकत कर रहे थे।
उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए सख्त कदम उठाया है।
प्राथमिकी दर्ज: गिरफ्तार किए गए तीनों निगम कर्मियों के खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम (Prohibition and Excise Act) के तहत सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
न्यायिक हिरासत में भेजने की तैयारी: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल जांच कराने के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। साथ ही, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए नगर निगम को भी आधिकारिक रिपोर्ट भेजी जा रही है।
मुजफ्फरपुर के स्टेशन रोड पर शराब के नशे में धुत नगर निगम के तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जा रहा है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई सरकारी कर्मी। शराबबंदी कानून के उल्लंघन का यह मामला एक बार फिर प्रशासनिक अनुशासन और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।