गया कॉलेज शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ ने विभिन्न मांगों को लेकर प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन: सेवानिवृत्त कर्मियों के बकाये और आवास मरम्मत न होने पर मकान किराया भत्ता देने की प्रमुख मांग, प्रशासन को दी चेतावनी

गया: बिहार के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में शुमार गया कॉलेज (Gaya College, Gaya) परिसर में एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों के हक की आवाज गूंज उठी है। गया कॉलेज शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ (Non-Teaching Employees Association) ने अपनी लंबे समय से लंबित पड़ी विभिन्न न्यायसंगत और महत्वपूर्ण मांगों को लेकर कॉलेज के प्राचार्य (Principal) को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है। संघ के सदस्यों और पदाधिकारियों ने एकजुट होकर कॉलेज प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याओं को रखा और उनके त्वरित समाधान की मांग की। सौंपे गए इस ज्ञापन में सबसे प्रमुख और गंभीर मुद्दे सेवानिवृत्त (Retired) कर्मचारियों की सेवामुक्ति से जुड़े लाभों का भुगतान और कॉलेज परिसर में स्थित कर्मचारियों के जर्जर आवासों की मरम्मत न होने की स्थिति में मकान किराया भत्ता (HRA - House Rent Allowance) प्रदान करने से संबंधित हैं। संघ ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो कर्मचारी कड़ा कदम उठाने को बाध्य होंगे।

ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें और मुख्य बिंदु

गया कॉलेज शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ द्वारा प्राचार्य को सौंपे गए ज्ञापन में कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्रमुखता से उठाया गया है, जिन पर लंबे समय से प्रशासनिक स्तर परलापरवाही बरती जा रही थी।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाये और सेवामुक्ति का लाभ: संघ का मुख्य आरोप है कि जो कर्मचारी अपनी सेवा पूरी कर चुके हैं और सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उन्हें उनके सेवांत लाभ (Retirement Benefits जैसे ग्रेच्युटी, पेंशन कागजात, पीएफ और अन्य बकाया) प्राप्त करने के लिए अनावश्यक रूप से चक्कर काटने पड़ रहे हैं। संघ ने मांग की है कि सभी सेवानिवृत्त कर्मियों के मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन किया जाए।

आवासों की जर्जर स्थिति और मकान किराया भत्ता (HRA): कॉलेज परिसर में कर्मचारियों के रहने के लिए बने सरकारी आवास वर्षों पुराने होने के कारण बेहद जर्जर और दयनीय स्थिति में पहुंच चुके हैं। कई आवासों की छतें टपकती हैं और दीवारें जर्जर हो चुकी हैं, जिनकी मरम्मत के लिए कॉलेज प्रशासन द्वारा कोई सुधि नहीं ली जा रही है। संघ ने मांग की है कि यदि कॉलेज प्रशासन इन आवासों की समय पर मरम्मत और रखरखाव कराने में असमर्थ है, तो कर्मचारियों को नियमानुसार मकान किराया भत्ता (HRA) प्रदान किया जाए ताकि वे बाहर किराए के मकान में सुरक्षित जीवन जी सकें।

पदोन्नति और वित्तीय लाभ के लंबित मामले: कर्मचारियों ने अपने दैनिक कार्यहित और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत मिलने वाले एरियर, समयबद्ध प्रोन्नति (Promotion) और अन्य वित्तीय लाभों को भी शीघ्र अति शीघ्र जारी करने की जोरदार मांग की है।

संघ की चेतावनी: प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ आंदोलन की हुंकार

गया कॉलेज शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ ने ज्ञापन सौंपने के दौरान कॉलेज प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है।

हक के लिए संघर्ष का ऐलान: संघ के नेताओं ने कहा कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को अधिकारियों के समक्ष रखते आ रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। जमीन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।

कार्यों के बहिष्कार की चेतावनी: संघ ने कॉलेज प्रबंधन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर उनकी सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ चरणबद्ध आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और कॉलेज के प्रशासनिक कार्यों के बहिष्कार करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन की होगी।

गया कॉलेज शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ द्वारा प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा जाना और अपनी मांगों को लेकर सख्त तेवर दिखाना यह साबित करता है कि शैक्षणिक संस्थानों में प्रशासनिक पारदर्शिता और कर्मचारियों का कल्याण कितना महत्वपूर्ण है। सेवानिवृत्त कर्मियों के अधिकारों की रक्षा और जर्जर आवासों के एवज में मकान किराया भत्ते की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि गया कॉलेज का प्रशासनिक तंत्र संघ की इन चेतावनियों को कितनी गंभीरता से लेता है और कितनी जल्दी इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालता है, ताकि कॉलेज में सुचारू रूप से शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य चलता रहे।