ऑटो टिपर खरीद घोटाले में तत्कालीन नगर आयुक्त पर बड़ी कार्रवाई, पेंशन में होगी 5 प्रतिशत स्थायी कटौती
मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर नगर निगम में वर्ष 2018 के दौरान ऑटो टिपर की खरीद में सामने आए कथित घोटाले के मामले में राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने तत्कालीन नगर आयुक्त रंगनाथ चौधरी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पूरी करते हुए उनकी पेंशन में पांच प्रतिशत की स्थायी कटौती करने का आदेश जारी किया है। यह मामला करीब आठ वर्ष पुराना है और लंबे समय तक चली जांच के बाद सरकार ने यह दंडात्मक कार्रवाई की है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नगर निगम द्वारा ऑटो टिपर की खरीद प्रक्रिया में वित्तीय नियमों और सरकारी खरीद संबंधी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई, जिसमें कई स्तरों पर अनियमितताओं की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्यवाही शुरू की गई और अब अंतिम निर्णय लेते हुए तत्कालीन नगर आयुक्त की पेंशन में स्थायी कटौती का आदेश दिया गया है।
खरीद प्रक्रिया पर उठे थे सवाल
जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने शहर में कचरा संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से ऑटो टिपर खरीदने की योजना बनाई थी। लेकिन खरीद प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इसमें पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप था कि निविदा प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और उपकरणों की खरीद में कई प्रशासनिक तथा वित्तीय अनियमितताएं बरती गईं।
शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभागों ने मामले की प्रारंभिक जांच कराई। जांच में कई बिंदुओं पर नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलने के बाद विस्तृत विभागीय जांच शुरू की गई। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन नगर आयुक्त की प्रशासनिक जिम्मेदारी तय की गई।
विभागीय जांच में मिली अनियमितताएं
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों तथा खरीद प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया। जांच में यह पाया गया कि सरकारी खरीद संबंधी निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था।
इसी आधार पर बिहार सरकारी सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की गई। चूंकि संबंधित अधिकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए सेवा समाप्ति के बाद लागू होने वाले पेंशन नियमों के अंतर्गत दंड निर्धारित किया गया।
पेंशन में होगी स्थायी कटौती
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार तत्कालीन नगर आयुक्त रंगनाथ चौधरी की मासिक पेंशन में पांच प्रतिशत की स्थायी कटौती की जाएगी। इसका प्रभाव जीवनभर मिलने वाली पेंशन पर रहेगा। प्रशासनिक मामलों के जानकारों का कहना है कि सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई तभी की जाती है, जब विभागीय जांच में उनकी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से स्थापित हो जाती है।
आठ साल बाद आया अंतिम फैसला
यह मामला वर्ष 2018 का बताया जा रहा है। शिकायत दर्ज होने के बाद जांच, दस्तावेजों के सत्यापन, विभागीय सुनवाई और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में काफी समय लगा। लगभग आठ वर्षों बाद सरकार ने अंतिम निर्णय जारी किया है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने मामलों में भी सरकार कार्रवाई कर रही है, जिससे यह संदेश जाता है कि वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में समय बीत जाने के बावजूद जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
ऑटो टिपर खरीद प्रकरण सामने आने के बाद नगर निगम की खरीद प्रणाली और वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय निकायों में बड़ी खरीद के दौरान पारदर्शिता, ई-टेंडरिंग, तकनीकी मूल्यांकन और वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया का कड़ाई से पालन होना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद सामने न आएं।
नगर निगम के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि अब अधिकांश सरकारी खरीद प्रक्रियाएं ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी हो चुकी हैं, जिससे अनियमितताओं की संभावना पहले की तुलना में कम हुई है।
भ्रष्टाचार पर सरकार का सख्त संदेश
राज्य सरकार लगातार सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर दे रही है। बीते कुछ वर्षों में कई मामलों में विभागीय जांच के बाद अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। ऑटो टिपर खरीद मामले में पेंशन कटौती का निर्णय भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि सरकारी धन के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया जा रहा है। इससे वर्तमान अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच जवाबदेही की भावना भी मजबूत होगी।
स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय
सरकार के इस निर्णय के बाद मुजफ्फरपुर नगर निगम से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर के सामाजिक संगठनों ने भी सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम जैसी संस्थाओं पर शहर की सफाई, जलनिकासी और बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में सरकारी संसाधनों की खरीद पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होनी चाहिए ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
भविष्य के लिए सीख
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सभी सरकारी विभागों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है। किसी भी खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन, दस्तावेजों का सही संधारण और वित्तीय पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। यदि प्रक्रिया में लापरवाही बरती जाती है तो वर्षों बाद भी संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
मुजफ्फरपुर नगर निगम के ऑटो टिपर खरीद मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त रंगनाथ चौधरी की पेंशन में पांच प्रतिशत स्थायी कटौती का निर्णय यह दर्शाता है कि सरकारी धन से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने के लिए सरकार गंभीर है। करीब आठ वर्ष पुराने इस प्रकरण में विभागीय जांच के बाद लिया गया फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस कार्रवाई का असर अन्य सरकारी विभागों की खरीद प्रक्रियाओं और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी देखने को मिल सकता है।