बोन एंड जॉइंट वीक के अवसर पर स्वास्थ्य महाकुंभ: बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन और इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन द्वारा भव्य निःशुल्क बीएमडी जांच एवं हड्डी स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का सफल आयोजन
बिहार: आधुनिक जीवनशैली, खानपान की अनियमित आदतें, शारीरिक श्रम की कमी और बढ़ते प्रदूषण ने हमारे स्वास्थ्य पर गहरा विपरीत प्रभाव डाला है। इस दौड़भाग भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपनी हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका परिणाम गंभीर जोड़ों के दर्द, ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) और गठिया जैसी गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आता है। इसी गंभीर विषय के प्रति आम जनता को जागरूक करने और समय रहते हड्डियों की सेहत की जांच करने के उद्देश्य से 'बोन एंड जॉइंट वीक' (Bone and Joint Week) के पावन अवसर पर एक सराहनीय पहल की गई। संयुक्त रूप से बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (Bihar Orthopedic Association) और इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (Indian Orthopedic Association) के तत्वावधान में एक विशाल निःशुल्क बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) जांच एवं हड्डी स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में पहुंचे आम नागरिकों, बुजुर्गों और महिलाओं ने अपनी हड्डियों की सेहत की जांच कराई और देश के जाने-माने हड्डी रोग विशेषज्ञों (Orthopedic Specialists) से परामर्श प्राप्त किया।
शिविर की पृष्ठभूमि और आयोजन का मुख्य उद्देश्य
हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी बीमारियां आज के समय में एक मूक महामारी (Silent Epidemic) का रूप लेती जा रही हैं। अधिकांश लोगों को तब तक यह पता नहीं चलता कि उनकी हड्डियां कमजोर हो रही हैं, जब तक कि कोई मामूली चोट लगने पर फ्रैक्चर नहीं हो जाता।
जागरूकता का अभाव: बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते हड्डियों की कमजोरी (Bone Mineral Density में कमी) का पता चल जाए, तो सही खानपान और जीवनशैली में बदलाव करके बड़े जोखिमों से बचा जा सकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस विशेष स्वास्थ्य शिविर की रूपरेखा तैयार की गई थी।
समाज के हर वर्ग तक पहुंच: इस निःशुल्क शिविर का मुख्य लक्ष्य समाज के उन तबके के लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना था, जो महंगे अस्पतालों में जाकर अपनी बोन डेंसिटी की जांच कराने में असमर्थ हैं। शिविर में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का बिना किसी शुल्क के बीएमडी परीक्षण किया गया।
विशेषज्ञों की चर्चा: हड्डियों के स्वास्थ्य का महत्व और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा
शिविर के दौरान आयोजित संगोष्ठी और विचार-गोष्ठी में उपस्थित देश और राज्य के प्रतिष्ठित ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं विशेषज्ञों ने हड्डियों के स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
हड्डियों को मजबूत रखने की आवश्यकता: विशेषज्ञों ने बताया किशोरावस्था से लेकर 30 वर्ष की आयु तक हड्डियों का घनत्व (Bone Mass) सबसे मजबूत होता है, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे हड्डियों का कमजोर होना स्वाभाविक रूप से शुरू हो जाता है। महिलाओं में मेनोपॉज (Menopause) के बाद यह प्रक्रिया और भी तीव्र हो जाती है, जिससे वे ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार जल्दी बनती हैं।
कैल्शियम और विटामिन-डी की भूमिका: विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि हमारे शरीर में कैल्शियम और विटामिन-डी (Vitamin D) का संतुलन हड्डियों को मजबूत रखने के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है। धूप की कमी और जंक फूड के अत्यधिक सेवन से आज के युवाओं में भी कम उम्र में जोड़ों में दर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं।
नियमित बीएमडी जांच की सलाह: डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) टेस्ट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए हड्डियों के घनत्व और मजबूती का सटीक आकलन किया जाता है। 40 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर यह जांच अवश्य करानी चाहिए।
शिविर में मिली भारी भीड़ और मरीजों की सहूलियतें
इस निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर को लेकर लोगों में गजब का उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही शिविर स्थल पर लोगों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं।
निःशुल्क जांच और परामर्श: शिविर में अत्याधुनिक मशीनों द्वारा सैकड़ों लोगों का बीएमडी टेस्ट किया गया। रिपोर्ट आने के तुरंत बाद विशेषज्ञों ने मरीजों को उनके स्वास्थ्य के अनुकूल खानपान, व्यायाम और आवश्यक दवाइयों की सलाह दी।
योग और फिजियोथेरेपी का महत्व: शिविर में आए चिकित्सकों ने लोगों को यह भी बताया कि नियमित रूप से योग, हल्का व्यायाम, वॉकिंग और शारीरिक गतिविधियां करने से हड्डियों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जोड़ों का लचीलापन बना रहता है।
बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन और इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन द्वारा आयोजित यह निःशुल्क बीएमडी जांच एवं हड्डी स्वास्थ्य जागरूकता शिविर मील का पत्थर साबित हुआ है। इस तरह के आयोजन न केवल लोगों में स्वास्थ्य के प्रति चेतना जगाते हैं, बल्कि समाज के जरूरतमंदों को उच्च कोटि की चिकित्सीय सलाह भी सुलभ कराते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के इन सुझावों और बीएमडी जांच के महत्व को समझकर यदि आम नागरिक अपनी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव लाएं, तो निश्चित रूप से स्वस्थ और मजबूत हड्डियों के साथ एक बेहतर जीवन जिया जा सकता है।