जुलाई खत्म होने को, फिर भी बारिश की कमी बरकरार; पटना में उमस बढ़ेगी, उत्तर बिहार के कई जिलों में हल्की बारिश के आसार

पटना। जुलाई का महीना समाप्त होने की कगार पर है, लेकिन बिहार में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा रही है। मानसून के मौसम के बावजूद राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक वर्षा नहीं होने से लोगों के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार 30 जुलाई को राजधानी पटना समेत कई जिलों में उमस भरी गर्मी का असर देखने को मिलेगा, जबकि उत्तर बिहार के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, पटना में पूरे दिन गर्मी और उमस बनी रह सकती है। तापमान अधिक रहने और वातावरण में नमी बढ़ने के कारण लोगों को असहज मौसम का सामना करना पड़ सकता है। दोपहर के समय धूप और उमस का प्रभाव सबसे अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को पर्याप्त पानी पीने और दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बिहार में इस बार मानसून की गतिविधियां अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही हैं। राज्य के कई हिस्सों में छिटपुट बारिश तो हुई है, लेकिन व्यापक और लगातार वर्षा का अभाव बना हुआ है। यही वजह है कि जुलाई समाप्त होने के बावजूद बारिश की कमी दूर नहीं हो सकी है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार उत्तर बिहार के कई जिलों में हल्की बारिश और कुछ स्थानों पर गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। नेपाल सीमा से सटे जिलों और तराई क्षेत्रों में वर्षा की संभावना अपेक्षाकृत अधिक है, जबकि दक्षिण और मध्य बिहार के कई हिस्सों में उमस भरी गर्मी बनी रह सकती है।

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। धान की रोपाई कई जिलों में प्रभावित हुई है क्योंकि खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। किसान सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत भी बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण भूजल पर निर्भरता भी बढ़ रही है। कई स्थानों पर किसान ट्यूबवेल और अन्य सिंचाई साधनों का उपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने किसानों को उपलब्ध जल संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की सलाह दी है।

मौसम विभाग के अनुसार वातावरण में नमी मौजूद है, जिसके कारण कुछ स्थानों पर बादल बनने और हल्की बारिश होने की संभावना बनी हुई है। हालांकि फिलहाल ऐसा कोई मजबूत मौसमी तंत्र सक्रिय नहीं है, जिससे पूरे बिहार में व्यापक वर्षा हो सके। इसलिए आने वाले कुछ दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल, उमस और छिटपुट बारिश का दौर जारी रह सकता है।

पटना, गया, नालंदा, भोजपुर और मध्य बिहार के कई जिलों में दिन के समय तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। बादल छाए रहने के बावजूद उमस लोगों को परेशान कर सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अधिक नमी के कारण वास्तविक तापमान से अधिक गर्मी महसूस होगी।

वहीं उत्तर बिहार के कई जिलों में हल्की बारिश के साथ तेज हवा और कहीं-कहीं गरज-चमक की संभावना भी जताई गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश जुलाई महीने में हुई वर्षा की कमी को पूरी तरह पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को गर्मी और उमस से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी पीना, हल्के सूती कपड़े पहनना, दोपहर के समय तेज धूप से बचना और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना आवश्यक है। गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से भी बचने की सलाह दी गई है।

बारिश की कमी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि जल स्रोतों और सिंचाई व्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। यदि अगले कुछ दिनों तक मानसून की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कई जिलों में सिंचाई की मांग और बढ़ सकती है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगस्त के पहले सप्ताह में यदि अनुकूल मौसमी तंत्र विकसित होता है तो बिहार में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।

फिलहाल बिहार में गर्मी, उमस, बादलों की आवाजाही और छिटपुट बारिश का मिश्रित मौसम बने रहने की संभावना है। उत्तर बिहार के कुछ जिलों में हल्की बारिश से लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन पटना और कई अन्य जिलों में उमस भरी गर्मी से फिलहाल राहत मिलने के आसार कम हैं। ऐसे में किसानों और आम लोगों की नजर अब अगस्त के पहले सप्ताह में मानसून की सक्रियता पर टिकी हुई है।