पीरपैंती के मधुबन दियारा में छठे श्रावणी दिवस पर भव्य संतमत सत्संग का आयोजन; डॉ. शिवनाथ बाबा के नेतृत्व में उमड़े श्रद्धालु, स्वामी सौदागर बाबा के प्रवचनों से गूंजा गंगा का तटीय इलाका
भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड अंतर्गत गंगा के कछार में बसे रमणीय और सुदूरवर्ती क्षेत्र मधुबन दियारा में सावन महीने के पवित्र अवसर पर आध्यात्मिक उल्लास का अनूठा नजारा देखने को मिला। श्रावण मास के छठे पावन दिवस पर यहाँ एक दिवसीय भव्य संतमत सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के दियारा क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस पूरे आध्यात्मिक अनुष्ठान का सफल नेतृत्व और संचालन प्रख्यात संत डॉ. शिवनाथ बाबा द्वारा किया गया। गंगा की कलकल बहती धाराओं के बीच गूंजते गुरु महाराज के जयकारों और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा दियारा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
गुरु वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह प्रातःकालीन बेला में संतमत की परंपरा के अनुसार पूरी पवित्रता और अनुशासन के साथ हुई:
तस्वीर पर माल्यार्पण: सत्संग स्थल पर बनाए गए मुख्य मंच पर गुरु महाराज की भव्य और अलंकृत तस्वीर स्थापित की गई थी। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. शिवनाथ बाबा, स्वामी सौदागर बाबा और अन्य वरिष्ठ संतों द्वारा संयुक्त रूप से तस्वीर पर पुष्पमाला अर्पित कर और दीप प्रज्ज्वलित कर की गई।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़: दियारा क्षेत्र की भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएँ, पुरुष और युवा सिर पर गंगा जल लेकर और हाथों में फूल-मालाएँ थामे सत्संग स्थल पर पहुँचे। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर गुरु महाराज के चरणों में नमन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
संतों के ओजस्वी प्रवचन: स्वामी सौदागर बाबा की अमृतवाणी
संतमत सत्संग का सबसे मुख्य आकर्षण संत-महात्माओं के दिव्य प्रवचन रहे, जिन्हें सुनने के लिए दियारा के कोने-कोने से लोग जुटे थे:
स्वामी सौदागर बाबा के विचार: मुख्य प्रवचनकर्ता के रूप में पधारे स्वामी सौदागर बाबा ने अपने ओजस्वी और मार्मिक वचनों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि सावन का महीना केवल भौतिक रूप से भगवान शिव की आराधना का समय नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के विकारों, अहंकार और बुराइयों को त्यागकर आंतरिक शुद्धि करने का महान अवसर है।
मानवता और सदाचार का संदेश: स्वामी जी ने आगे कहा कि महर्षि मेही परमहंस जी महाराज द्वारा बताए गए संतमत के मार्ग पर चलकर ही मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। शाकाहार, सदाचार, नशापान से मुक्ति और नियमित ध्यान-भजन ही मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने युवाओं को अपने संस्कारों से जुड़े रहने और समाज में प्रेम तथा भाईचारा फैलाने का आह्वान किया।
डॉ. शिवनाथ बाबा का संबोधन: कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे डॉ. शिवनाथ बाबा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि दियारा जैसे दूरदराज और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि संतमत का संदेश हर घर तक पहुँचना चाहिए ताकि वैमनस्य मिट सके और समाज में शांति स्थापित हो सके।
श्रावणी मेला और दियारा की आस्तिकता
सावन के महीने में पीरपैंती और आसपास के गंगा घाटों पर कांवरियों और शिव भक्तों का तांता लगा रहता है, ऐसे में मधुबन दियारा में हुआ यह सत्संग क्षेत्र के लिए एक विशेष आध्यात्मिक उपलब्धि रहा:
भक्ति और प्रकृति का संगम: एक तरफ गंगा की गोद में बसा शांत और हरा-भरा मधुबन दियारा, और दूसरी तरफ संतों की वाणी—इस अद्भुत संयोजन ने उपस्थित सभी लोगों को आंतरिक शांति प्रदान की।
सामूहिक महाप्रसाद वितरण: सत्संग के समापन के बाद आचार्य और संतों की देखरेख में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान स्थानीय युवाओं और सेवाभावी नागरिकों ने पूरी व्यवस्था को संभालने में सराहनीय सहयोग दिया।
पीरपैंती के मधुबन दियारा में आयोजित छठे श्रावणी दिवस का यह संतमत सत्संग केवल एक धार्मिक अनुष्ठान बनकर नहीं रह गया, बल्कि इसने ग्रामीण अंचल के लोगों को एक मंच पर लाकर प्रेम, सौहार्द और नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया। डॉ. शिवनाथ बाबा के कुशल नेतृत्व और स्वामी सौदागर बाबा के सानिध्य में संपन्न हुआ यह आयोजन क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में प्रेरणा बनकर जीवित रहेगा।