शुक्रवार को कांवरियों की संख्या ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, केसरियामय हुई उत्तरवाहिनी गंगा की धरा

भागलपुर/सुल्तानगंज: सावन के पवित्र महीने में देवाधिदेव महादेव की आराधना के लिए देवघर और बासुकीनाथ जाने वाले शिवभक्तों के उत्साह में इन दिनों गजब का उबाल देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों से आसमान में छाए बादलों, ठंडी हवाओं और हल्की बारिश के कारण सुहाने हुए मौसम ने कांवरियों के सफर को और अधिक सुगम बना दिया है। मौसम की इसी मेहरबानी के चलते शुक्रवार को सुलतानगंज के प्रसिद्ध उत्तर वाहिनी गंगा तट पर कांवरियों की ऐसी रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी कि पिछले कई सालों के आंकड़े पीछे छूट गए। अजगैवीनाथ धाम से लेकर कांवरिया मार्ग तक हर तरफ केवल केसरिया वस्त्रधारी शिवभक्तों का हुजूम ही नजर आ रहा था।

सुहाने मौसम ने थकावट को किया छू मंतर, उमड़ी ऐतिहासिक भीड़

সাধারণतः सावन के महीने में भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और उमस के कारण कांवरियों को लंबी पैदल यात्रा के दौरान भारी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार तेज धूप के कारण बुजुर्ग और युवा थककर बीच रास्ते में ही विश्राम करने को मजबूर हो जाते हैं। लेकिन शुक्रवार को मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ था। सुबह से ही आसमान में बादलों का डेरा रहा और ठंडी-ठंडी पुरविया हवाएं चलती रहीं। बीच-बीच में हुई हल्की फुहारों ने वातावरण को पूरी तरह तरोताजा कर दिया।

मौसम के इस सुहाने और खुशनुमा रूप ने कांवरियों के हौसले और ऊर्जा को दोगुना कर दिया। नतीजा यह हुआ कि शुक्रवार को सुलतानगंज पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। रेलवे स्टेशन से लेकर गंगा तट तक, धर्मशालाओं से लेकर मुख्य बाजार तक—हर जगह बस इंसानी सिर ही नजर आ रहे थे। दूर-दराज के राज्यों जैसे झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, नेपाल और देश के अन्य कोनों से पहुंचे शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

गंगा घाट पर गूंजे हर-हर गंगे और बम-बम भोले के जयकारे

शुक्रवार की अहले सुबह से ही उत्तर वाहिनी गंगा के सीढ़ी घाट, अजगैवीनाथ मंदिर घाट और कच्ची कांवरिया पथ पर 'हर-हर गंगे' और 'बम-बम भोले' के महामंत्र गूंजने लगे। लाखों की संख्या में पहुंचे कांवरियों ने सबसे पहले मां गंगा की पवित्र धाराओं में डुबकी लगाई। इसके बाद सूर्य की पहली किरण के साथ ही जल भरकर संकल्प लिया और अपनी कठिन 105 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा की शुरुआत की।

अथाह श्रद्धा का नजारा: घाटों पर हर उम्र के लोग नजर आए। बुजुर्ग माताएं, युवा और छोटे-छोटे बच्चे भी अपने कंधों पर कांवर उठाए श्रद्धा में लीन दिखाई दिए। मौसम सुहाना होने के कारण बुजुर्ग कांवरियों को भी स्नान करने और जल भरने में अत्यधिक सुविधा महसूस हुई।

भंडारों और सेवा शिविरों में लगी कतारें: कांवरियों की इस रिकॉर्ड संख्या को देखते हुए सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन द्वारा जगह-जगह लगाए गए सेवा शिविरों और भंडारों में भी भारी चहल-पहल रही। सेवादार पूरी तन्मयता के साथ कांवरियों की सेवा में जुटे नजर आए।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की बढ़ी चौकसी

एकाएक उमड़ी इस रिकॉर्ड भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय जिला प्रशासन, नवगछिया पुलिस जिला प्रशासन और पुलिस बल को पूरी तरह मुस्तैद होना पड़ा। भीड़ के अत्यधिक दबाव को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे:

यातायात नियंत्रण: मुख्य मार्गों और चौक-चौराहों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी, ताकि कांवरियों को पैदल चलने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

घाटों पर गोताखोर तैनात: गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के लिहाज से एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों के साथ-साथ कुशल गोताखोरों और पुलिस बल को घाटों पर तैनात किया गया था।

सीसीटीवी से निगरानी: प्रशासन द्वारा कंट्रोल रूम के जरिए पूरे मेला क्षेत्र और घाटों की गतिविधियों पर सीसीटीवी कैमरों से लगातार नजर रखी जा रही थी।

व्यवसायियों के चेहरे खिले, आर्थिक गतिविधियों को मिला बल

कांवरियों की इस अभूतपूर्व भीड़ का सीधा लाभ स्थानीय व्यवसायियों, होटल मालिकों, पंडा समाज और छोटे दुकानदारों को मिला है। पिछले कुछ दिनों से बारिश के कारण थोड़ी सुस्त पड़ी व्यापारिक गतिविधियां शुक्रवार को रिकॉर्ड भीड़ के आने से अचानक परवान चढ़ गईं। पूजा सामग्री, कांवर, कपड़े, फल और मिष्ठान की दुकानों पर खरीदारों की लंबी कतारें लगी रहीं। दुकानदारों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह मेहरबान रहा, तो इस बार सावन के सीजन में व्यापार के सारे पुराने रिकॉर्ड टूट जाएंगे।

आस्था के आगे फीकी पड़ी हर कठिनाई

सुल्तानगंज से देवघर तक की यह कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक मार्ग नहीं, बल्कि मानव शरीर की सहनशक्ति, समर्पण और अटूट आस्था की एक अनूठी मिसाल है। मौसम के सुहाने होने से मिली इस राहत ने कांवरियों के सफर को आसान तो बनाया ही, साथ ही पूरे माहौल को पूरी तरह अध्यात्ममय कर दिया।

शुक्रवार का दिन सुल्तानगंज के इतिहास में एक रिकॉर्ड दिवस के रूप में दर्ज हो गया है, जहां प्रकृति की कृपा और शिवभक्तों की अगाध आस्था ने मिलकर एक ऐसा विहंगम दृश्य उपस्थित किया, जिसे देखने वाले हर व्यक्ति के मन में भक्ति का भाव स्वतः जागृत हो उठा। बाबा बैद्यनाथ की नगरी की ओर बढ़ता यह केसरिया कारवां इस बात का गंतव्य है कि जब सच्ची श्रद्धा हो, तो हर राह आसान हो जाती है।