दरभंगा के रहमगंज की बेटी कायनाथ खानम ने नीट (NEET UG) परीक्षा में गाड़े सफलता के झंडे: जनरल ईडब्ल्यूएस में 1407वीं रैंक और 99.36 परसेंटाइल प्राप्त कर परिवार का नाम किया रोशन

दरभंगा: बिहार के सांस्कृतिक और शैक्षणिक गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले दरभंगा जिले से चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक और बेहद प्रेरणादायक व गौरवशाली सफलता सामने आई है। शहर के व्यस्त और प्रतिष्ठित मोहल्ले रहमगंज के रहने वाले एक साधारण ट्रक चालक की होनहार पुत्री कायनाथ खानम ने देश की सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी मानी जाने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा नीट यूजी (NEET UG) में शानदार और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। कायनाथ खानम ने इस राष्ट्रीय परीक्षा में अपनी मेहनत और प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए जनरल ईडब्ल्यूएस (General EWS) श्रेणी में अखिल भारतीय स्तर पर 1407वां रैंक प्राप्त किया है, साथ ही उन्होंने 99.36 परसेंटाइल हासिल कर अपनी असाधारण बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे दरभंगा शहर और शुभचिंतकों में जश्न का माहौल है।

संघर्ष और अभावों के बीच रची गई सफलता की इबारत

कायनाथ खानम की यह सफलता इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि यदि इरादे मजबूत हों और सपनों को पूरा करने की सच्ची लगन हो, तो राह में आने वाली आर्थिक तंगी या सामाजिक बाधाएं कभी भी रुकावट नहीं बन सकतीं।

एक ट्रक चालक की संघर्षशील बेटी: कायनाथ के पिता इम्तियाज अहमद खान एक ट्रक चालक (Truck Driver) हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य और संघर्षपूर्ण रही है। एक ड्राइवर की सीमित आय में घर का खर्च चलाना और बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।

अभावों को बनाया अपनी ताकत: परिवार की वित्तीय सीमाओं के बावजूद इम्तियाज अहमद खान ने अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी कोई आंच नहीं आने दी। वहीं दूसरी ओर, कायनाथ ने भी अपने पिता के पसीने और संघर्ष को करीब से देखा और इसे ही अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा तथा ताकत बनाया। उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा और ध्यान केवल और केवल अपनी पढ़ाई पर केंद्रित रखा।

शिक्षा के प्रति अटूट लगन और अनुशासित दिनचर्या

नीट (NEET UG) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में 99.36 परसेंटाइल हासिल करना और जनरल ईडब्ल्यूएस कोटे में 1407वां रैंक पाना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए वर्षों की कठिन तपस्या, सटीक रणनीति और अनुशासन की आवश्यकता होती है।

कड़ी मेहनत और निरंतरता: कायनाथ ने अपनी तैयारी के दौरान कभी भी शॉर्टकट का रास्ता नहीं अपनाया। भौतिकी (Physics), रसायन शास्त्र (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology) के प्रत्येक अवधारणा को गहराई से समझा और लगातार मॉक टेस्ट (Mock Tests) के जरिए अपनी कमियों को दूर किया।

स्वाध्याय (Self-Study) और संयम: सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने मुख्य रूप से स्वाध्याय और ऑनलाइन उपलब्ध चुनिंदा मार्गदर्शन का सहारा लिया। लंबी और थका देने वाली पढ़ाई के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखना उनकी सफलता की एक बड़ी कुंजी रहा।

परिवार और समाज में जश्न का माहौल, बधाई देने वालों का तांता

जैसे ही नीट यूजी के परिणाम सामने आए और कायनाथ खानम की इस बड़ी सफलता की खबर रहमगंज मोहल्ले में फैली, उनके घर पर बधाइयों का तांता लग गया। स्थानीय लोग, रिश्तेदार और पड़ोसी लगातार उनके घर पहुंचकर परिवार को अपनी शुभकामनाएं दे रहे हैं।

माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू: अपनी बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता पर ट्रक चालक पिता इम्तियाज अहमद खान और उनकी माता तथा अन्य परिजनों की आंखें खुशी से नम हो गईं। माता-पिता का कहना है कि उनकी दिन-रात की मेहनत और दुआएं आज रंग लाई हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने ट्रक के पहियों के बीच से निकलकर डॉक्टर बनने की जो राह चुनी है, वह उनके पूरे खानदान के लिए एक मिसाल है।

क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों की प्रतिक्रिया: दरभंगा के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कायनाथ को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह सफलता उन तमाम छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ा संदेश है जो विपरीत परिस्थितियों में हताश हो जाते हैं। कायनाथ ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी साधन या संसाधन की मोहताज नहीं होती।

डॉक्टर बनकर समाज सेवा करने का है सपना

सफलता के इस मुकाम पर पहुंचने के बाद कायनाथ खानम का अगला लक्ष्य एक कुशल और संवेदनशील चिकित्सक (Doctor) बनना है। उनका सपना है कि वे मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद विशेषकर समाज के उन गरीब और वंचित वर्ग के लोगों की सेवा करें, जिन्हें समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। कायनाथ की इस सफलता ने यह फिर से साबित कर दिया है कि दरभंगा की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी योग्यता का परचम लहरा रही हैं और आने वाले दिनों में वे देश के एक जिम्मेदार नागरिक और डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।