महात्मा गांधी कॉलेज में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मनाई गई, राष्ट्रवाद और शिक्षा में उनके योगदान को किया गया याद
संवाददाता। महात्मा गांधी कॉलेज में मेरा युवा भारत (MY Bharat) एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में शिक्षकों, विद्यार्थियों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों और विभिन्न गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया तथा डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
राष्ट्र निर्माण में योगदान पर हुई चर्चा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. प्रेम कुमार ने की, जबकि मुख्य अतिथि प्रो. अजीत कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। दोनों वक्ताओं ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों, शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और देश की एकता एवं अखंडता के लिए दिए गए बलिदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और देश की एकता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
प्रधानाचार्य प्रो. प्रेम कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रहित, अनुशासन, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
राष्ट्रवादी सोच पर विशेष जोर
मुख्य अतिथि प्रो. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके विचार आज भी देशवासियों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणादायक हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं और संविधान, लोकतंत्र तथा सामाजिक सद्भाव के मूल्यों का सम्मान करें।
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान
कार्यक्रम में वक्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के शिक्षा क्षेत्र में योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और समाज के विकास का आधार है।
वक्ताओं ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार और नैतिक मूल्यों के महत्व पर भी जोर दिया।
राष्ट्रीय सेवा योजना की भूमिका
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाई। वक्ताओं ने कहा कि एनएसएस युवाओं में सेवा, अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच है।
उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, रक्तदान, साक्षरता और जनजागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
मेरा युवा भारत अभियान की सराहना
कार्यक्रम में मेरा युवा भारत (MY Bharat) अभियान की भी सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि यह पहल युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
इस अभियान के माध्यम से युवाओं को नेतृत्व क्षमता विकसित करने, सामाजिक कार्यों में भाग लेने और देश के विकास में योगदान देने का अवसर मिल रहा है।
विद्यार्थियों ने साझा किए विचार
कार्यक्रम के दौरान कई विद्यार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, उनके संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और शिक्षा के प्रति उनके दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
विद्यार्थियों ने कहा कि महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेकर युवा अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति
जयंती समारोह के अवसर पर विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और देशभक्ति का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संदेश
वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों, नैतिकता और सेवा भावना को भी अपनाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक जागरूकता जैसे अभियानों में भाग लेने का आह्वान किया।
धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों की सराहना की गई।
राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने भविष्य में भी इसी प्रकार के सामाजिक एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया।
महात्मा गांधी कॉलेज में आयोजित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती केवल एक स्मृति समारोह नहीं, बल्कि युवाओं को राष्ट्र सेवा, शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रेरित करने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके जीवन, विचारों और सार्वजनिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
ऐसे आयोजन युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।