ऐतिहासिक लाजपत पार्क में कारगिल विजय दिवस पर भव्य श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन; कर्नल संजय कुमार ने शहीदों के अदम्य साहस को किया नमन, पूर्व सैनिकों और नागरिकों ने ली राष्ट्र रक्षा की शपथ
भागलपुर, विशेष संवाददाता: भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अप्रतिम बलिदान के प्रतीक ऐतिहासिक 'कारगिल विजय दिवस' (Kargil Vijay Diwas) के अवसर पर सिल्क सिटी भागलपुर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल लाजपत पार्क में एक भव्य और गरिमामयी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले अमर शहीदों की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में सेना के सेवारत व सेवानिवृत्त अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के गणमान्य नागरिकों ने भारी संख्या में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कर्नल संजय कुमार ने कारगिल के वीर सपूतों के साहस और उनके सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरा लाजपत पार्क 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के नारों से गूंज उठा, जिससे संपूर्ण वातावरण देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया।
कारगिल विजय दिवस और लाजपत पार्क के इस आयोजन की पृष्ठभूमि
प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को देश उन वीर जवानों के शौर्य को याद करता है जिन्होंने साल 1999 में कारगिल की बर्फीली चोटियों पर पाकिस्तान के दांत खट्टे करते हुए तिरंगा फहराया था। इस युद्ध में भारतीय सेना के सैकड़ों जवानों ने अपनी शहादत दी थी।
लाजपत पार्क में उमड़ी भीड़: भागलपुर के ऐतिहासिक लाजपत पार्क में आयोजित इस मुख्य समारोह का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को देश के प्रति उनके कर्तव्यों से अवगत कराना और शहीदों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना था।
शहीद वेदी पर पुष्पचक्र अर्पण: कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि कर्नल संजय कुमार और अन्य पूर्व सैनिकों द्वारा शहीद वेदी पर पुष्पचक्र (Wreath) अर्पित कर और दो मिनट का मौن रखकर की गई। हवा में तैरती मोमबत्तियों की रोशनी और देशभक्ति के तराने ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
कर्नल संजय कुमार का प्रेरणादायी संबोधन
कार्यक्रम को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए कर्नल संजय कुमार ने कारगिल युद्ध के उन कठिन दिनों और भारतीय सेना के रणनीतिक कौशल को बेहद करीब से बयां किया।
माइनस डिग्री तापमान और विकट परिस्थितियां: कर्नल संजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि कारगिल की लड़ाई किसी सामान्य युद्ध की तरह नहीं थी। दुश्मनों ने दुर्गम और ऊंची पहाड़ियों पर मोर्चेबंदी कर रखी थी, जहां सांस लेना तक दूभर था। लेकिन हमारे सैनिकों ने अपनी जान की परवाह किए बिना जिस अदम्य साहस का परिचय दिया, उसका कोई सानी नहीं है। टाइगर हिल और तोलोलिंग की चोटियों पर तिरंगा फहराना भारतीय सेना के इतिहास का सबसे स्वर्णिम अध्याय है।
शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा: उन्होंने कहा कि आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं और सुरक्षित हैं, तो इसका श्रेय केवल और केवल उन वीर जवानों को जाता है जिन्होंने अपनी जवानी देश के नाम कुर्बान कर दी। हमें उनके परिवारों का सम्मान करना चाहिए और उनके सपनों का भारत बनाना चाहिए।
पूर्व सैनिकों का संकल्प: राष्ट्र की सुरक्षा और एकता सर्वोपरि
इस कार्यक्रम में भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों से आए दर्जनों पूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पूर्व सैनिकों ने एक स्वर में देश की संप्रभुता, अखंडता और आंतरिक सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
राष्ट्र की एकता के लिए एकजुटता: पूर्व सैनिकों ने कहा कि भले ही वे अब वर्दी में नहीं हैं, लेकिन उनके दिल में देश सेवा का जज्बा आज भी उतना ही जिंदा है जितना सीमा पर तैनाती के दौरान था। यदि देश को कभी भी उनकी जरूरत पड़ी, तो वे सबसे आगे खड़े मिलेंगे।
युवाओं को संदेश: पूर्व सैनिकों ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया की दुनिया से बाहर निकलकर अपने इतिहास को समझें और देश विरोधी ताकतों के खिलाफ वैचारिक रूप से मजबूत बनें। राष्ट्र की एकता और अखंडता से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और देशभक्ति के तराने
समारोह के दौरान शहर के युवा कलाकारों और स्कूली बच्चों ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति गीत और प्रस्तुतियां दीं। 'ऐ मेरे वतन के लोगों', 'संदेशे आते हैं' जैसे गीतों ने उपस्थित जनसमूह की रोंगटे खड़े कर दिए। बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने कारगिल के शहीदों की गाथा को जीवंत कर दिया।
भागलपुर के लाजपत पार्क में आयोजित कारगिल विजय दिवस का यह मुख्य समारोह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि सिल्क सिटी के नागरिकों द्वारा शहीदों को दी गई सच्ची और भावभीनी श्रद्धांजलि थी। कर्नल संजय कुमार के ओजस्वी विचार और पूर्व सैनिकों द्वारा लिए गए राष्ट्र रक्षा के संकल्प ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। यह कार्यक्रम एक बार फिर यह संदेश दे गया कि भागलपुर के लोग देश के वीर सपूतों के बलिदान को कभी नहीं भूलेंगे और जरूरत पड़ने पर हर नागरिक देश के लिए समर्पित रहने को तैयार है।