परीक्षा संचालन में भारी लापरवाही; समय पर नहीं पहुंचे शिक्षक, विलंब से पहुंचने पर मचा बवाल; प्राचार्य ने कहा— 'आगे से बरती जाएगी सख्त सख्ती, बख्शा नहीं जाएगा कोई दोषी'

भागलपुर, विशेष संवाददाता: शिक्षा के मंदिरों में अनुशासन और समयबद्धता की धज्जियां किस तरह उड़ाई जाती हैं, इसकी एक बानगी हाल ही में सिल्क सिटी भागलपुर के एक शैक्षणिक संस्थान में देखने को मिली है। परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए निर्धारित समय पर शिक्षकों और वीक्षकों के केंद्र पर नहीं पहुंचने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। परीक्षा के दिन परीक्षा हॉल में शिक्षकों के समय से न मिलने के कारण परीक्षार्थियों में भारी अफरा-तफरी मच गई और बच्चों का भविष्य दांव पर लगता नजर आया। जब इस बड़ी लापरवाही की शिकायत संस्थान के प्राचार्य (Principal) तक पहुंची, तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया। प्राचार्य ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आगे से ऐसी चूक करने वालों पर कड़ी कार्रवाई तय है।

क्या था पूरा मामला? परीक्षा के दिन समय पर नदारद रहे शिक्षक

प्राप्त विवरण के अनुसार, संस्थान में एक महत्वपूर्ण परीक्षा का आयोजन किया गया था, जिसके लिए विश्वविद्यालय या बोर्ड के नियमों के मुताबिक सभी तैयारियां पहले से पूरी कर ली गई थीं:

तय समय पर नहीं पहुंचे वीक्षक और शिक्षक: परीक्षा शुरू होने के निर्धारित समय से काफी देर बीत जाने के बावजूद कई परीक्षा कक्षों में प्रतिनियुक्त शिक्षक और वीक्षक अपने केंद्रों पर उपस्थित नहीं हो पाए। परीक्षार्थी अपनी-अपनी सीटों पर प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिकाओं का इंतजार करते रहे, लेकिन कक्षों में शिक्षकों के न होने से असमंजस की स्थिति बन गई।

छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश: परीक्षा में विलंब होने की भनक जब बाहर खड़े अभिभावकों को लगी, तो उन्होंने परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। छात्रों का कहना था कि यदि परीक्षा समय पर शुरू नहीं होगी, तो उनके मानसिक तनाव पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उनका पेपर छूटने का भी डर सताने लगेगा।

प्राचार्य की सख्त चेतावनी: 'आगे से नहीं चलेगी ऐसी लापरवाही'

जब यह मामला मीडिया और कॉलेज प्रशासन के संज्ञान में आया, तो कॉलेज के प्राचार्य ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को संभाला और विलंब से पहुंचने वाले शिक्षकों से स्पष्टीकरण तलब किया:

कार्रवाई का अल्टीमेटम: मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्राचार्य ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि परीक्षा कार्य एक राष्ट्रीय और शैक्षणिक दायित्व है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोताही अक्षम्य है। प्राचार्य ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि "आगे से इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोहराई गई, तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।"

स्पष्टीकरण की मांग: विलंब से पहुंचने वाले और अपनी ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाले शिक्षकों से लिखित जवाब मांगा गया है कि आखिर किस परिस्थिति के कारण वे समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजने की बात कही गई है।

प्रशासनिक व्यवस्था और परीक्षा की शुचिता पर सवाल

इस पूरी घटना ने एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:

लापरवाह संस्कृति: जानकारों का मानना है कि सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में कई बार शिक्षक अपनी ड्यूटी को लेकर लापरवाह रवैया अपनाते हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर मासूम विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है।

समय प्रबंधन की जरूरत: परीक्षा जैसे संवेदनशील आयोजनों के लिए केवल छात्रों को ही समय का पाबंद रहने की सीख दी जाती है, लेकिन यदि शिक्षक और व्यवस्था से जुड़े लोग ही समय पर न पहुंचें, तो पूरी व्यवस्था पर से जनता का विश्वास उठने लगता है।

भागलपुर के इस शिक्षण संस्थान में परीक्षा के दौरान शिक्षकों के समय पर न पहुंचने और इसके बाद प्राचार्य द्वारा दी गई सख्त चेतावनी का यह पूरा घटनाक्रम यह सिखाता है कि व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए कड़े फैसलों की जरूरत होती है। प्राचार्य के इस सख्त रुख के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों को लेकर अधिक सजग और सतर्क रहेंगे, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ दोबारा न हो सके।