गुरु पूर्णिमा पर सिल्क सिटी में आस्था का महासैलाब; बरारी सीढ़ी घाट और पुल के पास उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, गंगा स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दे शिवालयों के लिए रवाना हुए कांवरिए

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: गुरु-शिष्य परंपरा के पावन और पवित्र पर्व 'गुरु पूर्णिमा' के अवसर पर सिल्क सिटी भागलपुर में आस्था का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। आषाढ़ पूर्णिमा के इस पावन दिन पर उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भागलपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार बरारी सीढ़ी घाट और बरारी पुल के पास सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पवित्र गंगा में डुबकी लगाई। हर-हर गंगे और बम-बम भोले के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने स्नान के उपरांत उगते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद बड़ी संख्या में शिवभक्तों और कांवरियों ने गंगा जल भरकर विभिन्न शिवालयों की ओर अपनी यात्रा शुरू की।

अहले सुबह से ही घाटों पर जुटने लगे थे श्रद्धालु

गुरु पूर्णिमा का पर्व सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। इस दिन गुरु पूजन के साथ-साथ पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का भी विधान है:

घाटों पर उमड़ी भीड़: सूर्योदय से काफी पहले ही भागलपुर के बरारी सीढ़ी घाट, पुल घाट और आसपास के अन्य गंगा तटों पर शहर और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों—सभी में गंगा स्नान को लेकर भारी उत्साह देखा गया।

हर-हर गंगे के जयकारे: जैसे ही सूर्य की पहली किरण गंगा के पानी पर पड़ी, घाटों पर मौजूद श्रद्धालुओं ने 'हर-हर गंगे' के जयकारों के साथ जल में डुबकी लगानी शुरू कर दी। पूरा घाट परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से सराबोर नजर आ रहा था।

गंगा स्नान और सूर्य को अर्घ्य, तत्पश्चात पूजन-अर्चन

स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने मोक्षदायिनी मां गंगा का आचमन कर अपनी और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की:

भगवान सूर्य को अर्घ्य: स्नान के तुरंत बाद श्रद्धालुओं ने तांबे के लोटे में गंगा जल भरकर विधि-विधान के साथ भगवान भास्कर (सूर्य देव) को अर्घ्य अर्पित किया। लोक मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन सूर्य को अर्घ्य देने से आत्मबल और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

दान-पुण्य और अनुष्ठान: घाटों पर मौजूद पुरोहितों और आचार्यों के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दान-दक्षिणा दी। कई लोगों ने अपने पितरों के मोक्ष के लिए तर्पण और विशेष पूजा भी संपन्न कराई।

गंगा जल भरकर शिवालयों के लिए रवाना हुए कांवरिए

चूंकि वर्तमान समय में पवित्र श्रावण मास और श्रावणी मेले का माहौल भी चल रहा है, इसलिए गुरु पूर्णिमा के इस अवसर पर शिवभक्तों का उत्साह दोगुना नजर आया:

कांवरियों का संकल्प: गंगा स्नान और सूर्य अर्घ्य के बाद बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने संकल्प लिया और कांवर में पवित्र गंगा जल भरकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए स्थानीय तथा प्रसिद्ध शिवालयों (जैसे बूढ़ानाथ मंदिर, भूतनाथ मंदिर और जिले के अन्य शिव मंदिरों) की ओर रवाना हुए।

बोल बम के जयकारों से गूंजा शहर: "बोल बम, कांवर बम" और "हर हर महादेव" के गगनभेदी नारों के साथ केसरिया वस्त्र पहने कांवरियों के जत्थे जब बरारी घाट से शहर की सड़कों से गुजरे, तो पूरा भागलपुर शिवमय हो गया।

प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था रही मुस्तैद

लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आया:

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: बरारी घाट पर विधि-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मी और गोताखोरों की तैनाती की गई थी।

बेहतर यातायात प्रबंधन: वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए यातायात पुलिस ने घाट की ओर आने वाले रास्तों पर विशेष रूट चार्ट लागू किया था, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

भागलपुर में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बरारी पुल और सीढ़ी गंगा घाट पर उमड़ी यह भारी भीड़ और श्रद्धालुओं का अटूट उत्साह यह साबित करता है कि आज भी हमारी सनातन संस्कृति और परंपराएं लोगों के दिलों में गहराई तक रची-बसियों हैं। गंगा स्नान, सूर्य अर्घ्य और शिवालयों की ओर कांवरियों की यह यात्रा भागलपुर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और अधिक प्रगाढ़ कर गई।