जमानत के बाद बढ़ी पूर्व प्रभारी डीएओ हिमांशु कुमार की मुश्किलें, निलंबन अवधि बढ़ाई गई
मुजफ्फरपुर। जिले के पूर्व प्रभारी जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) एवं अनुमंडल कृषि अधिकारी (पूर्वी) हिमांशु कुमार की प्रशासनिक मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। विभाग ने उनके खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच निलंबन अवधि को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब उन्हें संबंधित मामले में न्यायालय से जमानत मिल चुकी है और वे जेल से बाहर आ चुके हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जमानत मिलने के बावजूद उनके खिलाफ विभागीय जांच अभी जारी है। इसी कारण सरकार ने निलंबन की अवधि को बढ़ाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जांच पूरी होने तक उनके मामले में अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।
जमानत के बाद भी नहीं मिली राहत
जानकारी के अनुसार, हिमांशु कुमार को पूर्व में एक मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद कृषि विभाग ने सेवा नियमों के तहत उन्हें निलंबित कर दिया था। बाद में न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन विभाग ने इसे सेवा में वापसी का आधार नहीं माना।
सरकारी सेवा नियमों के तहत यदि किसी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच या आपराधिक मामला लंबित रहता है तो केवल जमानत मिलने से निलंबन स्वतः समाप्त नहीं होता। इसी प्रावधान के तहत विभाग ने उनकी निलंबन अवधि बढ़ाने का आदेश जारी किया है।
विभागीय जांच अभी जारी
सूत्रों का कहना है कि हिमांशु कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की विभागीय स्तर पर विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों और संबंधित अधिकारियों के बयान भी शामिल किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि उन्हें सेवा में बहाल किया जाएगा या उनके विरुद्ध आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अधिकारी के मामले में अंतिम निर्णय तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाता है। इसलिए फिलहाल निलंबन अवधि बढ़ाने का निर्णय पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
नियमों के अनुरूप लिया गया फैसला
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार सरकारी सेवा नियमों में यह स्पष्ट व्यवस्था है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच लंबित हो तो विभाग आवश्यकता पड़ने पर निलंबन की अवधि बढ़ा सकता है। इसका उद्देश्य निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना होता है।
इसी नियम के तहत हिमांशु कुमार के मामले में भी विभाग ने समीक्षा के बाद निलंबन अवधि बढ़ाने का आदेश जारी किया है। इससे स्पष्ट है कि विभाग जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहता।
विभागीय अधिकारियों की नजर जांच रिपोर्ट पर
कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि जांच में अधिकारी को आरोपों से मुक्त पाया जाता है तो उन्हें सेवा में बहाल किया जा सकता है। वहीं यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो विभागीय कार्रवाई और कड़ी हो सकती है। इसमें वेतन संबंधी निर्णय, पदस्थापन, सेवा अभिलेख में टिप्पणी अथवा अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
कर्मचारियों के बीच बनी चर्चा
पूर्व प्रभारी डीएओ के निलंबन की अवधि बढ़ाए जाने की खबर के बाद कृषि विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन अब ऐसे मामलों में नियमों का सख्ती से पालन कर रहा है और जांच पूरी होने तक किसी अधिकारी को राहत नहीं दी जा रही है।
कई कर्मचारियों का मानना है कि इससे विभाग में जवाबदेही बढ़ेगी और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। वहीं कुछ लोग यह भी मानते हैं कि अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
न्यायालय और विभागीय प्रक्रिया अलग
कानूनी जानकार बताते हैं कि न्यायालय से जमानत मिलना केवल व्यक्ति की अस्थायी रिहाई का आदेश होता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वह आरोपों से पूरी तरह मुक्त हो गया है। दूसरी ओर विभागीय कार्रवाई अपने अलग नियमों और प्रक्रिया के अनुसार चलती है।
यही कारण है कि कई मामलों में अदालत से जमानत मिलने के बावजूद संबंधित कर्मचारी का निलंबन जारी रहता है। यदि विभाग को लगता है कि जांच प्रभावित हो सकती है या आरोप गंभीर हैं तो वह निलंबन अवधि बढ़ा सकता है।
आगे क्या होगा?
अब पूरे मामले में सभी की निगाहें विभागीय जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद कृषि विभाग यह तय करेगा कि हिमांशु कुमार को सेवा में बहाल किया जाए या उनके खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। फिलहाल निलंबन अवधि बढ़ने के बाद उनकी सेवा से जुड़ी स्थिति यथावत बनी रहेगी।
प्रशासनिक सख्ती का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में राज्य सरकार विभिन्न विभागों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर रही है। ऐसे मामलों में निलंबन की अवधि बढ़ाने, जांच में तेजी लाने और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की नीति अपनाई जा रही है। हिमांशु कुमार के मामले को भी इसी प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
मुजफ्फरपुर के पूर्व प्रभारी डीएओ सह अनुमंडल कृषि अधिकारी (पूर्वी) हिमांशु कुमार को न्यायालय से जमानत मिलने के बावजूद फिलहाल विभागीय राहत नहीं मिली है। कृषि विभाग ने जांच पूरी होने तक उनकी निलंबन अवधि बढ़ा दी है। अब अंतिम फैसला विभागीय जांच की रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी रहेगी।