गुलाबबाग के होटलों में शराबखोरी का अड्डा, बार-बार मिल रही शिकायतों के बावजूद प्रशासन बेखबर
पूर्णिया। गुलाबबाग के सनौली चौक स्थित होटलों में अवैध गतिविधियों का संचालन थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले एक महीने के भीतर एक ही होटल में दो बार शराब पार्टी पकड़े जाने की घटना ने क्षेत्र की सुरक्षा और आबकारी विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। 'हिन्दुस्तान' की ओर से पूर्व में भी इस विषय को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद, धरातल पर स्थिति में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। यह स्पष्ट है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण ये होटल अब शराबियों के सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं।
बार-बार दोहराई जा रही घटनाएं
सनौली चौक, जो पूर्णिया का एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, यहाँ स्थित होटलों में शराब पार्टी का मिलना कोई नई बात नहीं है। पिछले 30 दिनों के भीतर दो बार पुलिस और उत्पाद विभाग ने छापेमारी कर शराब की बोतलें बरामद कीं और कई लोगों को हिरासत में लिया। पहली घटना के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि संबंधित होटल का लाइसेंस रद्द किया जाएगा और उसके मालिकों पर सख्त कार्रवाई होगी, ताकि अन्य संचालकों के लिए यह एक नजीर बने। लेकिन, कानूनी दांव-पेचों के बीच होटल संचालक पुनः उसी कार्य में संलिप्त पाए गए, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाती है।
क्या है जमीनी हकीकत?
सूत्रों के मुताबिक, इन होटलों में शाम ढलते ही बाहर से लोग आने लगते हैं। होटल के कमरों में अवैध रूप से शराब की व्यवस्था की जाती है। होटल मालिक अधिक मुनाफे के चक्कर में नियमों को ताक पर रखकर बाहर से आने वाले ऐसे असामाजिक तत्वों को संरक्षण देते हैं। सनौली चौक जैसा व्यस्त इलाका, जहाँ से हर पल लोग गुजरते हैं, वहाँ इस तरह का कृत्य न केवल सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी असुरक्षा का माहौल पैदा कर रहा है।
क्यों बेअसर है कार्रवाई?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बार-बार पकड़े जाने के बावजूद इन होटलों पर ताला क्यों नहीं लग पा रहा है?
मिलीभगत की आशंका: स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध धंधेबाजों और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था देखने वाले कुछ भ्रष्ट तत्वों की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है।
नाममात्र की कार्यवाही: उत्पाद विभाग द्वारा पकड़े गए लोगों पर जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाना या कमतर धाराओं में केस दर्ज करना अपराधियों के हौसले बुलंद कर देता है।
लाइसेंस की जांच का अभाव: जब कोई होटल बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके व्यावसायिक लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की प्रक्रिया धीमी रहती है।
क्षेत्रवासियों में आक्रोश
इस स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय दुकानदार ने बताया, "हम लोग यहाँ व्यापार करते हैं। शाम होते ही इन होटलों के बाहर जिस तरह का हुड़दंग शुरू होता है, उसे देखकर परिवार के साथ घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। पुलिस आती है, खानापूर्ति करती है और चली जाती है, लेकिन कुछ दिनों बाद ही फिर वही स्थिति उत्पन्न हो जाती है।"
पुलिस और प्रशासन की चुनौतियां
पूर्णिया प्रशासन लगातार शराबबंदी को सफल बनाने के दावे कर रहा है, लेकिन गुलाबबाग जैसे क्षेत्रों में हो रही ऐसी घटनाएं दावों की पोल खोल रही हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही एक विशेष टीम का गठन कर क्षेत्र के सभी होटलों की औचक जांच की जाएगी। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह कार्रवाई महज एक दिखावा होगी या कोई ठोस नतीजा निकलेगा।
सुधार के लिए आवश्यक कदम
अगर प्रशासन वास्तव में इस समस्या का समाधान चाहता है, तो निम्नलिखित कदम उठाए जाने आवश्यक हैं:
सख्त कानूनी कार्रवाई: बार-बार अपराध करने वाले होटल मालिकों पर 'कठोरतम कानून' के तहत कार्रवाई हो और उनका लाइसेंस हमेशा के लिए निरस्त किया जाए।
होटल रजिस्टर की नियमित जांच: प्रशासन को निर्देश देना चाहिए कि होटल में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का आधार कार्ड अनिवार्य रूप से रजिस्टर में दर्ज हो।
सीसीटीवी निगरानी: सभी होटलों में सीसीटीवी कैमरे का होना और उसका फुटेज थाना स्तर पर लिंक होना अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
जनता की भागीदारी: स्थानीय नागरिकों को शिकायत करने के लिए एक सीधा हेल्पलाइन नंबर दिया जाए, जहाँ वे बिना डरे अवैध गतिविधियों की सूचना दे सकें।
गुलाबबाग के सनौली चौक की ये घटनाएं केवल होटल मालिकों की लालच की कहानी नहीं हैं, बल्कि यह प्रशासन के ढीले रवैये का प्रतिबिंब है। यदि समय रहते इन अवैध अड्डों को ध्वस्त नहीं किया गया, तो पूर्णिया में शराबबंदी की मुहिम मजाक बनकर रह जाएगी। यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि एक स्वस्थ समाज के निर्माण का सवाल है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी होटल की आड़ में कानून की धज्जियां न उड़ाई जाएं। अब देखना यह है कि क्या इस 'हिन्दुस्तान फॉलोअप' के बाद प्रशासन कोई सख्त रुख अपनाता है या ये होटले फिर से शराबखोरी का केंद्र बने रहेंगे।