पूर्णिया के राजमार्गों पर जानलेवा लापरवाही: क्रैश बैरियर काटकर अवैध रास्ते बनाने की होड़
पूर्णिया। पूर्णिया जिले से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और राज्य राजमार्ग (SH) इन दिनों हादसों के 'डेथ जोन' में तब्दील होते जा रहे हैं। राजमार्गों की सुरक्षा के लिए लगाए गए क्रैश बैरियरों को मनमाने ढंग से काटकर बनाए गए अवैध रास्तों और जगह-जगह की गई बैरिकेटिंग के पास खुले अवैध कटों ने वाहन चालकों और राहगीरों के लिए मौत का जाल बिछा दिया है। 'हिन्दुस्तान' की पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि स्थानीय स्वार्थ और शॉर्टकट अपनाने की प्रवृत्ति के कारण राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
सुरक्षा कवच को दी जा रही चुनौती
राजमार्गों के किनारे लगे क्रैश बैरियर किसी भी वाहन को दुर्घटना की स्थिति में सड़क से नीचे खाई में गिरने या डिवाइडर के दूसरी तरफ जाकर टकराने से रोकने के लिए लगाए जाते हैं। लेकिन पूर्णिया के विभिन्न हिस्सों में इन बैरियरों को गैस कटर से काटकर अवैध रास्ते बना दिए गए हैं। यह न केवल राजमार्ग प्राधिकरण के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उन हजारों यात्रियों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है जो इन सड़कों पर तेज रफ्तार में सफर करते हैं।
स्थानीय स्तर पर देखा जा रहा है कि ढाबों, पेट्रोल पंपों, और निजी संपत्तियों तक आसानी से पहुँचने के लिए इन बैरियरों को बेखौफ होकर काटा जा रहा है। कहीं-कहीं तो सीमेंट के ब्लॉक हटाकर अवैध कट बना दिए गए हैं, जहाँ से अचानक दुपहिया वाहन और ई-रिक्शा मुख्य सड़क पर आ जाते हैं, जिससे बड़े हादसों की आशंका बनी रहती है।
बैरिकेटिंग का गलत उपयोग और अवैध कट
एक ओर जहाँ क्रैश बैरियर काटे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन द्वारा की गई बैरिकेटिंग के पास भी अवैध कटों का जाल फैल गया है। प्रायः देखा जाता है कि जिन स्थानों पर बैरिकेटिंग होती है, वहाँ वाहन चालकों को धीमा होना पड़ता है। इसी का फायदा उठाकर बैरिकेटिंग के ठीक बगल में अवैध कट बना दिए गए हैं। ऐसे स्थानों पर हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है और अनियंत्रित गति से आने वाले बड़े वाहन अचानक ब्रेक लगाने के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
दुर्घटनाओं का बढ़ता ग्राफ
पूर्णिया में राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करने पर यह तथ्य सामने आया है कि करीब 40 प्रतिशत दुर्घटनाएं इन्हीं अवैध कटों की वजह से होती हैं। विशेष रूप से रात के समय, जब इन कटों के पास कोई संकेतक (Signage) नहीं होता, तो वाहन चालकों को खतरे का आभास नहीं हो पाता। हाल के महीनों में कई ऐसी घटनाएं दर्ज की गई हैं जहाँ अवैध रास्तों से अचानक सड़क पर आए वाहनों की चपेट में आकर कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
प्रशासनिक उदासीनता या मिलीभगत?
सवाल यह उठता है कि राजमार्ग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की तोड़फोड़ बिना किसी मिलीभगत के कैसे संभव है? जानकारों का कहना है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण अराजकता का माहौल है। समय-समय पर अवैध कटों को बंद करने का दावा तो किया जाता है, लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें फिर से खोल दिया जाता है। पूर्णिया के जागरूक नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राजमार्गों पर 'एक्सेस कंट्रोल' (Access Control) का पालन करना अनिवार्य है। यदि हर व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार रास्ता बनाएगा, तो राजमार्ग का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने सलाह दी है कि:
सघन गश्त: राजमार्ग पर गश्त करने वाली टीमों को अवैध कटों की पहचान कर उन्हें तुरंत बंद करना चाहिए।
सख्त जुर्माना: जो लोग क्रैश बैरियर काटकर अवैध रास्ता बनाते हैं, उनके खिलाफ FIR दर्ज की जानी चाहिए।
तकनीकी समाधान: अवैध कटों वाले स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि निगरानी हो सके।
जन जागरूकता: स्थानीय लोगों को यह समझाया जाए कि एक अवैध रास्ता न केवल उनके लिए बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी काल बन सकता है।
राजमार्गों की सुरक्षा किसी की व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर है। पूर्णिया प्रशासन को अब इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनानी होगी। यदि समय रहते इन अवैध रास्तों को स्थायी रूप से बंद नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह राजमार्ग 'यमराज के द्वार' साबित होंगे। राजमार्गों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शना, सीधे तौर पर बड़ी दुर्घटनाओं को न्योता देना है।