बासुकीनाथ धाम के लिए रवाना हुआ पड़ाव संघ का ऐतिहासिक 114वां कांवरिया जत्था; विधायकों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में गूंजे 'बोल बम' के जयकारे, हजारों शिवभक्तों ने भरी हुंकार

भागलपुर, विशेष संवाददाता: देवों के देव महादेव को समर्पित पवित्र श्रावण मास के अवसर पर भागलपुर जिले के कहलगांव से निकलने वाली प्रसिद्ध पड़ाव संघ की ऐतिहासिक 114वीं कांवर यात्रा का बुधवार को अत्यंत भव्य और उत्साहपूर्ण माहौल में शुभारंभ हुआ। कहलगांव के ऐतिहासिक उत्तरवाहिनी गंगा तट पर अहले सुबह से ही आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस सुप्रसिद्ध पदयात्रा में क्षेत्र के विधायक, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और लगभग तीन हजार की संख्या में शिवभक्त कांवरिया शामिल हुए। 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा।

गंगा तट पर विधि-विधान से जल संकल्प और पूजन

यात्रा के प्रारंभिक दिन बुधवार की सुबह कहलगांव के राज घाट और ऐतिहासिक गंगा तटों पर हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां गंगा की विधिवत पूजा-अर्चना की:

पवित्र जल भरकर संकल्प: कांवरियों ने वेदमंत्रों के बीच उत्तरवाहिनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और अपने-अपने कांवर तथा पीतल के बड़े कलशों में पवित्र जल भरा। इसके पश्चात बाबा बासुकीनाथ धाम में सुरक्षित पहुंचकर जलाभिषेक करने का संकल्प लिया गया।

भव्य कांवर बने आकर्षण का केंद्र: इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल और कलात्मक स्वरूप रहा। यात्रा में शामिल दर्जनों फीट लंबे पारंपरिक और आधुनिक सजावट वाले कांवर (जिन्हें फूलों, लाइटों और धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया था) हर देखने वाले का मन मोह रहे थे।

विधायकों और जनप्रतिनिधियों की रही विशेष उपस्थिति

इस ऐतिहासिक और पारंपरिक 114वीं कांवर यात्रा को हरी झंडी दिखाने और कांवरियों का उत्साहवर्धन करने के लिए क्षेत्र के कई दिग्गज जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे:

नेताओं ने की कांवरियों की अगवानी: स्थानीय विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और नगर निकाय के प्रमुख प्रतिनिधियों ने खुद आगे बढ़कर कांवरियों का स्वागत किया और उनके साथ कुछ दूर तक पैदल चलकर उनका हौसला बढ़ाया।

जनता और नेताओं का समन्वय: जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पड़ाव संघ की यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह कहलगांव और आसपास के क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता, आपसी भाईचारे और अनुशासन का एक अनूठा प्रतीक है जो सदियों से चला आ रहा है।

कठिन पदयात्रा और रूट की रूपरेखा

कहलगांव के किला दुर्गा स्थान और उत्तरवाहिनी गंगा तट से शुरू यह जत्था निर्धारित रूट के अनुसार आगे बढ़ा:

पहला पड़ाव और विश्राम स्थल: यह कांवरिया जत्था कहलगांव से चलकर घोघा, सन्हौला, पंजवारा और धोरैया के रास्ते बासुकीनाथ धाम की ओर बढ़ रहा है। रास्ते में पड़ने वाले विभिन्न पड़ावों पर श्रद्धालुओं के रात्रि विश्राम, भोजन और चिकित्सा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

प्रशासनिक चौकसी: कांवरियों की सुरक्षा और सुगम यातायात के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। यात्रा मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ जगह-जगह स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सेवा शिविर लगाए गए हैं, जहां कांवरियों को फल, पानी, ओआरएस और चाय वितरित की जा रही है।

पड़ाव संघ के बैनर तले निकलने वाली यह 114वीं कांवर यात्रा एक बार फिर यह साबित करती है कि पीढ़ी दर पीढ़ी सनातन संस्कृति और भगवान शिव के प्रति लोगों की आस्था अटूट बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों, युवाओं और बुजुर्गों की इस सामूहिक सहभागिता से यह यात्रा ऐतिहासिक सफलता की ओर अग्रसर है, और सभी कांवरियों के उत्साह को देखकर यह स्पष्ट है कि वे बाबा बासुकीनाथ के दरबार में हाजिरी लगाकर ही दम लेंगे।