बिहार में आंगनबाड़ी केंद्रों के दिन बहुरेंगे: सरकार बनाएगी अपने खुद के सरकारी भवन, समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता का बड़ा ऐलान
पटना/मुजफ्फरपुर: बिहार के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नौनिहालों के प्रारंभिक विकास, पोषण और गर्भवती महिलाओं की देखभाल का केंद्र माने जाने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों (Anganwadi Centres) के बुनियादी ढांचे को लेकर राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम उठाया है। अब बिहार में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए किराए के कमरों या झोपड़ियों की विवशता जल्द ही खत्म होने जा रही है। राज्य की समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान यह घोषणा की है कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए चरणबद्ध तरीके से भव्य और आधुनिक सरकारी भवनों का निर्माण किया जाएगा।
इस योजना के तहत राज्य सरकार ने एक कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत हर वर्ष हजारों की संख्या में नए भवनों का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल से न केवल बच्चों को बेहतर और सुरक्षित माहौल मिलेगा, बल्कि महिला एवं बाल विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी जबरदस्त तेजी आएगी। आइए जानते हैं इस पूरी खबर के हर एक पहलू को विस्तार से।
वर्तमान स्थिति: केवल 30 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपने भवन
बिहार में महिला एवं बाल विकास निगम और समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्यभर में कुल लगभग 1.15 लाख (1,15,000) आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। ये केंद्र बच्चों की शुरुआती शिक्षा (Early Childhood Care and Education), टीकाकरण, पूरक पोषण आहार वितरण और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पंजीकरण का मुख्य केंद्र होते हैं।
लेकिन विडंबना यह रही है कि इनमें से अधिकांश केंद्र पिछले कई दशकों से अपनी खुद की छत के बिना चल रहे थे। समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक:
राज्य के कुल 1.15 लाख केंद्रों में से केवल 30 प्रतिशत केंद्रों के पास ही अपने स्थायी सरकारी भवन उपलब्ध हैं।
बाकी के लगभग 70 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्र या तो किराए के छोटे कमरों में, सामुदायिक भवनों (Community Halls) में, या फिर अत्यंत जर्जर और संकीर्ण स्थानों पर चलाने की मजबूरी बनी हुई है।
कई जगहों पर जगह के अभाव में बच्चों को बैठाने और उनके खेलने-कूदने की उचित व्यवस्था नहीं हो पाती है, जिससे पोषण और शिक्षा का मुख्य उद्देश्य प्रभावित होता है।
इस गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए ही समाज कल्याण विभाग ने अब खुद का पक्का ढांचा तैयार करने का बीड़ा उठाया है।
हर वर्ष 9,400 नए भवनों के निर्माण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
इस विकट समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए बिहार सरकार ने एक मजबूत रोडमैप तैयार किया है। समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि विभाग ने युद्धस्तर पर काम करने की योजना बनाई है।
लक्ष्य: राज्य में बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करने के लिए अब हर साल 9,400 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण किया जाएगा।
चरणबद्ध योजना: प्रति वर्ष तय किए गए इस बड़े लक्ष्य के तहत राज्य के सभी जिलों, प्रखंडों और पंचायतों में उन केंद्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जो वर्तमान में सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति में चल रहे हैं या किराए के मकानों में भारी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
समयबद्ध निगरानी: इन भवनों के निर्माण कार्य में पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन, स्थानीय इंजीनियरों और बाल विकास परियोजना अधिकारियों (CDPO) को सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि निर्माण कार्य तय सीमा के भीतर पूरे हो सकें।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे नए आंगनबाड़ी भवन
