मुजफ्फरपुर में सावन की पहली सोमवारी पर बाबा गरीबनाथ का ऐतिहासिक जलाभिषेक: 30 घंटे तक अनवरत गूंजता रहा हर-हर महादेव का जयकारा
पवित्र सावन महीने की शुरुआत के साथ ही पूरा बिहार भक्तिमय माहौल में डूब चुका है। उत्तर बिहार के प्रसिद्ध और आस्था के बड़े केंद्र बाबा गरीबनाथ मंदिर (Baba Garibnath Temple) में सावन की पहली सोमवारी के अवसर पर एक अद्भुत और अभूतपूर्व धार्मिक दृश्य देखने को मिला। बाबा गरीबनाथ के दरबार में जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा शहर शिवमय हो गया। बाबा गरीबनाथ को जल अर्पित करने का यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं लिया और 30 घंटे तक लगातार अनवरत जलाभिषेक का दौर चलता रहा।
इस पावन अवसर पर दूर-दूर से आए लगभग एक लाख से अधिक कांवरियों और शिवभक्तों ने लंबी कतारों में लगकर बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक किया और अपनी मनोकामनाएं मांगी। भीड़ के इस भारी सैलाब को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस बल और स्थानीय सेवा दलों ने जिस मुस्तैदी का परिचय दिया, उसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
क्या है पूरा मामला? (सावन की पहली सोमवारी और बाबा गरीबनाथ दरबार की रौनक)
हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, और उसमें भी पहली सोमवारी का विशेष धार्मिक महत्व होता है। मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक बाबा गरीबनाथ मंदिर में इसे लेकर महीनों पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
30 घंटे का अनवरत जलाभिषेक: सावन की पहली सोमवारी के मद्देनजर रविवार की भोर से ही मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे, जिसके बाद शुरू हुआ जलाभिषेक का यह दौर बिना रुके लगातार 30 घंटे तक चलता रहा। रात हो या दिन, कांवरियों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई।
कांवरियों का महासंगम: बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों और नेपाल तक से शिवभक्त सुल्तानगंज और अन्य घाटों से जल भरकर लंबी पदयात्रा के बाद मुजफ्फरपुर पहुंचे थे। "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के नारों से पूरा शहर गूंज उठा।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़: मंदिर न्यास समिति के आंकड़ों के मुताबिक, पहली सोमवारी के दिन एक लाख से अधिक भक्तों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर बाबा पर जलाभिषेक किया। सुरक्षा और सुगमता के लिए प्रशासन ने विशेष बैरिकेडिंग की व्यवस्था की थी।
जिला प्रशासन और सेवा दलों की सराहनीय भूमिका
इतनी विशाल भीड़ को प्रबंधित करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक सेवा दलों के समन्वय ने इसे बेहद सफल बना दिया।
जिला प्रशासन और पुलिस बल की मुस्तैदी: मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने पूरी रात जागकर सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही थी ताकि किसी भी तरह की भगदड़ या अव्यवस्था से बचा जा सके।
सेवा दलों द्वारा लंगर और चिकित्सा शिविर: शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों और सेवा दलों द्वारा जगह-जगह कांवरियों की सेवा के लिए शिविर लगाए गए थे। थके-हारे श्रद्धालुओं के लिए चाय, पानी, फल, और प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) की मुफ्त व्यवस्था की गई थी, जिससे भक्तों को काफी राहत मिली।
यातायात और रूट डायवर्जन: भारी भीड़ के मद्देनजर शहर के कई मुख्य मार्गों को नो-विकल जोन (No-Vehicle Zone) घोषित कर दिया गया था और वाहनों के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया था, ताकि पैदल चलने वाले कांवरियों को कोई असुविधा न हो।
बाबा गरीबनाथ धाम की महत्ता और आध्यात्मिक ऊर्जा
बाबा गरीबनाथ धाम को उत्तर बिहार का 'बैद्यनाथ धाम' भी कहा जाता है, जहाँ सावन के हर सोमवार को भक्तों का तांता लगा रहता है।
भक्ति में डूबा शहर: पहली सोमवारी के इस पावन पर्व पर पूरा मुजफ्फरपुर जिला केसरिया वस्त्र पहने शिवभक्तों से पट गया था। मंदिर परिसर से लेकर शहर की मुख्य सड़कों तक केवल बम-बम भोले की गूंज सुनाई दे रही थी।
सुरक्षा के कड़े इंतजामों से राहत: महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए अलग से कतारें और सहायता केंद्र बनाए गए थे, जिससे हर श्रद्धालु ने बिना किसी परेशानी के सुगमता से बाबा का दर्शन और जलाभिषेक किया।
मुजफ्फरपुर में सावन की पहली सोमवारी के अवसर पर बाबा गरीबनाथ का 30 घंटे तक अनवरत जलाभिषेक और एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना करना इस बात का प्रमाण है कि देश में आस्था और सांस्कृतिक धरोहर कितनी मजबूत है। जिला प्रशासन की मुस्तैदी और सेवा दलों के समर्पण ने इस धार्मिक आयोजन को एक मिसाल बना दिया। इस भव्य और शांतिपूर्ण आयोजन से न केवल शिवभक्तों की मनोकामनाएं पूरी हुईं, बल्कि मुजफ्फरपुर की एकता और भाईचारे का संदेश भी दूर-दूर तक फैला।