मुफ्त बिजली योजना को मिली रफ्तार, जिले के 1,144 घरों पर लगे सोलर रूफटॉप; 7.75 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी

भागलपुर/पटना। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत बिहार में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रगति हो रही है। योजना के अंतर्गत जिले के 1,144 परिवारों के घरों पर अब तक सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। इन लाभार्थियों को केंद्र सरकार की ओर से 7.75 करोड़ रुपये की सब्सिडी भी जारी की गई है। यह जानकारी संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

केंद्र सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का उद्देश्य देशभर के करोड़ों परिवारों को सस्ती, स्वच्छ और टिकाऊ बिजली उपलब्ध कराना है। योजना के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाकर बिजली उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिल रहा है।

संसद में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने बताया कि जिले में अब तक 1,144 परिवार इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। इन सभी लाभार्थियों के बैंक खातों में कुल 7.75 करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे हस्तांतरित की गई है। सरकार का कहना है कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यों और वितरण कंपनियों के साथ मिलकर लगातार काम किया जा रहा है।

सांसद अजय कुमार मंडल ने संसद में योजना की प्रगति पर संतोष जताते हुए कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं की ओर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कई लाभार्थियों को बैंक ऋण स्वीकृत होने में अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ स्थानों पर निम्न गुणवत्ता वाले उपकरण लगाए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उन्होंने सरकार से इन समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने की मांग की।

केंद्र सरकार ने अपने जवाब में बताया कि 22 जुलाई 2026 तक बिहार में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत 87,787 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 24,238 घरों पर सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 24,970 परिवारों को योजना का लाभ प्रदान किया गया है। राज्यभर में अब तक 161.76 करोड़ रुपये की सब्सिडी लाभार्थियों के खातों में जारी की जा चुकी है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि योजना के तहत गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके लिए सोलर पैनल, इन्वर्टर और अन्य उपकरणों के लिए कड़े तकनीकी मानक निर्धारित किए गए हैं। केवल सरकार द्वारा पंजीकृत विक्रेताओं (Registered Vendors) से ही उपकरण खरीदने की अनुमति है, ताकि लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध हो सके।

योजना के तहत एक और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि सोलर सिस्टम लगाने वाले अधिकृत विक्रेताओं के लिए पांच वर्ष तक नि:शुल्क रखरखाव (फ्री मेंटेनेंस) उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। इससे लाभार्थियों को तकनीकी खराबी या रखरखाव से जुड़ी समस्याओं का समाधान बिना अतिरिक्त खर्च के मिल सकेगा।

गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने थर्ड-पार्टी निरीक्षण की भी व्यवस्था की है। इसके तहत स्वतंत्र एजेंसियां समय-समय पर स्थापित सोलर सिस्टम का निरीक्षण करती हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी उपकरण निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं और सही तरीके से कार्य कर रहे हैं।

केंद्र सरकार ने शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए 15555 टोल-फ्री हेल्पलाइन भी संचालित की है। यदि किसी लाभार्थी को बैंक ऋण, सोलर वेंडर, सब्सिडी, इंस्टॉलेशन या अन्य किसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है, तो वह इस हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकता है। सरकार का दावा है कि शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

सांसद अजय कुमार मंडल ने जिले के अधिक से अधिक पात्र परिवारों से इस योजना का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना न केवल बिजली के बढ़ते खर्च को कम करने में मदद करेगी, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि आवेदन करने से पहले केवल अधिकृत पोर्टल और पंजीकृत विक्रेताओं के माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी करें।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा के उपयोग से पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और उपभोक्ताओं को लंबे समय में आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही, कार्बन उत्सर्जन में कमी आने से जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

बिहार सरकार और बिजली वितरण कंपनियां भी योजना के प्रचार-प्रसार और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जागरूकता अभियान चला रही हैं। विभिन्न जिलों में शिविर लगाकर लोगों को आवेदन प्रक्रिया, सब्सिडी, बैंक ऋण और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक परिवार इस योजना से जुड़ सकें।

हालांकि, बैंक ऋण की स्वीकृति में देरी और कुछ स्थानों पर उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायतें योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के सामने चुनौती बनी हुई हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि इन समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और निगरानी लगातार की जा रही है।

फिलहाल उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना बिहार में तेजी से आगे बढ़ रही है। हजारों परिवार सौर ऊर्जा से जुड़ रहे हैं और बिजली बिल में राहत के साथ स्वच्छ ऊर्जा का लाभ उठा रहे हैं। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में आवेदन और इंस्टॉलेशन की संख्या में और वृद्धि होगी, जिससे राज्य में अक्षय ऊर्जा के उपयोग को नई गति मिलेगी।