धमदाहा में 25 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के 15 अमर शहीदों की स्मृति में भव्य राजकीय समारोह आयोजित मंत्री लेशी सिंह ने किया उद्घाटन और अर्पित की श्रद्धांजलि

 बिहार के पूर्णिया जिले के ऐतिहासिक धमदाहा अनुमंडल क्षेत्र में 25 अगस्त 1942 को 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) के दौरान अंग्रेजी हुकूमत की क्रूर गोलियों का सामना करते हुए मातृभूमि के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले 15 वीर सपूतों की शहादत की याद में मंगलवार को एक भव्य और गरिमामयी राजकीय समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार की माननीय मंत्री लेशी सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मंत्री लेशी सिंह, प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और हजारों स्थानीय नागरिकों ने शहीद स्मारक पर पहुंचकर अमर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने धमदाहा की इस पावन माटी के स्वतंत्रता सेनानियों के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि इन शूरवीरों का त्याग देश की आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा एक अमूल्य प्रेरणास्रोत रहेगा।

25 अगस्त 1942: धमदाहा का वह स्वर्णिम और खूनी इतिहास

भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में 25 अगस्त 1942 की तिथि धमदाहा के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दिन है, जब इस क्षेत्र के जांबाज सेनानियों ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी।

अंग्रेजी हुकूमत का दमन और गोलियों की बौछार: वर्ष 1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के "करो या मरो" (Do or Die) के आह्वान पर जब पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा था, तब धमदाहा के निहत्थे और देशभक्त सपूतों ने भी ब्रिटिश शासन की क्रूर नीतियों के खिलाफ खुलकर हुंकार भरी थी। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे इन आंदोलनकारियों पर अंग्रेजी हुकूमत ने बेरहमी से अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं।

15 वीर सपूतों की महान शहादत: इस खूनी संघर्ष में धमदाहा के 15 अमर सपूतों ने मातृभूमि की आज़ादी के लिए अपने सीने पर गोलियां खाईं और हंसते-हंसते शहीद हो गए। उनका यह बलिदान उस दौर में स्वतंत्रता संग्राम को एक अभूतपूर्व गति प्रदान कर रहा था।

राजकीय समारोह का आयोजन और मंत्री लेशी सिंह द्वारा उद्घाटन

इतिहास के उन अमर नायकों के बलिदान को चिरस्थाई बनाने और उनके परिजनों को मुख्यधारा में उचित सम्मान देने के लिए धमदाहा में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 25 अगस्त को राजकीय समारोह का आयोजन किया गया।

मंत्री लेशी सिंह द्वारा उद्घाटन: कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं बिहार सरकार की मंत्री लेशी सिंह ने समारोह का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने शहीद स्मारक पर पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किया और शहीदों को नमन किया।

शहीदों के परिजनों का सम्मान: इस गरिमामयी समारोह के दौरान 1942 के उन 15 अमर शहीदों के वंशजों और परिजनों को मंच पर ससम्मान आमंत्रित किया गया। मंत्री लेशी सिंह और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा परिजनों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर अलंकृत किया गया। इस दौरान पूरा पंडाल देशभक्ति के नारों से गूंज उठा।

 वक्ताओं के विचार: बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता

समारोह के दौरान अपने संबोधन में मंत्री लेशी सिंह और अन्य गणमान्य वक्ताओं ने शहीदों के महान त्याग पर विस्तार से प्रकाश डाला।

स्वतंत्रता का मूल्य: मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि आज हम और आप जिस स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और खुली हवा में सांस ले रहे हैं, वह इन्हीं 15 अमर शहीदों और देश के अन्य महान स्वतंत्रता सेनानियों के खून-पसीने की बदौलत संभव हो सका है। यदि वे उस कठिन दौर में ब्रिटिश गोलियों के सामने डटकर खड़े न होते, तो आज का यह सुनहरा दिन देखना संभव नहीं था।

इतिहास और संस्कृति का संरक्षण: वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी को अपने स्थानीय इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों से रूबरू कराना बेहद जरूरी है, ताकि उनमें देशप्रेम की भावना हमेशा प्रगाढ़ बनी रहे।

देशभक्ति का माहौल और जनता की भारी भागीदारी

इस राजकीय समारोह ने पूरे धमदाहा क्षेत्र में देशभक्ति की एक नई और ऊर्जावान लहर पैदा कर दी।

विशाल जनसमूह की उपस्थिति: इस कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भारी संख्या में आम नागरिकों ने शिरकत की। सभी ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और शहीदों के सम्मान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

शहीद स्मारकों का विकास: इस अवसर पर यह संकल्प भी दोहराया गया कि धमदाहा के इन शहीदों की यादों को संजोए रखने के लिए क्षेत्र के विकास और स्मारकों के सौंदर्यीकरण का कार्य निरंतर जारी रहेगा।

धमदाहा में 25 अगस्त 1942 के 15 अमर शहीदों की स्मृति में आयोजित यह राजकीय समारोह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि एक संवेदनशील राष्ट्र अपने सच्चे नायकों और उनके परिवारों के बलिदान को कभी नहीं भूलता। मंत्री लेशी सिंह की उपस्थिति और परिजनों के सम्मान से यह कार्यक्रम ऐतिहासिक बन गया, जो हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रसेवा की अलख जगाता रहेगा।