मृतका अमृता कुमारी के गायब डिजिटल साक्ष्यों की तलाश तेज, बीडीओ और महिला दरोगा से गहन पूछताछ
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में चर्चित अमृता कुमारी दहेज हत्या मामले (Amrita Kumari Dowry Death Case) ने एक नया और सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। मिठनपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस अब मृतका अमृता कुमारी के गायब हुए दो स्मार्टफोन, एक टैबलेट और एक लैपटॉप की सरगर्मी से तलाश कर रही है। पुलिस और मृतका के परिजनों का मानना है कि ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस पूरे अंधकारमय मामले की गुत्थी सुलझाने में सबसे अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।
गायब उपकरणों में छिपे हैं हत्या और प्रताड़ना के बड़े राज़
मृतका अमृता कुमारी के भाई राजकुमार द्वारा मिठनपुरा थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी और बयानों के मुताबिक, इन गायब डिजिटल उपकरणों के अंदर अमृता को मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के अनगिनत सबूत मौजूद हैं। इसके अलावा, मिठनपुरा थाना क्षेत्र के बेला मोड़ स्थित उनके आवास पर जो सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, उन कैमरों का लाइव एक्सेस और कंट्रोल भी अमृता के उसी मोबाइल फोन में था जो अब गायब है।
परिजनों और जांचकर्ताओं का शक है कि मृतका के पति और इस कांड के मुख्य आरोपी—जाले प्रखंड के प्रवर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मनोज कुमार—तथा उनके सहयोगियों ने सोची-समझी साजिश के तहत इन सबूतों को मिटाने या छुपाने के लिए मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप को गायब किया है। यदि पुलिस के हाथ ये उपकरण लग जाते हैं, तो चैटिंग, कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और सीसीटीवी लिंक्स के जरिए हत्या की रात की असल दास्तां सामने आ जाएगी।
बीडीओ पति और महिला दरोगा की गिरफ्तारी और आमने-सामने पूछताछ
इस प्रकरण में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले जाले के बीडीओ मनोज कुमार को मुजफ्फरपुर-दरभंगा सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। इसके बाद अनुसंधान के दौरान यह बात सामने आई कि बीडीओ मनोज कुमार का बेगूसराय जिले में तैनात एक महिला पुलिस अवर निरीक्षक (SI/दरोगा) अनु कुमारी के साथ लंबे समय से अवैध प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसी आधार पर पुलिस ने महिला दरोगा अनु कुमारी को भी उनके पैतृक गांव (सुर्संद, सीतामढ़ी जिला) से गिरफ्तार कर लिया।
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद जब बीडीओ मनोज कुमार और महिला दारोगा अनु कुमारी को मिठनपुरा थाने में आमने-सामने बिठाकर कड़ाई से पूछताछ की गई, तो शुरुआती दौर में दोनों ने कई सवालों से पल्ला झाड़ लिया और अनजान बनने की कोशिश की। परंतु, जब पुलिस ने उनके सामने दोनों की अंतरंग तस्वीरें, मोबाइल टावर लोकेशन, और व्हाट्सएप/कॉल चैटिंग के डिजिटल सबूत रखे, तब दोनों को अपना प्रेम प्रसंग स्वीकार करना पड़ा।
यह भी खुलासा हुआ है कि पुलिस हिरासत में आने से ठीक पहले महिला दारोगा ने अपने मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों और चैट्स को डिलीट करने का भी प्रयास किया था। फिलहाल, पुलिस साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से दोनों के जप्त मोबाइलों के डेटा को रिकवर करने और खंगालने में जुटी हुई है।
प्रेम प्रसंग, 10 लाख की दहेज मांग और प्रताड़ना की पूरी पृष्ठभूमि
पुलिस की अब तक की जांच और मृतका के भाई द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, अमृता और मनोज की जान-पहचान साल 2015 में बीपीएससी (BPSC) परीक्षा की तैयारी के दौरान हुई थी। यह दोस्ती प्यार में बदली और वर्ष 2020 में उन्होंने कोर्ट मैरिज कर ली। वर्ष 2022 में मनोज का चयन बीडीओ के पद पर होने के बाद, दोनों परिवारों की सहमति से साल 2023 में सामाजिक रीति-रिवाज से उनका विवाह पुनः संपन्न हुआ।
आरोप है कि शादी के बमुश्किल एक साल बाद ही बीडीओ मनोज कुमार और उनके परिवार के अन्य सदस्यों (पिता गंगा साह, मां, भाई अमन कुमार और बहन आरती कुमारी) द्वारा 10 लाख रुपये नकद दहेज की मांग की जाने लगी। जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो अमृता को प्रताड़ित किया जाने लगा। स्थिति तब और भयावह हो गई जब अमृता को अपने पति मनोज कुमार और महिला दरोगा अनु कुमारी के बीच अवैध संबंधों के बारे में जानकारी मिली। अमृता ने जब इस रिश्ते का खुलकर विरोध किया, तो उसके साथ घर में मारपीट और जुल्म का दायरा और बढ़ गया।
घटना की रात और आगे की पुलिस कार्रवाई
परिवार के अनुसार, 3 जुलाई की रात अमृता को कोई जहरीला या नशीला पदार्थ जबरन खिलाया गया, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद 4 जुलाई की देर रात उसे बेहोशी की हालत में मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हालत गंभीर होने पर दूसरे अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में उसकी मौत हो गई।
अमृता के शरीर पर मारपीट के निशान और वायरल हुए कुछ सीसीटीवी फुटेज, जिसमें आरोपियों के चेहरे साफ देखे जा रहे हैं, पुलिस के पास एक ठोस आधार हैं। बीडीओ और महिला दरोगा की गिरफ्तारी के बाद, अब पुलिस अन्य फरार चल रहे नामजद पारिवारिक सदस्यों—पिता गंगा साह, मां, भाई अमन और बहन आरती—की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, सीडीआर (CDR), और गायब गैजेट्स की बरामदगी के बाद इस मामले में चार्जशीट को बेहद मजबूत बनाया जाएगा ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।