ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गृह विज्ञान विभाग में विश्व स्तनपान सप्ताह पर भव्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित: कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी ने कहा
दरभंगा: बिहार के प्रतिष्ठित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU - Lalit Narayan Mithila University) के प्रांगण में स्वास्थ्य, पोषण और जागरूकता से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक आयोजन संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गृह विज्ञान विभाग (Postgraduate Department of Home Science) के सभागार में 'विश्व स्तनपान सप्ताह' (World Breastfeeding Week) के विशेष अवसर पर एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता और विश्वविद्यालय की कुलसचिव (Registrar) डॉ. दिव्या रानी ने अपने मुख्य संबोधन में स्तनपान के महत्व को रेखांकित करते हुए बहुत ही महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि मां का दूध नवजात शिशु के समग्र विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) और सुदृढ़ भविष्य के लिए सबसे आवश्यक एवं अनिवार्य आहार है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज की माताओं और युवा पीढ़ी के बीच स्तनपान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना तथा इसके वैज्ञानिक और स्वास्थ्यगत लाभों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता फैलाना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ और स्वागत समारोह
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर और पारंपरिक तरीके से अतिथियों के स्वागत के साथ की गई। स्नातकोत्तर गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकों और अन्य गणमान्य शिक्षकों ने कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी और अन्य विशेष अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर किया।
गृह विज्ञान विभाग की सक्रियता: विभाग द्वारा इस तरह के सामाजिक रूप से उपयोगी कार्यक्रमों का आयोजन लगातार किया जाता रहा है। वर्तमान कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल अकादमिक चर्चा करना था, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाना था।
छात्राओं और शोधार्थियों की सहभागिता: कार्यक्रम में गृह विज्ञान विभाग की छात्राओं, स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने स्तनपान के महत्व को दर्शाने वाले विभिन्न प्रकार के चार्ट, पोस्टर और लघु नाटिकाओं के माध्यम से अपने विचारों को प्रस्तुत किया।
कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी का मुख्य उद्बोधन: "मां का दूध नवजात के लिए सर्वोच्च पोषण"
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी ने कहा कि मातृत्व का अहसास दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास है और शिशु के जन्म के तुरंत बाद मां का दूध उसके जीवन की रक्षा करने वाला पहला टीका (First Vaccine) साबित होता है।
शिशु के विकास के लिए अनिवार्य: डॉ. दिव्या रानी ने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि जन्म के पहले घंटे के भीतर नवजात को मां का गाढ़ा पीला दूध (कोलेस्ट्रम) अवश्य पिलाया जाना चाहिए। यह दूध बच्चे की आंतों को मजबूत करता है और उसे शुरुआती संक्रमणों से लड़ने की असीम शक्ति प्रदान करता है।
शारीरिक और मानसिक सुदृढ़ता: उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को शुरुआती महीनों में केवल और केवल मां का दूध मिलता है, उनका बौद्धिक विकास (Mental Development) और शारीरिक स्वास्थ्य अन्य बच्चों की तुलना में कहीं अधिक बेहतर होता है। मां के दूध में वे सभी पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं, जिनकी एक नवजात को आवश्यकता होती है।
महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव: कुलसचिव ने केवल शिशुओं तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि यह भी बताया कि स्तनपान कराने से माताओं के स्वास्थ्य पर भी बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे महिलाओं में स्तन कैंसर और गर्भाशय से जुड़े कई प्रकार के गंभीर रोगों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
विशेषज्ञों और वक्ताओं के विचार: भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य विशेषज्ञों, शिक्षकों और विभागाध्यक्षों ने भी अपने विचार साझा किए और समाज में व्याप्त कुछ रूढ़िवादी सोच व भ्रांतियों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
भ्रांतियों का खात्मा: वक्ताओं ने कहा कि आज भी कई ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में लोग बच्चे को जन्म के तुरंत बाद मां का पहला दूध (कोलेस्ट्रम) नहीं पिलाते हैं, बल्कि उसे फेंक देते हैं या उसकी जगह शहद, घुट्टी या अन्य बाहरी चीजें देते हैं, जो कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से पूरी तरह गलत और हानिकारक है।
जागरूकता अभियान की जरूरत: वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि गृह विज्ञान विभाग और विश्वविद्यालय से जुड़े छात्र-छात्रों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे गांवों और शहरी बस्तियों में जाकर महिलाओं को स्तनपान के वैज्ञानिक महत्व के प्रति जागरूक करें, ताकि कोई भी नवजात इस प्राकृतिक अधिकार से वंचित न रहे।
समापन और संकल्प समारोह
कार्यक्रम के अंत में गृह विज्ञान विभाग की ओर से एक सामूहिक संकल्प लिया गया कि विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्तनपान सप्ताह के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
पोषण और स्वास्थ्य का संदेश: विभाग के शिक्षकों ने सभी छात्र-छात्राओं को प्रेरित किया कि वे अपने परिवारों और समाज में इस संदेश के संवाहक बनें।
धन्यवाद ज्ञापन: कार्यक्रम का समापन विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। राष्ट्रगान के साथ इस महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक जागरूकता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गृह विज्ञान विभाग में आयोजित स्तनपान सप्ताह जागरूकता कार्यक्रम यह साबित करता है कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज की मूलभूत और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति भी पूरी तरह संवेदनशील हैं। कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी के मार्गदर्शन में हुआ यह आयोजन दरभंगा जिले और संपूर्ण मिथिला क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आया है, जो स्वस्थ समाज के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।