देवघर की ओर बढ़े कांवरियों के जत्थे, भक्ति और उमंग से सराबोर हुआ पूरा इलाका
बेगूसराय/सुल्तानगंज (निज संवाददाता): सावन की रिमझिम फुहारों के बीच इन दिनों समूचा बिहार 'बोल बम' की गूंज से सराबोर है। इसी पावन कड़ी में गुरुवार को बेगूसराय से एक बेहद आकर्षक और भव्य दृश्य देखने को मिला, जब कांवरियों का एक विशेष जत्था अपने विशाल 'कांवर रथ' के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की कठिन यात्रा के लिए रवाना हुआ। यह कांवर रथ न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना, बल्कि इसे देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बेगूसराय के विभिन्न इलाकों से एकत्र हुए सैकड़ों शिवभक्तों ने पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे होकर महादेव के जयघोष के साथ सुल्तानगंज की ओर प्रस्थान किया, जहां से वे उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर देवघर पहुंचेंगे।
कांवर रथ: आधुनिकता और परंपरा का अद्भुत संगम
इस वर्ष बेगूसराय से निकली कांवर यात्रा में सबसे बड़ा आकर्षण 'कांवर रथ' है। यह रथ श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति और उनकी रचनात्मकता का जीवंत प्रमाण है:
भव्य सजावट: कांवर रथ को आकर्षक रूप से फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया है। रथ के मध्य में महादेव की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जो राहगीरों को अपनी ओर खींच रही है।
सुविधाओं से लैस: इस रथ में न केवल कांवरियों के लिए आराम की व्यवस्था है, बल्कि ध्वनि विस्तारक यंत्र (स्पीकर्स) के माध्यम से लगातार शिव भजनों और कांवड़ गीतों का प्रसारण किया जा रहा है। कांवरिया जत्था इस रथ को खींचते हुए आगे बढ़ रहा है, जो इसे एक अनूठा और प्रेरणादायक स्वरूप प्रदान करता है।
भक्ति भाव के साथ प्रस्थान: सुबह से ही उमड़ी भीड़
गुरुवार की सुबह से ही बेगूसराय के मुख्य मार्गों पर कांवरियों का हुजूम जुटना शुरू हो गया था। केसरिया वस्त्र धारण किए हुए, गले में रुद्राक्ष की माला पहने और माथे पर त्रिपुंड लगाए शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था:
मंत्रोच्चार से गुंजायमान माहौल: प्रस्थान के समय पूरे इलाके में शंख ध्वनि, डमरू और हर-हर महादेव के जयकारों से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया। स्थानीय लोगों ने कांवरियों पर फूल बरसाकर और उनके लिए पेयजल-शरबत की व्यवस्था कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
अनुशासित जत्था: 25 से अधिक कांवरियों का यह जत्था पूरी तरह अनुशासित होकर एक लय में आगे बढ़ रहा है। जत्थे के सदस्यों ने बताया कि वे इस यात्रा को सफल बनाने के लिए कई दिनों से मानसिक और शारीरिक रूप से तैयारी कर रहे थे।
सुल्तानगंज की ओर प्रस्थान और जलभरी का संकल्प
बेगूसराय से निकलने के बाद, कांवरियों का यह जत्था सुल्तानगंज के लिए रवाना हो चुका है। उनका मार्ग और संकल्प इस प्रकार है:
उत्तरवाहिनी गंगा का महत्व: सुल्तानगंज पहुंचकर, ये कांवरिये सबसे पहले उत्तरवाहिनी गंगा में डुबकी लगाएंगे। वहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद वे कांवर में पवित्र जल भरेंगे।
105 किलोमीटर की पदयात्रा: सुल्तानगंज से देवघर तक की लगभग 105 किलोमीटर की दूरी को ये शिवभक्त पैदल ही तय करेंगे। वे दुर्गम पहाड़ी रास्तों, घने जंगलों और विभिन्न पड़ावों से होते हुए देवघर पहुंचेंगे, जहां बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर अपनी मन्नत पूरी करेंगे।
स्थानीय जनता और प्रशासनिक सक्रियता
कांवरियों के इस जत्थे के प्रस्थान के दौरान स्थानीय लोगों का सहयोग सराहनीय रहा:
जनसेवा का भाव: रास्ते में पड़ने वाले गांवों में स्थानीय नागरिकों द्वारा कांवरियों के पैर धोने, उन्हें फल-जल देने और उनके आराम के लिए शिविर लगाने की व्यवस्था की गई है। यह एक ऐसी परंपरा है जो बिहार की माटी में निहित अतिथि देवो भव: की भावना को दर्शाती है।
प्रशासनिक सतर्कता: कांवरियों की सुरक्षा और सड़कों पर यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन भी सतर्क है। बेगूसराय से सुल्तानगंज तक के रूट पर सुरक्षा बल की तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
कांवरियों की जुबानी: आस्था के आगे थकान कुछ नहीं
जत्थे में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि उनका एकमात्र लक्ष्य बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करना है:
कठिन मार्ग का हौसला: जत्थे के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, "शिव की भक्ति में जो आनंद है, वह दुनिया की किसी सुख-सुविधा में नहीं। पैरों में छाले पड़ना या शरीर में थकान होना, बाबा की कृपा के आगे सब गौण हो जाता है।"
युवाओं में उत्साह: यात्रा में युवाओं की भारी संख्या यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक परंपराओं से आज भी उतनी ही गहराई से जुड़ी हुई है।
बेगूसराय से निकला यह कांवर रथ महज एक वाहन नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था, श्रद्धा और अटूट विश्वास का प्रतीक है। जिस तरह से पूरा जत्था भक्ति और उमंग के साथ सुल्तानगंज की ओर बढ़ा है, वह न केवल एक धार्मिक यात्रा है बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और अनुशासन का एक अनूठा संदेश भी है। श्रावणी मेला के इस पावन पर्व पर, कांवरियों का यह दृढ़ संकल्प हर किसी को प्रेरित करता है कि यदि मन में अटूट विश्वास हो, तो कोई भी दूरी और कोई भी कठिनाई बड़ी नहीं होती। भोलेनाथ इन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करें, यही प्रार्थना करते हुए पूरा इलाका अब देवघर की ओर टकटकी लगाए हुए है।