श्रद्धांजलि सभा और कवि-गोष्ठी में समाज की व्यवस्था पर हुई गहन चर्चा; दिवंगत की याद में जरूरतमंदों को मिली मदद
मुंगेर: अपनी दूरदर्शिता, सामाजिक सरोकारों और परोपकारी कार्यों से समाज के लिए मिसाल कायम करने वाले महान व्यक्तित्वों की स्मृतियां सदियों तक लोगों का मार्गदर्शन करती हैं। इसी कड़ी में मुंगेर शहर के ऐतिहासिक दो नंबर गुमटी के पास स्थित पुअर हाउस परिसर में समाजसुधारक और प्रख्यात शख्सियत ब्रह्मलीन बलदेव प्रसाद मोदी की 150वीं पुण्यतिथि अत्यंत ही श्रद्धा, भव्यता और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाई गई। इस पावन और ऐतिहासिक अवसर पर एक विशाल श्रद्धांजलि सभा के साथ-साथ एक उच्चस्तरीय कवि-गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। बी.पी. मोदी फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर के गणमान्य लोग, साहित्यकार, कवि और प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए, जिन्होंने ब्रह्मलीन बलदेव प्रसाद मोदी के तैलচিত্র पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
क्या है पूरा आयोजन? श्रद्धांजलि सभा और कवि-गोष्ठी का रूप
150वीं पुण्यतिथि के इस विशेष अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न केवल ब्रह्मलीन बलदेव प्रसाद मोदी के कृतित्व और व्यक्तित्व को याद करना था, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए सेवा और परोपकार के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लेना भी था।
पुष्पांजलि और श्रद्धांजलि सभा: कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और ब्रह्मलीन बलदेव प्रसाद मोदी की प्रतिमा/तैलचित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। उपस्थित सभी वक्ताओं और अतिथियों ने उनके जीवन संघर्ष, समाज सेवा और दानशीलता के संस्मरणों को साझा किया। वक्ताओं ने कहा कि बलदेव प्रसाद मोदी ने अपने जीवनकाल में गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों की सेवा को ही अपना सबसे बड़ा धर्म माना था।
कवि-गोष्ठी और सामाजिक व्यवस्था पर मंथन: श्रद्धांजलि सभा के उपरांत एक भावुक और वैचारिक कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में क्षेत्र के जाने-माने कवियों और साहित्यकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से वर्तमान समाज की व्यवस्था, मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं और सामाजिक बदलाव पर अपने विचार रखे। कवियों ने अपनी रचनाओं के जरिए यह संदेश दिया कि जब तक समाज के हर अंतिम व्यक्ति तक न्याय और शिक्षा नहीं पहुंचती, तब तक सच्चे समाजवाद और मानवता की कल्पना अधूरी है।
दिवंगत मोदी के पुत्र द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि और सेवा कार्य
इस 150वीं पुण्यतिथि के समारोह को और अधिक सार्थक बनाते हुए ब्रह्मलीन बलदेव प्रसाद मोदी के सुपुत्र और परिजनों ने उनके पदचिन्हों पर चलते हुए समाज सेवा का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।
भावुक श्रद्धांजलि: दिवंगत बलदेव प्रसाद मोदी के पुत्र ने अपने पिता को याद करते हुए एक अत्यंत भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उन्हें हमेशा यही सिखाया था कि जीवन का असली आनंद दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाने और दीन-दुखियों की सेवा करने में है। आज उनकी 150वीं जयंती पर पूरा परिवार उनके आदर्शों को जीवित रखने का संकल्प लेता है।
गरीबों और असहायों की मदद: इस अवसर पर बी.पी. मोदी फाउंडेशन की ओर से पुअर हाउस में रहने वाले और आसपास के जरूरतमंद, गरीब एवं असहाय लोगों के बीच भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्रियों का वितरण किया गया। फाउंडेशन के इस मानवीय कदम से गरीबों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।
बी.पी. मोदी फाउंडेशन का सामाजिक योगदान
बी.पी. मोदी फाउंडेशन लगातार मुंगेर जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।
संस्कृति और सेवा का संगम: फाउंडेशन के आयोजकों ने बताया कि बलदेव प्रसाद मोदी के नाम पर स्थापित यह संस्था आने वाले दिनों में और भी बड़े पैमाने पर जनहित के कार्य करेगी। मुंगेर की धरती पर इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और पूर्वजों के त्याग से प्रेरणा मिलती है।
उपस्थित गणमान्य लोग: इस कार्यक्रम में मुंगेर के कई प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया और फाउंडेशन के इस प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
मुंगेर के दो नंबर गुमटी स्थित पुअर हाउस में आयोजित ब्रह्मलीन बलदेव प्रसाद मोदी की 150वीं पुण्यतिथि का यह आयोजन इतिहास के पन्नों में एक प्रेरणादायी अध्याय बन गया है। श्रद्धांजलि सभा, कवि-गोष्ठी और जरूरतमंदों की मदद का यह त्रिवेणी संगम यह साबित करता है कि महान लोग भले ही शरीर से इस दुनिया में न हों, लेकिन उनके द्वारा किए गए अच्छे कर्म और विचार हमेशा अमर रहते हैं।