पीरपैंती प्रखंड में सड़क किनारे अवैध बालू और छर्री के ढेर से बढ़ रहे हैं जानलेवा सड़क हादसे; सिकुड़ती सड़कों ने बढ़ाई राहगीरों की मुश्किलें, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के भागलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले पीरपैंती प्रखंड क्षेत्र से एक गंभीर और लगातार विकराल होती समस्या सामने आ रही है। प्रखंड के विभिन्न मुख्य मार्गों और ग्रामीण सड़कों पर सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है, और इन दुर्घटनाओं के पीछे कोई तकनीकी खराबी या वाहन की स्पीड नहीं, बल्कि सड़कों के किनारे धड़ल्ले से गिराए जा रहे बालू, गिट्टी (छर्री) और अन्य निर्माण सामग्रियों के अवैध ढेर मुख्य वजह बनते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों द्वारा मुख्य सड़कों की पटरियों पर किए जा रहे इस अवैध कब्जे के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं, जिससे आए दिन वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार होकर अपनी जान गंवाने या गंभीर रूप से घायल होने को विवश हैं। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग इस पर आंखें मूंदे बैठा है, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

सड़कों पर अवैध कब्जा और मौत का खुला खेल

पीरपैंती प्रखंड के प्रमुख रास्तों, बाजार क्षेत्रों और ग्रामीण संपर्क मार्गों का हाल इन दिनों बदहाल हो चुका है:

सड़क की पटरियों पर मनमानी: भवन निर्माण सामग्री के कारोबार से जुड़े लोग या मकान मालिक अपनी सुविधा के लिए बालू, छर्री (गिट्टी) और ईंटों के बड़े-बड़े ढेर सीधे मुख्य सड़क की पटरियों पर ही डंप करवा देते हैं। कई बार तो आधी सड़क तक इन सामग्रियों का कब्जा होता है।

रात्रि के समय अदृश्य खतरे: सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सड़क पर फैलाए गए इन बालू और छर्री के ढेरों पर रात के समय कोई संकेतक (Reflector) या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया जाता है। अंधेरे में जब तेज रफ्तार वाहन या बाइक चालक गुजरते हैं, तो बालू के ढेर पर पहिया फिसलने से वे अनियंत्रित होकर भयानक सड़क दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

संकरी होती सड़कें और वाहनों की आवाजाही में बाधा

बालू और छर्री के अवैध भंडारण के कारण सड़क की चौड़ाई सिमटकर रह गई है, जिसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं:

आमने-सामने की भिड़ंत: चौड़ी सड़कें जहां आसानी से दो बड़े वाहनों को पास देने के लिए पर्याप्त थीं, वे अब संकरी गलियों जैसी बन गई हैं। विपरीत दिशा से आ रहे वाहनों को बचाने के चक्कर में कई बार गाड़ियां बालू के ढेरों पर चढ़ जाती हैं और पलट जाती हैं।

दोपहिया चालकों और पैदल यात्रियों के लिए नर्क बनी राह: बाइक चालकों, साइकिल सवारों और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए यह रास्ते किसी खतरे से खाली नहीं हैं। बालू पर पहिया फिसलने से रोज दर्जनों लोग गिरकर जख्मी हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन के सुस्त रवैये के कारण अवैध कब्जा करने वालों के हौसले बुलंद हैं।

स्थानीय निवासियों का फूटा गुस्सा, प्रशासन पर उदासीनता का आरोप

इस गंभीर समस्या को लेकर पीरपैंती के स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में प्रशासन के खिलाफ गहरा असंतोष है:

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नदारद: स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस अवैध डंपिंग और बढ़ते हादसों के बारे में लिखित व मौखिक शिकायतें दी हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति: कभी-कभार यदि कोई मामूली जांच होती भी है, तो औपचारिकता पूरी कर अधिकारी लौट जाते हैं और कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर से जस की तस हो जाती है।

प्रशासनिक जिम्मेदारी और सुधार की सख्त जरूरत

सड़क सुरक्षा के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार भी सार्वजनिक सड़कों पर निर्माण सामग्री का भंडारण पूरी तरह अवैध है:

जुर्माना और जब्ती की मांग: प्रबुद्ध नागरिकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर सड़कों के किनारे अवैध रूप से बालू और छर्री डंप करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाने और सामग्री जब्त करने की कार्रवाई करनी चाहिए।

नियमित गश्त और निगरानी: मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस की गश्त बढ़ाई जानी चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति सड़क की पटरियों पर अतिक्रमण करने की हिम्मत न जुटा सके।

पीरपैंती प्रखंड में सड़कों के किनारे लगे बालू और छर्री के ढेर केवल यातायात में बाधा नहीं हैं, बल्कि ये मासूम लोगों की जिंदगी के लिए खुला खतरा बन चुके हैं। यदि समय रहते प्रशासन ने इस गंभीर समस्या पर संज्ञान नहीं लिया और अवैध डंपिंग करने वालों पर शिकंजा नहीं कसा, तो आने वाले दिनों में यह लापरवाही और भी कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ सकती है। जरूरत इस बात की है कि अधिकारी कागजी बैठकों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर कड़े कदम उठाएं, ताकि आम जनता की यात्रा सुरक्षित हो सके।