रतनपुर में पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया गया कारगिल विजय दिवस, पूर्व सैनिकों ने 527 शहीदों को दी श्रद्धांजलि, 1003 दिव्यांग वीर जवानों के साहस को किया सलाम

रतनपुर: कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रतनपुर में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के तत्वावधान में एक भव्य श्रद्धांजलि एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम देशभक्ति, राष्ट्र गौरव और वीर सैनिकों के सम्मान की भावना से ओत-प्रोत रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, समाजसेवी, गणमान्य नागरिक, युवा और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता और अमर शहीदों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने वाले 527 वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही युद्ध में घायल होकर दिव्यांग हुए 1003 वीर जवानों के अदम्य साहस, वीरता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को भी नमन किया गया।

शहीदों के बलिदान को किया याद

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कारगिल युद्ध भारत के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसने पूरे देश को एकजुट कर दिया था। भारतीय सेना के जवानों ने कठिन परिस्थितियों, दुर्गम पहाड़ियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद अद्भुत शौर्य का परिचय देते हुए दुश्मनों को परास्त किया और देश की सीमाओं की रक्षा की।

वक्ताओं ने कहा कि कारगिल के वीरों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। देश उनके सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूल सकता।

पूर्व सैनिकों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में मौजूद कई पूर्व सैनिकों ने सेना में अपने सेवा काल के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सीमा पर तैनात जवान किस तरह कठिन परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा के लिए दिन-रात डटे रहते हैं।

उन्होंने युवाओं से देशभक्ति की भावना को अपने जीवन का हिस्सा बनाने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

युवाओं को दिया प्रेरणादायक संदेश

पूर्व सैनिकों ने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है। उन्होंने युवाओं से अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र सेवा की भावना अपनाने की अपील की।

वक्ताओं ने कहा कि केवल सेना में भर्ती होकर ही नहीं, बल्कि अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी और निष्ठा से कार्य करके भी देश की सेवा की जा सकती है।

वीर दिव्यांग सैनिकों के साहस को किया नमन

कार्यक्रम के दौरान कारगिल युद्ध में घायल होकर दिव्यांग हुए 1003 वीर जवानों के अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति का विशेष उल्लेख किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि इन वीर सैनिकों ने अपने शरीर पर गंभीर चोटें सहने के बावजूद कभी हार नहीं मानी। उनका साहस और जज्बा पूरे देश के लिए प्रेरणा का विषय है।

देशभक्ति गीतों से गूंजा वातावरण

समारोह के दौरान देशभक्ति गीतों और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भावुक और प्रेरणादायक बना दिया। बच्चों और युवाओं ने देशभक्ति गीत, कविता और भाषण प्रस्तुत कर शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि

वक्ताओं ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिक किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। उनके त्याग, तपस्या और बलिदान की बदौलत ही देशवासी सुरक्षित जीवन जी पाते हैं।

उन्होंने समाज से सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान और सहयोग की अपील भी की।

कारगिल विजय दिवस का महत्व

वक्ताओं ने कारगिल विजय दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने कठिन सैन्य अभियान चलाकर कारगिल की चोटियों से घुसपैठियों को खदेड़ा और तिरंगा फिर से लहराया।

26 जुलाई को हर वर्ष कारगिल विजय दिवस उन वीर सैनिकों की याद में मनाया जाता है जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

पूर्व सैनिक सेवा परिषद की सराहनीय पहल

अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल पूर्व सैनिकों को एक मंच पर लाना ही नहीं, बल्कि समाज में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सैनिकों के सम्मान की भावना को भी मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि नई पीढ़ी देश के वीर सैनिकों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सके।

उपस्थित लोगों ने लिया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए सदैव योगदान देने का संकल्प लिया। साथ ही शहीदों के आदर्शों पर चलने और समाज में देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

पूर्व सैनिकों ने कहा कि शहीद कभी मरते नहीं, बल्कि वे हमेशा देशवासियों के दिलों में अमर रहते हैं।

रतनपुर में आयोजित अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के कारगिल विजय दिवस समारोह ने शहीदों के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम में 527 शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और 1003 दिव्यांग वीर जवानों के अदम्य साहस को सलाम किया गया। पूर्व सैनिकों ने युवाओं को राष्ट्र सेवा, अनुशासन और देशभक्ति का संदेश देते हुए कहा कि कारगिल के वीरों का बलिदान सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।