सरकार द्वारा बनाए जाने वाले ये नए आंगनबाड़ी भवन केवल ईंट-पत्थर की दीवारें नहीं होंगे, बल्कि इन्हें बच्चों के समग्र विकास और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इन भवनों की रूपरेखा में निम्नलिखित प्रमुख बातों का विशेष ध्यान रखा जाएगा:
बाल-अनुकूल डिजाइन (Child-Friendly Design): भवनों के अंदर दीवारों पर आकर्षक और शैक्षिक पेंटिंग (वाल पेंटिंग) की जाएगी ताकि बच्चे हंसते-खेलते अक्षर और अंक सीख सकें। कमरों में पर्याप्त रोशनी और हवा की उचित व्यवस्था होगी।
शौचालय और पेयजल की सुविधा: अब तक कई किराए के केंद्रों में शौचालय और शुद्ध पेयजल की बड़ी समस्या रहती थी। नए सरकारी भवनों में बच्चों और महिलाओं के लिए अलग से आधुनिक शौचालय और साफ-सुथरे पेयजल (चापाकल या सबमर्सिबल) की मु मु मुकम्मल व्यवस्था होगी।
रसोई घर (Kitchen): बच्चों के लिए पौष्टिक गर्म पका हुआ भोजन (Hot Cooked Meal) और पोषाहार तैयार करने के लिए एक अलग और चिमनीयुक्त स्वच्छ रसोई घर बनाया जाएगा।
खेलकूद और पठन-सामग्री के लिए जगह: केंद्रों पर बच्चों के बैठने के लिए ड्यूल्स/मैट के साथ-साथ उनके बौद्धिक विकास के लिए टॉयज, लर्निंग किट्स और खेलकूद की वस्तुएं रखने के लिए सुरक्षित स्टोर रूम की व्यवस्था भी होगी।
महिलाओं और बच्चों के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपनी स्थायी और सुविधายุक्त् इमारतें होंगी, तो इससे योजनाओं के क्रियान्वयन का स्तर पूरी तरह बदल जाएगा।
पोषण अभियान को मजबूती: कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार की जो योजनाएं हैं, वे सीधे तौर पर इन केंद्रों से जुड़ी हैं। पक्का भवन होने से राशन और सामग्री के सुरक्षित भंडारण में आसानी होगी।
गर्भवती महिलाओं को सुविधा: गोदभराई और अन्नप्राशन जैसे सामुदायिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए अब किसी अन्य स्थान या किराए के हॉल की तलाश नहीं करनी पड़ेगी। आंगनबाड़ी केंद्र खुद इन आयोजनों का मुख्य केंद्र बन जाएंगे।
महिला सशक्तिकरण: सेविकाओं और सहायिकाओं को भी अब मानद तौर पर बेहतर कार्य-वातावरण मिलेगा, जिससे वे और अधिक ऊर्जा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगी।
जमीनी स्तर पर प्रशासनिक चुनौतियां और समाधान
यद्यपि सरकार का यह निर्णय अत्यंत सराहनीय है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं, जिन्हें सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर पार करना होगा:
भूमि की उपलब्धता (Land Availability): कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में सरकारी जमीन का अभाव एक बड़ी समस्या रही है। इसके समाधान के लिए समाज कल्याण विभाग ने स्थानीय अंचल अधिकारियों (CO) और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना शुरू कर दिया है, ताकि यथाशीघ्र भूमि चिन्हित कर उसका म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) कराया जा सके।
गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control): अक्सर सरकारी भवनों के निर्माण में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती हैं। मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने पहले ही साफ कर दिया है कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
बिहार में समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता के नेतृत्व में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए स्थायी सरकारी भवनों के निर्माण का यह निर्णय राज्य की सामाजिक और शैक्षणिक नींव को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। जहाँ एक ओर केवल 30 प्रतिशत भवनों का होना एक चिंता का विषय था, वहीं हर साल 9,400 नए भवनों के निर्माण का लक्ष्य यह विश्वास दिलाता है कि आने वाले कुछ ही वर्षों में बिहार के लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्र अपनी खुद की भव्य छतों के नीचे नजर आएंगे। इस योजना के धरातल पर पूरी तरह उतरने से मुजफ्फरपुर सहित पूरे बिहार के ग्रामीण इलाकों के नौनिहालों का भविष्य और अधिक उज्जवल, सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक बन सकेगा।