24 घंटे में ही टूटे लोहे के सुरक्षा बैरियर, भारी वाहनों की 'नो एंट्री' फेल
सुल्तानगंज में रविवार को रेलवे ओवरब्रिज (ROB) की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बड़े हादसों को टालने के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए एक बड़े कदम पर महज 24 घंटे के भीतर पानी फिर गया है। ओवरब्रिज को जर्जर होने से बचाने के लिए प्रशासन ने भारी वाहनों (ट्रक, बस और हाइवा) के प्रवेश को रोकने के लिए लोहे के मजबूत सुरक्षा बैरियर लगाए थे। लेकिन चालकों की घोर मनमानी, लापरवाही और दबंगई के कारण ये बैरियर्स बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति और दिखावे के लिए काम करता है। बैरियर लगाने के बाद वहां न तो किसी होमगार्ड के जवान की तैनाती की गई और ना ही पुलिस का कोई पहरा था। नतीजतन, भारी वाहनों के चालकों ने जबरन अपनी गाड़ियां निकालने के चक्कर में लोहे के भारी-भरकम गार्डर और एंगल को टक्कर मारकर तोड़ दिया। अब इस ओवरब्रिज पर फिर से भारी वाहनों का अवैध और खतरनाक परिचालन धड़ल्ले से शुरू हो गया है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
क्या था प्रशासन का प्लान? (क्यों लगाए गए थे बैरियर)
सुल्तानगंज का यह रेलवे ओवरब्रिज काफी पुराना है और पिछले कुछ समय से इसकी संरचना पर अत्यधिक भार पड़ने के कारण दरारें और जर्जरता की शिकायतें आ रही थीं। पुल की लाइफलाइन बढ़ाने और इसकी तुरंत मरम्मत के उद्देश्य से अनुमंडल प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया था।
रविवार का प्रशासनिक एक्शन:
रविवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पीडब्ल्यूडी (PWD) और रेलवे के इंजीनियरों की देखरेख में ओवरब्रिज के दोनों छोरों पर लोहे के ऊंचे और मजबूत एंगल वेल्डिंग कराकर लगाए गए थे। इसके साथ ही चेतावनी बोर्ड भी टांगा गया था कि इस मार्ग से केवल हल्के वाहन (कार, ऑटो, बाइक) ही गुजर सकते हैं। भारी वाहनों को डाइवर्टेड रूट (वैकल्पिक मार्ग) से जाने का निर्देश दिया गया था।
स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा: "चालकों की गुंडागर्दी और पुलिस की सुस्ती का नतीजा"
बैरियर के क्षतिग्रस्त होने के बाद सुल्तानगंज के स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और राहगीरों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने मौके पर मीडिया कर्मियों को पूरी सच्चाई बताई।
ग्रामीणों और चश्मदीदों के 3 बड़े आरोप:
रात के अंधेरे में तांडव: स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि रविवार की रात जैसे ही अंधेरा हुआ, बालू और गिट्टी लदे ओवरलोडेड ट्रकों और हाइवा का आना शुरू हो गया। जब चालकों ने देखा कि आगे बैरियर लगा है और गाड़ी पार नहीं हो सकती, तो उन्होंने रूट बदलने के बजाय जबरन गाड़ी को आगे बढ़ाया। इस दौरान ट्रकों के ऊपरी हिस्से से टकराकर लोहे के बैरियर मुड़ गए और कंक्रीट का बेस उखड़ गया।
पुलिस की मिलीभगत का अंदेशा: लोगों का सीधा आरोप है कि बाईपास और मुख्य चौराहों पर तैनात रहने वाली पुलिस रात के वक्त ट्रकों से अवैध वसूली (इंट्री) के चक्कर में आंखें मूंद लेती है। अगर पुलिस मुस्तैद होती, तो किसी भी ट्रक चालक की इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर ओवरब्रिज पर गाड़ी चढ़ा दे।
करोड़ों की लागत और जनता की जान खतरे में: इस ओवरब्रिज के नीचे से हर वक्त दर्जनों पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं। यदि भारी वाहनों के दबाव से यह ओवरब्रिज क्षतिग्रस्त होकर नीचे रेलवे ट्रैक पर गिरता है, तो इसकी भयावहता की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
ओवरब्रिज की वर्तमान स्थिति: एक नजर में
| फैक्ट शीट / स्टेटस रिपोर्ट | वर्तमान जमीनी हकीकत |
|---|---|
| लोकेशन | रेलवे ओवरब्रिज (ROB), सुल्तानगंज मुख्य मार्ग |
| प्रशासनिक कदम | रविवार को लोहे के हाइट गेज/बैरियर की स्थापना |
| क्षति का कारण | भारी वाहनों (ट्रक/हाइवा) के चालकों द्वारा जबरन टक्कर |
| सुरक्षा व्यवस्था | शून्य (घटनास्थल पर कोई पुलिसकर्मी या वॉचमैन नहीं) |
| वर्तमान स्थिति | बैरियर टूटे हुए, भारी वाहनों का परिचालन फिर से जारी |
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी?
इस बड़ी लापरवाही और सरकारी संपत्ति के नुकसान पर जब स्थानीय प्रशासन और थाना स्तर पर बात की गई, तो अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेने की बात कही है। सुल्तानगंज थाना प्रभारी के मुताबिक, पुलिस को बैरियर क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है।
CCTV फुटेज की जांच: पुलिस ओवरब्रिज के एप्रोच रोड और आसपास के पेट्रोल पंपों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है, ताकि उन ट्रकों और हाइवा नंबरों की पहचान की जा सके जिन्होंने बैरियर को तोड़ा है।
प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की तैयारी: सरकारी कार्य में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में अज्ञात वाहन चालकों और उनके मालिकों के खिलाफ केस दर्ज किया जा रहा है।
पुनः निर्माण और गार्ड की तैनाती: प्रशासन का कहना है कि बैरियर को दोबारा दुरुस्त किया जाएगा और इस बार वहां स्थाई रूप से पुलिस बल या होमगार्ड के जवानों की 24 घंटे की ड्यूटी लगाई जाएगी, ताकि कोई भी नियम का उल्लंघन न कर सके।
स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि केवल लोहे का पोल गाड़ देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक सुल्तानगंज बाईपास और असरगंज मोड़ के पास ही भारी वाहनों को रोकने के लिए चेकपोस्ट नहीं बनाया जाता, तब तक शहर के भीतर नो-एंट्री का पालन कराना नामुमकिन है। प्रशासन को चाहिए कि वो अवैध रूप से शहर में घुसने वाले भारी वाहनों पर इतना मोटा जुर्माना लगाए कि चालकों में कानून का खौफ पैदा हो।