पूर्णिया में शराब तस्करी का हाई-टेक नेटवर्क: डिलीवरी के लिए वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल, पुलिस के लिए बनी बड़ी चुनौती
पूर्णिया। पूर्णिया शहर में शराबबंदी के कानून को धता बताते हुए तस्कर अब अपराध की दुनिया में 'हाई-टेक' हो गए हैं। शराब की सुरक्षित डिलीवरी और पुलिस की छापेमारी से बचने के लिए तस्करों ने अब संचार के लिए 'वॉकी-टॉकी' का सहारा लेना शुरू कर दिया है। 'हिन्दुस्तान' की पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि तस्करों का यह नेटवर्क अब इतना संगठित हो चुका है कि वे पल-पल की जानकारी एक-दूसरे को गुप्त फ्रीक्वेंसी पर साझा कर रहे हैं। शहर के बीचों-बीच चल रहे इस हाई-टेक खेल ने स्थानीय पुलिस और उत्पाद विभाग की नींद उड़ा दी है।
कैसे काम करता है यह वॉकी-टॉकी सिंडिकेट?
शराब तस्करों ने अपना एक निजी संचार नेटवर्क स्थापित कर लिया है। डिलीवरी ब्वॉय, जिसे 'सप्लायर' कहा जाता है, वह शहर के अलग-अलग चौराहों पर तैनात अपने साथियों (स्काउट्स) से जुड़ा रहता है। जैसे ही डिलीवरी ब्वॉय किसी ग्राहक के घर शराब लेकर निकलता है, उसके रास्ते में पड़ने वाली पुलिस पिकेट या गश्ती दल की जानकारी वॉकी-टॉकी के जरिए उसे दे दी जाती है।
अमूमन, ये तस्कर कोडवर्ड्स का इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के तौर पर, पुलिस की गाड़ी को किसी खास कोड नाम से संबोधित किया जाता है। यदि रास्ते में कोई बाधा हो, तो तुरंत रूट बदल दिया जाता है। इस तकनीक ने तस्करों को छापेमारी से बचने का एक 'सुरक्षित कवच' प्रदान कर दिया है।
हालिया मामला: एक बड़ी साज़िश का खुलासा
हाल ही में शहर के एक मोहल्ले से पकड़े गए एक युवक ने पूछताछ के दौरान जो खुलासे किए, उसने पुलिस को भी हैरत में डाल दिया। युवक के पास से एक अत्याधुनिक वॉकी-टॉकी सेट बरामद हुआ, जिसका उपयोग वह शराब सप्लाई के दौरान लगातार कर रहा था। आरोपी ने बताया कि शहर के हर मुख्य चौक और संवेदनशील इलाके में उनके 'मुखबिर' तैनात रहते हैं, जो फोन कॉल की जगह वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते हैं ताकि कॉल ट्रेसिंग से बचा जा सके।
पुलिस का मानना है कि यह कोई छिटपुट काम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'डिलीवरी सिंडिकेट' है, जिसका मास्टरमाइंड शहर से बाहर बैठकर पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा है।
पुलिस के लिए बढ़ती चुनौतियां
वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करने से पुलिस के लिए तस्करों को पकड़ना मुश्किल हो गया है।
सीमित दायरा: वॉकी-टॉकी का सिग्नल कम दूरी का होता है, जिससे पुलिस के लिए इस फ्रीक्वेंसी को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण है।
तेज रफ़्तार: तस्कर अपनी डिलीवरी के लिए हाई-स्पीड दुपहिया वाहनों का उपयोग करते हैं। जैसे ही उन्हें पुलिस के आने का आभास होता है, वे गलियों के संकरे रास्तों से निकल भागते हैं।
कम लागत, अधिक सुरक्षा: मोबाइल फोन के मुकाबले वॉकी-टॉकी में सिम कार्ड की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पुलिस द्वारा सीडीआर (Call Detail Record) निकालने की प्रक्रिया काम नहीं आती।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और प्रशासन?
इस मामले पर साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग' है। प्रशासन को भी अब अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा। पूर्णिया पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे इस हाई-टेक नेटवर्क को तोड़ने के लिए 'एंटी-इंटरसेप्शन' उपकरणों की मदद लेंगे। जल्द ही शहर के संवेदनशील इलाकों में विशेष 'निगरानी दल' तैनात किए जाएंगे जो तस्करों के इस संचार नेटवर्क को डिकोड करने में सक्षम होंगे।
समाज पर असर: युवाओं का तेजी से जुड़ाव
इस तस्करी के पीछे की सबसे बड़ी चिंता युवाओं का इसमें जुड़ना है। कम समय में ज्यादा पैसे कमाने के लालच में किशोर और युवा इन तस्करों के जाल में फंस रहे हैं। डिलीवरी ब्वॉय के रूप में काम कर रहे ये युवा न केवल अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि कानून की जद में आकर अपराध के दलदल में धंसते जा रहे हैं।
भविष्य की राह: कैसे रुकेगा यह खेल?
शराबबंदी को धरातल पर सफल बनाने के लिए केवल शराब पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि इस 'तकनीकी नेटवर्क' को जड़ से उखाड़ना होगा:
टेक्निकल इंटेलिजेंस: पुलिस विभाग को ऐसे रेडियो मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग करना होगा जो अवैध फ्रीक्वेंसी को डिटेक्ट कर सके।
कम्युनिटी पुलिसिंग: स्थानीय लोगों को जागरूक करना होगा ताकि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या वॉकी-टॉकी के साथ घूमने वालों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
सख्त कानूनी प्रावधान: वॉकी-टॉकी जैसे उपकरण के अवैध उपयोग के लिए मौजूदा कानूनों के तहत सजा और बढ़ाई जानी चाहिए।
पूर्णिया में शराब तस्करी का यह नया तरीका प्रशासन के लिए एक अलार्म है। अपराधी समय के साथ तकनीक का लाभ उठा रहे हैं, और पुलिस को उनसे एक कदम आगे रहने की जरूरत है। यदि समय रहते इस वॉकी-टॉकी सिंडिकेट को खत्म नहीं किया गया, तो यह न केवल शराबबंदी के लिए खतरा होगा, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरेगा।