सामाजिक संस्था 'सफाली' के स्थापना दिवस पर भव्य समारोह का आयोजन; संस्कृति, सम्मान और वैचारिक मंथन का दिखा अनूठा संगम, प्रो. फारूक अली की अध्यक्षता और डॉ. केसी मिश्रा के मुख्य आतिथ्य में गूंजे समाजसेवा के संदेश

भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक शहर भागलपुर में सामाजिक सरोकारों से जुड़ी प्रतिष्ठित संस्था 'सफाली' (Safali) का स्थापना दिवस समारोह बेहद हर्षोल्लास और गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, प्रबुद्ध विचार गोष्ठी और समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट जनों के सम्मान समारोह का एक अद्भुत त्रिवेणी संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद् एवं वक्ता प्रो. (डॉ.) फारूक अली ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात चिकित्सक एवं शिक्षाविद् डॉ. केसी मिश्रा ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ाई। शहर के बुद्धिजीवियों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

दीप प्रज्ज्वलन और संस्था के सफर की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. केसी मिश्रा, अध्यक्ष प्रो. फारूक अली और संस्था के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

सफाली का वैचारिक उद्देश्य: इस अवसर पर संस्था के उद्देश्यों और अब तक की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि 'सफाली' केवल एक संगठन नहीं है, बल्कि यह समाज के वंचित और जरूरतमंद तबके की आवाज बनने का एक सशक्त माध्यम है। संस्था ने स्थापना काल से ही शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

अतिथियों का स्वागत: संस्था के सदस्यों ने पारंपरिक तरीके से अंग वस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर मुख्य अतिथि डॉ. केसी मिश्रा और अध्यक्ष प्रो. फारूक अली का स्वागत किया।

विचार गोष्ठी: "बदलता समाज और हमारी नैतिक जिम्मेदारियां"

स्थापना दिवस के मुख्य आकर्षणों में से एक गंभीर विचार गोष्ठी रही, जिसका केंद्रीय विषय समाज में बढ़ती संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों का ह्रास और सामूहिक जिम्मेदारियां था:

डॉ. केसी मिश्रा के विचार: मुख्य अतिथि डॉ. केसी मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज की तरक्की का पैमाना केवल आर्थिक विकास नहीं हो सकता, बल्कि उस समाज में मानवीय संवेदनाएं और नैतिकता कितनी जीवित हैं, यह अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपनी संस्कृति और सामाजिक दायित्वों को न भूलें।

प्रो. फारूक अली का अध्यक्षीय उद्बोधन: कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. (डॉ.) फारूक अली ने अपने ओजस्वी भाषण में कहा कि भागलपुर की धरती हमेशा से ज्ञान, कला और भाईचारे की प्रतीक रही है। उन्होंने 'सफाली' संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जब तक समाज के प्रबुद्ध वर्ग आगे आकर जमीनी स्तर पर काम नहीं करेंगे, तब तक वास्तविक बदलाव आना असंभव है। उन्होंने शिक्षा के प्रसार को हर सामाजिक समस्या का सबसे बड़ा समाधान बताया।

सम्मान समारोह: समाजसेवियों और प्रतिभाओं का अभिनंदन

कार्यक्रम के अगले चरण में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवियों, कलाकारों, शिक्षकों और मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया:

समान और प्रशस्ति पत्र: शिक्षा, चिकित्सा, कला और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले शख्सियतों को 'सफाली गौरव सम्मान' से नवाजा गया। प्रशस्ति पत्र और अंग वस्त्र पाकर सम्मानित होने वाले चेहरों पर संतोष और आगे भी बेहतर करने का उत्साह साफ झलक रहा था।

प्रोत्साहन: संस्था ने निर्णय लिया है कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से जमीनी स्तर पर चुपचाप सेवा कार्य करने वाले गुमनाम नायकों को मंच प्रदान किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके।

सांस्कृतिक कार्यक्रम: लोक संस्कृति और कला की फुहार

विचार गोष्ठी और सम्मान समारोह के उपरांत एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने पूरे माहौल को ऊर्जावान और आनंदमय बना दिया:

गीत-संगीत और नृत्य: स्थानीय कलाकारों और बच्चों ने पारंपरिक लोकगीतों, शास्त्रीय नृत्यों और देशभक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। विशेषकर अंगिका लोक संस्कृति की झलक पेश करने वाले कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

सामूहिक सहभागिता: कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी गणमान्य लोगों, कलाकारों और संस्था के सदस्यों ने एक साथ मिलकर 'सफाली' के आगामी सेवा कार्यों का संकल्प लिया और संस्था को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

भागलपुर में आयोजित 'सफाली' संस्था का यह स्थापना दिवस समारोह केवल एक वार्षिकोत्सव मात्र नहीं था, बल्कि यह सामाजिक एकजुटता, वैचारिक मंथन और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति निष्ठा का एक जीवंत दस्तावेज बन गया। प्रो. फारूक अली के कुशल मार्गदर्शन और डॉ. केसी मिश्रा के प्रेरणादायी विचारों ने इस आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान की। यह कार्यक्रम आने वाले दिनों में भागलपुर के सामाजिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एक नए मील का पत्थर साबित होगा।