19 लाख रुपये लूट मामले में माधोपुर हजारी के पूर्व मुखिया अनिल राय गिरफ्तार, चंदन सिंह ने जौनपुर के व्यापारी को सस्ते सोने का दिया था झांसा
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से अपराध और राजनीति के गठजोड़ का एक और बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने एक बड़े और शातिर आपराधिक षड्यंत्र का पर्दाफाश करते हुए माधोपुर हजारी पंचायत के पूर्व मुखिया अनिल राय को 19 लाख रुपये नकद लूटने और छीनने के गंभीर मामले में गिरफ्तार कर लिया है। इस सनसनीखेज वारदात का ताना-बाना बेहद शातिर तरीके से बुना गया था, जिसमें मुख्य सरगना चंदन सिंह ने उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से आए एक सीधे-साधे और प्रतिष्ठित व्यापारी मोहन गुप्ता को अपना निशाना बनाया था। चंदन सिंह और उसके सहयोगियों ने व्यापारी को बाजार मूल्य से बेहद कम कीमत पर शुद्ध सोना उपलब्ध कराने का लालच दिया और सस्ते सोने का झांसा देकर उन्हें मुजफ्फरपुर बुलाया, जहाँ इस पूरी ठगी और बलपूर्वक नकदी छीनने की खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से मुजफ्फरपुर और आसपास के राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में भारी खलबली मच गई है।
घटना की पृष्ठभूमि: जौनपुर के व्यापारी को सस्ते सोने का लालच
इस पूरी आपराधिक साजिश की शुरुआत उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के एक व्यापारी मोहन गुप्ता को अपने जाल में फंसाने से हुई। मुख्य आरोपी चंदन सिंह और उसके शातिर गिरोह ने व्यापारी मोहन गुप्ता से संपर्क साधा और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनके पास तस्करी का या रियायती दरों पर मिलने वाला ऐसा सोना है, जिसे वे बहुत ही सस्ते दामों में बेच सकते हैं।
सोने की चमक और कम कीमत में ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में आकर जौनपुर का वह व्यापारी इन शातिर अपराधियों के झांसे में आ गया। आरोपियों ने व्यापारी को यह यकीन दिलासा दिलाया कि वे मुजफ्फरपुर आएं, नकद रुपये साथ लेकर आएं और बदले में सोने की बड़ी खेप सुरक्षित लेकर लौट जाएं। व्यापारी को क्या पता था कि यह सुनहरा सौदा सोने का नहीं, बल्कि उनकी गाढ़ी कमाई को लूटने और जान से मारने का एक खतरनाक जाल साबित होने वाला है।
मुजफ्फरपुर में प्रवेश और 19 लाख रुपये की लूट की वारदात
तय योजना के अनुसार, जौनपुर के व्यापारी मोहन गुप्ता भारी-भरकम रकम यानी 19 लाख रुपये नकद लेकर मुजफ्फरपुर पहुँचे। जैसे ही व्यापारी निर्धारित स्थान पर पहुँचे, चंदन सिंह और उसके गुर्गों ने उन्हें अपने कब्जे में लेने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया।
सोने का पैकेट या असली सौदा दिखाने के बजाय अपराधियों ने बल, धोखे और धौंस का सहारा लिया। सुनसान या नियंत्रित इलाके में ले जाकर आरोपियों ने व्यापारी मोहन गुप्ता को धमकाया और उनके पास मौजूद 19 लाख रुपये नकद जबरन छीन लिए। जब पीड़ित व्यापारी ने इसका विरोध किया और खुद को ठगा हुआ महसूस करते हुए शोर मचाना चाहा, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ दी गईं और मौके से भगा दिया गया। अपनी जीवनभर की पूंजी लुट जाने के बाद व्यापारी ने सुन्न होकर स्थानीय थाने की शरण ली और पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई।
पुलिस का एक्शन: मास्टरमाइंड की तलाश और पूर्व मुखिया अनिल राय की गिरफ्तारी
जौनपुर के व्यापारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन एक विशेष अनुसंधान दल (Special Investigation Team) का गठन किया। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन और गुप्तचरों के माध्यम से इस पूरे सिंडिकेट की गहराई से पड़ताल शुरू की।
अपराधियों की पहचान: जांच के दौरान पुलिस को पुख्ता सबूत मिले कि इस पूरी ठगी और लूट के पीछे चंदन सिंह का गिरोह मुख्य रूप से सक्रिय था।
पूर्व मुखिया की संलिप्तता का खुलासा: अनुसंधान जैसे-जैसे आगे बढ़ा, यह बात सामने आई कि माधोपुर हजारी पंचायत के पूर्व मुखिया अनिल राय की इस पूरे प्रकरण में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गहरी संलिप्तता रही है। अपराधियों को संरक्षण देने और लूट की इस साजिश को जमीन पर उतारने में अनिल राय की भूमिका का पर्दाफाश हुआ।
गिरफ्तारी और न्यायिक कार्रवाई: पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने जाल बिछाया और पूर्व मुखिया अनिल राय को धर दबोचा। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश और आगे की जांच
पूर्व मुखिया अनिल राय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस गिरोह के सरगना चंदन सिंह और अन्य फरार गुर्गों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने पहले भी और कितने व्यापारियों या भोले-भाले लोगों को सस्ते सोने का झांसा देकर अपनी ठगी का शिकार बनाया है।
अधिकारियों का कहना है कि लूटी गई 19 लाख रुपये की आंशिक या पूर्ण बरामदगी के लिए आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कैसे आपराधिक तत्वों के साथ मिलकर कुछ सफेदपोश लोग या रसूखदार व्यक्ति कानून की धज्जियां उड़ाते हैं, लेकिन पुलिस की सख्त निगरानी के चलते अब अपराधियों के लिए बचना नामुमकिन होता जा रहा है।