विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला की दूसरी सोमवारी पर जमालपुर में शिवभक्तों का सैलाब: सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर जमालपुर और आसपास के शिवालयों की ओर उमड़े कांवरिया, ट्रेनों में भारी भीड़ से यात्रियों को करनी पड़ी मशक्कत

जमालपुर (मुंगेर): आस्था, भक्ति और समर्पण के प्रतीक पावन सावन मास का महीना चल रहा है। इस दौरान पूरा बिहार और विशेष रूप से बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर की ओर जाने वाला मार्ग 'बोल बम' के जयकारों से गूंज रहा है। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के अवसर पर सावन की दूसरी सोमवारी के पावन अवसर पर मुंगेर जिले के औद्योगिक नगरी जमालपुर में शिवभक्तों (कांवरियों) की अभूतपूर्व और भारी भीड़ देखने को मिली। हर तरफ केसरिया वस्त्र पहने शिवभक्तों के जत्थे नजर आ रहे थे, जिससे पूरा वातावरण पूरी तरह से शिवमय हो गया है।

सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा तट से पवित्र गंगाजल भरकर कांवरियों के जत्थे जमालपुर पहुंचे और यहाँ के स्थानीय शिवालयों तथा दूरदराज के मंदिरों की ओर जलाभिषेक के लिए रवाना हुए। हालांकि, इस दौरान ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर उमड़ी भारी भीड़ के कारण आम यात्रियों को भी खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। आइए जानते हैं जमालपुर में श्रावणी मेला की दूसरी सोमवारी के इस आयोजन, कांवरियों के उत्साह और प्रशासनिक व्यवस्था का पूरा एवं विस्तृत विवरण।

 दूसरी सोमवारी का उत्साह: केसरिया रंग में रंगा जमालपुर और आसपास का इलाका

सावन महीने का हर दिन भगवान शिव की आराधना के लिए खास होता है, लेकिन सोमवार के दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। सावन की दूसरी सोमवारी पर भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करने के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया।

सुल्तानगंज से जल भरकर वापसी: लाखों की संख्या में कांवरिया सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा घाट पर पहुंचे, जहां उन्होंने पवित्र स्नान कर अपने कांवर में जल भरा। इसके बाद सुल्तानगंज और आसपास के रेलवे स्टेशनों के रास्ते कांवरियों के जत्थे जमालपुर पहुंचे।

'बोल बम' के जयकारों से गूंजा वातावरण: जमालपुर रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार और शिवालयों के रास्तों पर हर तरफ "हर हर महादेव" और "बोल बम" के जयकारे गूंज रहे थे। कांवरियों की सेवा के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा जगह-जगह शिविर (कांवरिया सेवा शिविर) लगाए गए थे, जहाँ उनके खान-पान और विश्राम की व्यवस्था की गई थी।

 ट्रेनों में भारी भीड़ और यात्रियों की मुश्किलें

श्रावणी मेला के दौरान सुल्तानगंज और जमालपुर के बीच चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिसका नजारा दूसरी सोमवारी के अवसर पर साफ तौर पर देखने को मिला।

पैर रखने की जगह नहीं: सुल्तानगंज और जमालपुर खंड पर चलने वाली पैसेंजर तथा एक्सप्रेस ट्रेनों में कांवरियों का इस कदर रेला था कि बोगियों के अंदर पैर रखने की भी जगह नहीं बची थी। कई कांवरिया तो अपनी यात्रा पूरी करने के लिए ट्रेन के गेट और छतों तक पर सफर करने को मजबूर दिखे।

आम यात्रियों को करना पड़ा इंतजार: ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ के कारण दैनिक यात्रियों और अन्य जगहों पर जाने वाले आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों को अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए घंटों रेलवे स्टेशन पर इंतजार करना पड़ा या बिना चढ़े ही वापस लौटना पड़ा। रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बलों और आरपीएफ (RPF) के जवानों को भीड़ नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

शिवालयों में उमड़ी भीड़, हर-हर महादेव की गूंज

जमालपुर और उसके आसपास के प्रसिद्ध शिवालयों, जैसे पुराना बाजार शिव मंदिर, बड़गाम शिव मंदिर और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में सोमवार की सुबह से ही जलाभिषेक के लिए लंबी-लंबी कतारें लग गईं।

भोर से ही शुरू हुआ जलाभिषेक: अहले सुबह 3-4 बजे से ही मंदिरों के पट खोल दिए गए थे। महिला, पुरुष और बच्चे कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। कांवरियों ने विधिवत रूप से भगवान शिव का जलाभिषेक किया और बेलपत्र, धतूरा, भांग व दूध अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।

प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद नजर आए। मंदिरों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके और शांतिपूर्ण तरीके से पूजा-अर्चना संपन्न हो सके।

 सेवा और समर्पण का भाव: जगह-जगह लगे शिविर

श्रावणी मेले की दूसरी सोमवारी पर जमालपुर में सामाजिक सौहार्द और सेवा भाव का अनूठा उदाहरण देखने को मिला।

निःशुल्क सेवा शिविर: शहर के विभिन्न हिस्सों में युवा संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा कांवरियों की सेवा के लिए शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों में कांवरियों के पैरों की मालिश, फफोले के इलाज के लिए दवाइयां, चाय, फल और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई थी।

भक्तिमय सांस्कृतिक माहौल: डीजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते हुए शिवभक्तों के जत्थे जब आगे बढ़ रहे थे, तो पूरा शहर भक्ति के सागर में गोता लगा रहा था।

जमालपुर में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला की दूसरी सोमवारी पर शिवभक्तों की उमड़ी भारी भीड़ और सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर शिवालयों की ओर प्रस्थान करने का यह दृश्य सनातन आस्था की अटूट ताकत को दर्शाता है। हालांकि ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ के कारण यात्रियों को कुछ असुविधाओं का सामना जरूर करना पड़ा, लेकिन भोलेनाथ की भक्ति में लीन कांवरियों का उत्साह और उमंग इन बाधाओं पर भारी पड़ा। प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से यह पावन पर्व शांतिपूर्ण और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ, जो मुंगेर और जमालपुर की सांस्कृतिक धरोहर को और प्रगाढ़ करता है।